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रामविलास पासवान बोले- लालू यादव को छोड़कर नीतीश कुमार जितनी जल्दी एनडीए में आएंगे, उतना ही भला होगा

नरेंद्र मोदी के नाम पर रामविलास पासवान खुद एनडीए छोड़कर यूपीए में शामिल हुए थे। और तब केंद्र में मंत्री भी बने थे।
Author June 24, 2017 21:31 pm
पटना में आयोजित दावत-ए-इफ्तार में लालू यादव और नीतीश कुमार एक-दूसरे को गले लगाते हुए। (फोटो-PTI)

केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने के नीतीश कुमार के फैसले को सही कदम बताते हुए कहा कि नीतीश जितना जल्दी हो सके महागठबंधन से नाता तोड़कर राजग में आ जाएं, इससे बिहार का भला होगा। दिल्ली से शनिवार को पटना पहुंचे पासवान ने यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा, “राष्ट्रपति चुनाव में कोविंद जी के समर्थन का नीतीश कुमार ने जो निर्णय लिया, उसका हम स्वागत करते हैं। उनसे आग्रह करते हैं जल्दी से राजग में आ जाएं। उनके आने से राजग भी मजबूत होगा और वे भी मजबूत होंगे तथा बिहार का भी भला हो जाएगा।”

उन्होंने हालांकि इस दौरान नीतीश को दो नाव पर सवारी नहीं करने की नसीहत भी दे डाली। पासवान ने कहा कि नीतीश महागठबंधन में असहज महसूस कर रहे हैं। हाल के दिनों में ऐसे कई मौके आए हैं, जब उनकी असहजता सामने आई है। विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को लेकर नीतीश द्वारा दिए गए बयान का समर्थन करते हुए दलित नेता ने कहा कि उन्होंने (नीतीश) सही ही कहा है कि विपक्षी दलों ने जानबूझकर ‘बिहार की बेटी’ मीरा कुमार को हराने के लिए खड़ा किया है।

उन्होंने कहा कि यह सभी लोग जानते हैं कि राजग उम्मीदवार की जीत तय है। राजद के सत्ता में रहने से आज बिहार भ्रष्टाचारमय हो गया है, अपराध की घटनाओं में वृद्धि हुई है। ऐसे में नीतीश के राजग में आते ही बिहार में भ्रष्टाचार पर अंकुश लग जाएगा और अपराध की घटनाओं में कमी आ जाएगी। वैसे, लोकजनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष पासवान ने यह भी कहा कि राजग में आना और नहीं आना नीतीश को ही तय करना है।

2002 के गोधरा दंगों के बाद रामविलास पासवान खुद एनडीए छोड़कर लालू यादव के साथ यूपीए की नाव पर सवार हो गए थे। (फोटो- एक्सप्रेस आर्काइव)

लोजपा अध्यक्ष पासवान वर्ष 2002 में गुजरात में हुए दंगों के विरोध में राजग को छोड़कर कांग्रेस के नेतृत्व वाले संप्रग में शामिल हो गए थे। संप्रग सरकार में वह मंत्री भी रहे। वर्ष 2014 में उन्हें जब लगा कि अब राजग की सरकार बनने वाली है, तब मंत्री पद पाने के लिए वह 14 वर्ष बाद फिर राजग में शामिल हो गए। अब वह नीतीश को नसीहत दे रहे हैं कि जैसा मौका देखो, वैसा करो। किसी विचारधारा में क्या रखा है!

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  1. B
    bitterhoney
    Jun 25, 2017 at 12:18 am
    चलो तुम उधर को हवा हो जिधर की. पिसवान जैसे लोगों को अपने चेहरे से घृणा नहीं होती? ऐसे नीच नेताओं का मुंह काला करके, जूतों की माला पहना कर और गुजराती पर बिठाल कर सारे देश में घुमाना चाहिए
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