TMC Narada Sting jansatta story- तृणमूल कांग्रेस पर भारी पड़ सकता है नारदा स्टिंग - Jansatta
ताज़ा खबर
 

तृणमूल कांग्रेस पर भारी पड़ सकता है नारदा स्टिंग

कलकत्ता हाईकोर्ट के एक फैसले से साल भर पुराने नारदा स्टिंग आपरेशन का जिन्न अचानक बोतल से बाहर निकल आया है।

Gujarat Election Result 2017: पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी। (File Photo)

कलकत्ता हाईकोर्ट के एक फैसले से साल भर पुराने नारदा स्टिंग आपरेशन का जिन्न अचानक बोतल से बाहर निकल आया है। अदालत ने बीते सप्ताह इस मामले की जांच सीबीआइ को सौंपने का फैसला किया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। इससे ममता बनर्जी सरकार और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को भारी झटका लगा है। इस मुद्दे को भुनाने के लिए भाजपा बुधवार से ही सड़क पर उतर गई है। आज यहां स्टिंग वीडियो में नजर आने वाले नेताओं की जल्द गिरफ्तारी की मांग में पार्टी की ओर से निकले जुलूस के दौरान पुलिस वालों के साथ भी जम कर धक्का-मुक्की हुई। यह बंगाल के इताहस में संभवत: पहला मौका था जब किसी सरकार ने पार्टी के नेताओं के बचाव के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की हो। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किसी नेता के बचाव में सरकार की ओर से याचिका दायर नहीं करने का फैसला किया है।

इससे पहले बीती जनवरी में हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र जांच एजंसी को सौंपने का संकेत दिया था। हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश निशिता म्हात्रे ने कहा कि नारदा स्टिंग मामले में उपलब्ध सबूतों को देखते हुए इस मामले की गहन जांच जरूरी है। अब तक राज्य पुलिस इस मामले की जांच कर रही थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में अभियुक्त ऊंचे पद व पहुंच वाले हैं। इस मामले में राज्य पुलिस महज कठपुतली है। इसलिए अब हाईकोर्ट के अधिकार का इस्तेमाल करना जरूरी है। वैसे, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ को जांच के दौरान हाईकोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होने को कहा है। साथ ही उसे प्राथमिक रिपोर्ट जमा करने के लिए एक महीने का समय दिया है। हाईकोर्ट ने यह समयसीमा 72 घंटे तय की थी।हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस स्टिंग को भाजपा ने प्रायोजित किया था। उन्होंने कहा कि यह सबको पता है कि स्टिंग को भाजपा दफ्तर से जारी किया गया था। ममता का कहना था कि राज्य पुलिस ऐसे मामलों की जांच के लिए पूरी तरह सक्षम है। लेकिन उसे काम नहीं करने दिया गया। बीते साल नारदा स्टिंग के सामने आने के बाद बंगाल की राजनीति में तूफान पैदा हो गया था। इस वीडियो में तृणमूल कांग्रेस को कोई दर्जन भर सांसदों, मंत्रियों व नेताओं को रिश्वत के तौर पर लाखों की रकम लेते दिखाया गया था। ममता सरकार ने इसे फर्जी करार देते हुए स्टिंग करने वाले नारदा न्यूज के सीईओ मैथ्यू सैमुएल के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। हालांकि हाईकोर्ट ने सैमुएल को राहत दे दी है।

केंद्रीय फोरेंसिक लैबोरेटरी में जांच से वीडियो फुटेज की सच्चाई भी साबित हो गई थी, लेकिन तब सरकार व पार्टी लगातार इस वीडियो को फर्जी बताती रही है। ममता शुरू से ही कहती रही हैं कि नोटबंदी के खिलाफ उनके अभियान की वजह से ही केंद्र सरकार सीबीआइ और ईडी जैसी एजंसियों को तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।बीते साल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस वीडियो के सामने आने के बावजूद विपक्ष इसे ठोस चुनावी मुद्दा बनाने में नाकाम रहा था। ममता और उनके नेता इसे फर्जी और राजनीतिक साजिश करार देकर चुनावों में भारी कामयाबी हासिल की थी। लेकिन अब सीबीआइ के हाथों में जाने के बाद अचानक तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं और मंत्रियों से पूछताछ और गिरफ्तारी का खतरा पैदा हो गया है। अब सुप्रीम कोर्ट में मुंह की खाने के बाद तृणमूल कांग्रेस इस मामले से राजनीतिक तौर पर निपटने की रणनीति तैयार करने में जुटी है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App