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बिहार: प्रश्न पत्र छापना ही भूल गई यूनिवर्सिटी, कैंसल हुए एग्जाम

तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि प्रिंटिंग प्रेस में प्रश्न पत्र नहीं पहुंचे तो पिंट कैसे करते।

इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

बिहार के तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में स्नातकोत्तर हिंदी के 94 परीक्षार्थी प्रश्न पत्र उपलब्ध नहीं हो पाने पर शुक्रवार को परीक्षा नहीं दे पाए। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति नलिनीकांत झा ने इसको लेकर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए स्नातकोत्तर हिंदी के विभागाध्यक्ष और परीक्षा नियंत्रण विभाग के सेक्शन आफिसर को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उन्हें शनिवार तक जवाब देने का निर्देश दिया है, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके। स्नातकोत्तर हिंदी के दूसरे सेमेस्टर की इस अंतिम परीक्षा में आज कुल 94 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, पर प्रश्न पत्र नहीं उपलब्ध कराए जाने पर उनके परीक्षा नहीं दे सकने पर कुलपति ने इस परीक्षा की अगली तारीख आगामी 22 अप्रैल निर्धारित की है।

इस परीक्षा की तिथि का निर्धारण गत मार्च महीने के दूसरे सप्ताह में ही कर दिया था और इससे पूर्व स्नातकोत्तर हिंदी के दूसरे सेमेस्टर के तीन पेपर की परीक्षाएं आयोजित की जा चुकी हैं। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि प्रिंटिंग प्रेस में प्रश्न पत्र नहीं पहुंचे तो पिंट कैसे करते। बहरहाल कुलपति प्रो. एनके झा ने प्रॉक्टर डा. योगेंद्र को हिंदी विभागाध्यक्ष और परीक्षा नियंत्रक से कैफियत पूछने की हिदायद दी है। कुलपति शहर से बाहर है। विश्वविद्यालय के काम से राजभवन पटना गए है। डा. योगेंद ने सोशल मीडिया पर भी अपनी पोस्ट में पर्चा रद्द करने और उन दोनों से जवाब तलब करने की बात लिखी है। लेकिन इस सिलसिले में इम्तहान महकमा और हिंदी स्नातकोत्तर विभागाध्यक्ष अपनी गलती मानने तैयार नहीं है। वे एक दूसरे पर दोष मढ़ने पर तुले है।

परीक्षा देने सेंटर पर पहुंचे परीक्षार्थियों ने पर्चा न छपने की बात जानकर एक दफा तो भारी हंगामा खड़ा कर दिया था। यह देख सभी हक्के-बक्के से हो गए और इन्हें शांत करने के वास्ते किसी के पास कोई जवाब नहीं था। मसलन सभी तमाशबीन बने खड़े रहे। बाद में हिंदी की विभागाध्यक्ष डा. विद्या रानी के दखल से परीक्षार्थी तो मान गए। मगर उनके पास भी इसका सन्तुष्टपूर्ण जवाब नहीं था।

इस मामले के सामने आने के बाद एक सवाल यह भी उठता है कि जब परीक्षा के सारे प्रश्नपत्र परीक्षा महकमा के पास तैयार नहीं थे तो परीक्षा की तारीख घोषित करने का तुक क्या था। दरअसल बीते हफ्तेभर पहले ही नए कुलपति प्रो. नलिनीकांत झा ने पांडुचेरी से आकर कार्यभार संभाला है। इनकी बाकायदा नियुक्ति राज्यपाल सह कुलाधिपति ने की है। ये भागलपुर के आसपास गाँव के रहने वाले है  इसी विश्वविद्यालय के छात्र भी रहे है। विश्वविद्यालय में समय पर परीक्षा हो इनकी प्राथमिकता में से एक है, पर ऐसी हड़बड़ी और लापरवाही से तो ऐसा होता नहीं लगता। बल्कि ऐसे कामों से तो विश्वविद्यालय की नाक ही कट रही है।

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