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सर्वे: तेजस्‍वी 28% तो सुशील मोदी 9% लोगों की पसंद, 46% चाहते हैं नीतीश फिर बनें सीएम

सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि क्या महागठबंधन छोड़ने से नीतीश की छवि को नुकसान हुआ है तो 35 फीसदी लोगों ने हां में जवाब दिया है जबकि ना कहने वाले 56 फीसदी लोग हैं।

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव।

बिहार में जेडीयू अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी भी मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे पसंदीदा चेहरा हैं जबकि विपक्ष के नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव 28 फीसदी लोगों की पसंद के साथ दूसरे नंबर पर हैं। तेजस्वी तेजी के साथ लोगों में अपनी पैठ बनाते दिख रहे हैं। उन्हें मौजूदा उप मुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी से तीन गुना ज्यादा लोगों ने सीएम चेहरे को तौर पर पसंद किया है। मोदी को मात्र 9 फीसदी लोगों ने ही सीएम के तौर पर पसंद किया है। एक फीसदी लोगों ने पूर्व सीएम राबड़ी देवी को पसंद किया है। आज तक चैनल पर प्रसारित इंडिया डुडे-एक्सिस माई इंडिया सर्वे के मुताबिक सीएम नीतीश कुमार के कामकाज से 38 फीसदी लोग संतुष्ट हैं जबकि राज्य के 24 फीसदी लोग उसे ठीक ठाक मानते हैं। सर्वे के मुताबिक 34 फीसदी लोग नीतीश कुमार के काम-काज से असंतुष्ट हैं। यानी 24 फीसदी लोग बहुत खुश नहीं हैं। अगर वो पलट गए तो नीतीश कुमार को मुश्किल हो सकती है। हालांकि, राज्य में विधान सभा चुनाव होने में अभी दो साल से ज्यादा का वक्त है।

सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि क्या महागठबंधन छोड़ने से नीतीश की छवि को नुकसान हुआ है तो 35 फीसदी लोगों ने हां में जवाब दिया है जबकि ना कहने वाले 56 फीसदी लोग हैं। सर्वे के मुताबिक 49 फीसदी लोगों का मानना है कि महागठबंधन छोड़ने के बाद राज्य में भ्रष्टाचार में कमी आई है, जबकि 40 फीसदी लोगों का मानना है कि राज्य में भ्रष्टाचार में कोई कमी नहीं आई है। बता दें कि पिछले साल जुलाई 2017 में नीतीश कुमार ने लालू परिवार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए महागठबंधन छोड़ दिया था और फिर से बीजेपी के साथ गठबंधन कर सरकार बना ली थी।

बिहार में लोगों ने सफाई, रोजगार, पीने के पानी की कमी, कृषि और महंगाई को बड़ा मुद्दा माना है। सर्वे के मुताबिक राज्य के 53 फीसदी लोगों ने स्वच्छता को बड़ा मुद्दा माना है जबकि 52 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी को बड़ी समस्या बताया है। पीने के पानी को 50 फीसदी लोगों ने बड़ा मुद्दा बताया है। कृषि को 38 फीसदी और महंगाई को 32 फीसदी लोगों ने चुनावी मुद्दा बताया है।

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