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आईटी अफसरों की ‘सर्जिकल स्‍ट्राइक’: 80 गाड़ियों में 7 जिलों से पहुंचे 150 अफसर, 4 दि‍न चली रेड,200 करोड़ का कालाधन सामने आने का अनुमान

अधिकारियों ने इनके ठिकानों और बैंक लॉकरों से एक करोड़ रुपए नकद, 4 किलो सोना, 15 किलो चांदी जब्त की है।

इस तस्वीर का इस्तेमाल सांकेतिक तौर पर किया गया है।

बिहार के पूर्णिया में आय कर विभाग ने मेडिकल पेशे से जुड़े 25 ठिकानों पर अलग-अलग टीमें बनाकर छापेमारी की है जिसमें अभी तक 70 करोड़ रुपए से ज्यादा की चल-अचल सम्पत्ति का खुलासा हुआ है। यह आंकड़ा 200 करोड़ रुपए को पार कर सकता है। यह छापेमारी चार दिनों तक (बुधवार से शनिवार तक) लगातार जारी रही। आयकर अन्वेषण विभाग के सहायक निदेशक शिवशंकर यादव ने इसकी पुष्टि की है। इनके मुताबिक बैंकों के 35 लॉकरों में से फिलहाल 10 को ही खोला जा सका है। आगे की भी कार्रवाई जारी है। बहरहाल, आय कर अधिकारी ठिकानों से जब्त 150 से 200 बैंक खातों का डिटेल्स खंगालने में व्यस्त हैं। नोटबंदी के बाद बिहार-झारखंड में आय कर विभाग के सूत्र इसे अपनी सबसे बड़ी कामयाबी बता रहे हैं। तारीफ की बात यह है कि ब्राइट कैरियर स्कूल के निदेशक गौतम सिन्हा छापेमारी के वक्त पूर्णिया में मौजूद नहीं थे। वे अपनी बीमार पत्नी को लेकर मेदांता अस्पताल दिल्ली गए हुए थे। आय कर अधिकारियों ने मानवतावश उनके मकान और प्रतिष्ठान की तलाशी ताला तोड़कर नहीं ली बल्कि 48 घंटे तक उनके आने का इंतजार किया। जब वो दिल्ली से आए तब कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

सूत्र बताते हैं कि जिन लोगों के ठिकानों पर छापेमारी हुई है वहां से करोड़ों रुपए की कर चोरी और बेहिसाब जायदाद की जानकारी मिली है। इसी वजह से आय कर विभाग और गहन छानबीन करने में जुटा है। इसमें नोटबंदी के दौरान कालेधन को सफेद करने का खेल भी सामने आ रहा है। अधिकारियों ने इनके ठिकानों और बैंक लॉकरों से एक करोड़ रुपए नकद, 4 किलो सोना, 15 किलो चांदी जब्त की है। दिलचस्प बात यह है कि छापेमारी के दौरान एक प्रतिष्ठान के मालिक और निदेशकों ने खुद ही 26 करोड़ रुपए की अघोषित आमदनी की जानकारी सामने कर दी।

छापेमारी का नेतृत्व आय कर अपर आयुक्त मधुमालती घोष कर रही थीं और पटना, भागलपुर, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया और झारखंड के धनबाद, जमशेदपुर के 150 अधिकारी और कर्मचारी दिन रात इनके खाते और लेन-देन का डिटेल्स खंगालने में लगे थे। बुधवार को ये पूर्णिया 80 गाड़ियों से सवार हो पहुंचे थे। अचानक इनकी कार्रवाई से पूरे पूर्णिया में हड़कंप मच गया लेकिन इनके पहुंचने के पहले किसी को खबर नहीं थी। यहां तक हिदायत थी कि रास्ते में पड़ने वाले टोल प्लाजा तक को बगैर परिचय दिए टोल टैक्स भुगतान कर दिया जाए। ताकि किसी को शक न हो और छापामारी का मिशन कामयाब हो सके। हिफाजत के ख्याल से इस काम में 29 सेक्शन सशस्त्र पुलिस बल तैनात था।

पूर्णिया के जिन बड़े संस्थानों पर में आयकर छापेमारी हुई उनमें मैक्स 7 अस्पताल, मौर्या डायग्नोस्टिक क्लिनिक, एम्बिशन कोचिंग इंस्टीच्यूट शामिल है। एम्बिशन के निदेशक अमित कुमार सिन्हा, ब्राइट कैरियर स्कूल के निदेशक गौतम सिन्हा, ईशान, डा. मुकेश, डा. विभा झा, डा. ओपी साह ( फिजिशियन ) के मां भगवती नर्सिंग होम, डा. ओपी साह ( सर्जन ) के नीलम नर्सिंग होम, डा. विपिन कुमार सिंह का आरोग्य आशीर्वाद नर्सिंग होम, डा. ब्रह्मदेव कुमार, डा. एके सिन्हा के अलावा 12 शेयर धारकों के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई।

आयकर सूत्रों के मुताबिक पूर्णिया के गाँव कस्बा में एक मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी चल रही थी, जिसमें बड़ी मात्रा में काला धन निवेश किया गया है। इसका नाम सीमांचल इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल साइंस है। आयकर विभाग के अधिकारी बताते हैं कि ये संस्थाएं और ये ग्रुप आयकर विभाग के निशाने पर पहले से ही थे और इनके खिलाफ आयकर चोरी के पक्के सबूत भी थे लेकिन नोटबंदी में मैक्स7 अस्पताल के बैंक खाते में जैसे ही 1 करोड़ 62 लाख रुपये जमा हुए आयकर विभाग अधिकारियों का शक यकीन में बदल गया।

वीडियो: ड्राइवर ने की आत्महत्या; सुसाइड नोट में लिखा- 100 करोड़ रुपए का कालाधन सफेद करवा रहे थे

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