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नीतीश की विधान परिषद सदस्यता रद्द करने की मांग पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

शर्मा ने कहा कि कुमार के खिलाफ आपराधिक मामले की बात जानने के बावजूद निर्वाचन आयोग ने सदन की उनकी सदस्यता रद्द नहीं की और आज की तारीख तक वह संवैधानिक पद पर बने हुए हैं।

Author August 1, 2017 9:04 PM
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (Photo: PTI)

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बिहार विधान परिषद की सदस्यता को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में आरोप लगाया गया है नीतीश ने चुनाव के वक्त दिए हलफनामे में अपने खिलाफ आपराधिक मामले को कथित तौर पर छिपाया। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अमिताव रॉय तथा न्यायमूर्ति ए.एम.खानविलकर ने वकील एम.एल.शर्मा की ओर से दाखिल उस याचिका पर सुनवाई की सहमति दे दी, जिसमें मामले को लेकर जनता दल (युनाइटेड) के नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि नीतीश कुमार के खिलाफ एक आपराधिक मामला चल रहा है, जिसमें सन् 1991 में बाढ़ लोकसभा उपचुनाव से पहले उन्हें एक स्थानीय कांग्रेस नेता सीताराम सिंह की हत्या तथा चार अन्य को घायल किए जाने के मामले में आरोपी बनाया गया है।

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शर्मा ने कहा कि कुमार के खिलाफ आपराधिक मामले की बात जानने के बावजूद निर्वाचन आयोग ने सदन की उनकी सदस्यता रद्द नहीं की और आज की तारीख तक वह संवैधानिक पद पर बने हुए हैं। याचिका में बिहार के मुख्यमंत्री की विधानपरिषद की सदस्यता निर्वाचन आयोग के 2002 के आदेश के मुताबिक रद्द करने की मांग की गई है।

बता दें कि साल 2013 में नरेंद्र मोदी को बीजेपी में प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाए जाने के विरोध में नीतीश कुमार ने एनडीए से अपना एक दशक से पुराना संबंध तोड़ लिया था। 2015 में हुए बिहार विधान सभा चुनाव से पहले नीतीश ने राजद और कांग्रेस के साथ “महागठबंधन” बनाकर चुनाव लड़ा और राज्य में बहुमत की सरकार बनाई। लालू यादव के दोनों बेटे नीतीश कैबिनेट में मंत्री बनाया था। लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव “महागठबंधन” सरकार में डिप्टी सीएम थे। जब सीबीआई ने लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत सात लोगों पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया तो जदयू नेता तेजस्वी के इस्तीफे की मांग करने लगे। राजद ने इस मांग को मानने से साफ मना कर दिया जिसके बाद नीतीश ने इस्तीफा दे दिया और बीजेपी के सहयोग से सरकार बना ली।

देखिए वीडियो - नीतीश सरकार ने गौहत्या पर लगाई पूर्ण रोक

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