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नीट आवेदकों का दर्द: सालभर पैसे खर्च कर परीक्षा की तैयारी की, जब फॉर्म भरने का वक्त आया तो नियम क्यों बदला

आंदोलनरत छात्र कहते हैं कि साल भर तैयारी में लगे रहे। समय और पैसा बर्बाद हुआ। अब फार्म भरने के समय नया नियम आड़े खड़ा कर दिया गया है।

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गिरधारी लाल जोशी

देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नीट) के नियमों को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने भारत सरकार के नियमों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। नतीजतन, ऐन वक्त पर छात्रों को पढ़ाई छोड़ कर आंदोलन के लिए उतारू होना पड़ा है। छात्र मांग कर रहे हैं कि केंद्र सरकार के निर्देशों से इतर नियम बनाने पर सीबीएसई के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। दरअसल, 17 जनवरी 2017 को पत्रांक- यू.12023/16/2010-एमबी-II के जरिए स्वास्थ्य एवम् परिवार कल्याण मंत्रालय ने सीबीएसई के संयुक्त सचिव डा. संयम भारद्वाज को नीट के नियमों का जिक्र करते हुए इम्तिहान लेने की हरी झंडी दी। इस पत्र में 7 नियमों का हवाला दिया गया है। जिनमें दूसरे नम्बर का नियम छात्रों की उम्र और इम्तिहान में बैठने के मौके के बारे में है।

पत्र में उल्लिखित नियम के मुताबिक मेडिकल और डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया ने तय किया है कि जिनकी आयु 31 दिसंबर 2017 को 17 साल पूरी हो रही है, वैसे छात्र-छात्रा नीट में शामिल हो सकते हैं। उसी नियम में यह भी लिखा है कि इससे ऊपर की उम्र और इम्तिहान देने के मौके की कोई सीमा की पाबंदी नहीं होगी। साथ ही यह भी लिखा है कि यह नियम ऑल इंडिया कोटा सीट पर भी लागू होगा। पत्र पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अवर सचिव अमित बिश्वास का दस्तखत है जिसकी कॉपी भारतीय चिकित्सा और दंत चिकित्सा परिषद को भेजी गई है।

ऐसे में अब सवाल उठता है कि सीबीएसई ने नीट के संबंध में 31 जनवरी को जारी नोटिफिकेशन में इम्तिहान देने के तीन मौके (उसमें वे भी शामिल है जो एआईपीएमटी दे चुके हैं) और 25 साल की उम्र पूरी कर चुके छात्रों को प्रवेश परीक्षा में बैठने से रोकने का पेंच कैसे और किसने लगाया। यह समझ से परे है। इसी को लेकर पूरे देश में नीट देने के इच्छुक छात्रों ने आंदोलन कर दिया है। हालांकि, छात्रों का आंदोलन देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एक संशोधन करने को मजबूर हुआ है। जारी संशोधन की अधिसूचना के मुताबिक तीन मौके अबकी से गिने जाएंगे। मसलन, पिछले प्रयासों को नहीं गिना जाएगा लेकिन उम्र सीमा में बदलाव को लेकर अभी तक कोई संशोधन नहीं आया है। नए नियम के तहत सामान्य वर्ग के लिए उम्र 25 साल और आरक्षित वर्ग के आवेदकों के लिए 30 साल ही है।

स्मिता, केशव, उज्ज्वल, तनिका, स्नेहा सरीखे एक दर्जन से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने बातचीत में बताया कि अब तक सीबीएसई के 15 फीसदी और राज्य के 85 फीसदी सीटों के लिए ऊपर की कोई उम्र निर्धारित नहीं थी। यह अचानक आयु का फंडा कहां से आ गया। वह भी ऐन वक़्त पर। यह नीट की तैयारी कर रहे छात्रों के साथ नाइंसाफी है। आंदोलनरत छात्र कहते हैं कि साल भर तैयारी में लगे रहे। समय और पैसा बर्बाद हुआ। अब फार्म भरने के समय नया नियम आड़े खड़ा कर दिया गया है। इसे केंद्र सरकार फौरन वापस ले, वरना आंदोलन और तेज होगा। इनकी मांग है कि जब मौके अबकी से गिने जाएंगे तो उम्र की अधिकतम सीमा भी अगले साल से लागू हो।

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