बिहार में स्मार्ट सिटी का बुरा हाल, जरा सी बारिश में खुली अफसरशाही की पोल; डिप्टी सीएम के आवास में भी भरा पानी

हाल में केंद्र सरकार के कराए गए रैंकिंग में चारों स्मार्ट सिटी की रैंक नीचे आ गई हैं। भागलपुर 53 से 91, मुजफ्फरपुर 81 से 99, बिहारशरीफ 54 से 70 वें और पटना 29 से गिरकर 62 वें स्थान पर पहुंच गया है।

Smart City, Bihar
राजधानी पटना में बिहार की उपमुख्यमंत्री रेणु देवी के आवास के बाहर भरा पानी। (फोटो- पीटीआई)

बिहार में बारिश के दौरान शहरों की हालत बदतर हो जाती है। राजधानी पटना का आलम यह है कि उपमुख्यमंत्री रेणु देवी के आवास में भी पानी भरा रहता है। सड़कों पर कचरे का ढेर लगा रहता है तो नालियों का गंदा पानी भी बाहर बहता रहता है। राज्य के जिन शहरों को स्मार्ट सिटी बनाए जाने के लिए चुना गया है, राजधानी पटना उनमें से एक है। बाकी के शहर भागलपुर, मुजफ्फरपुर और बिहारशरीफ हैं। पांच साल बाद भी यहां की स्थिति जस की तस है।

इन शहरों में योजनाएं अधर में लटकी है। धरातल पर कुछ भी नजर नहीं आता है। टेंडर मांगे जाते है। खोले जाते है। फिर रद्द कर दिए जाते है। पांच साल से यही हो रहा है। नतीजतन हाल में केंद्र सरकार के कराए रैंकिंग में भागलपुर लुढ़क कर 91, मुजफ्फरपुर 99, बिहारशरीफ 70 वें और पटना 62 वें स्थान पर पहुंच गया है। तीन महीने पहले अप्रैल में हुए सर्वे में भागलपुर 53, बिहारशरीफ 54, पटना 29 और मुजफ्फरपुर 81 वें स्थान पर थे।

केंद्र सरकार के शहरी विकास व आवासीय मंत्रालय ने देश के सौ शहरों को स्मार्ट बनाने की योजना बनाई थी। इसमें राजधानी पटना, बिहार शरीफ, भागलपुर और मुजफ्फरपुर को चुना गया था। भागलपुर पहली सूची वाला शहर है, मगर यहां अफसरशाही के कारण कुछ भी नहीं हुआ है। भागलपुर में समेकित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, शहर के सड़कों को स्मार्ट बनाने, बरारी गंगा नदी दर्शन के स्थानों को उम्दा और रमणीक बनाने, स्वचालित यातायात सिगनल, भैरवा तालाब को रमणीक व दर्शनीय वाटर वोट बगैरह के साथ बनाना, आधुनिक टाउन हॉल का निर्माण, सैंडिस कंपाउंड को लोगों को टहलने के साथ बच्चों के खेलने के लान डेनिस, जिम, स्विमिंग पूल के साथ निर्माण करना, सुलभ पार्किंग,जन सुविधा केंद्र, स्मार्ट शौचालय,  शहर के बिजली तारों के फैले  जंगलात को अंडरग्राउंड करने  जैसी योजनाएं बनी थी। मगर सब अधर में लटकी है।

स्मार्ट सिटी परियोजना के जनसंपर्क अधिकारी अमित मिश्रा बताते है कि सभी योजनाओं के टेंडर पाइप लाइन में है। कुछ के टेंडर हो चुके है। सैंडिस कंपाउंड में काम चालू है। जल्द लोगों को दिखेगा। बताते है कि इन योजनाओं पर करीबन एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होंगे। लेकिन ये योजनाएं कब धरातल पर उतरेगी? इसका जबाव इनके पास भी नहीं है।

राज्य सरकार ने अब इन चारों स्मार्ट सिटी की देखरेख का जिम्मा पटना में बैठे वरीय आईएएस आनंद किशोर को दे दिया है। अब इनकी कार्य प्रणाली की वजह से भागलपुर स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ संजीत कुमार पांडे ने बैठक के बीच इस्तीफा दे दिया है। अधिकारियों की आपसी टकराव की वजह से ऐसा पहली दफा नहीं हुआ है। इनसे पहले भी जुलाई 2020 में सुनील कुमार ने सीईओ पद से इस्तीफा दे जा चुके है।

बताते है कि उन्होंने भी कायदे-कानून के तहत योजनाओं को कार्यान्वित करने की पहल की थी। जो बड़े अधिकारियों को रास नहीं आई। इनसे पहले मुख्य वित्त अधिकारी, मुख्य महाप्रबंधक, तीन इंजीनियर, आठ कम्प्यूटर आपरेटर और पीआरओ त्यागपत्र दे जा चुके है। वर्तमान कंपनी सचिव संदीप सहाय  भी विवादों में है। और अपनी मनमानी के लिए चर्चित है। और बीती 5 जुलाई से गैरहाजिर है।

बांका में वितीय गड़बड़ी की शिकायत पर पुलिस ने आपराधिक मामला दर्ज किया है। इन्हें डर है कि इस मामले में पुलिस फंसा सकती है। ड्यूटी से गायब होने का मतलब कहीं न कहीं दाल में काला है। इन्होंने 9 जुलाई और 19 जुलाई को ईमेल नगर आयुक्त को भेज छुटियां मंजूर करने का आग्रह किया है। इसमें वकीलों से सलाह लेने की बात कही है। इनके हिसाब से 29 जुलाई तक अवकाश पर है।

पिछले हफ्ते राज्य के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद भी भागलपुर आकर स्मार्ट सिटी की समीक्षा कर गए है। समीक्षा के  दौरान उन्होंने भी अधिकारियों को फटकार लगाई थी।

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