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भागलपुर यूनिवर्सिटी की सीनेट ने रद्द की दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर की एलएलबी की डिग्री

तोमर ने अवध विश्वविद्यालय फैजावाद से विज्ञान स्नातक की डिग्री और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी का माइग्रेशन सर्टिफिकेट साल 2001 में जमा किया था। ये दोनों सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए हैं।

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आखिरकार तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की सीनेट ने दिल्ली के विधायक और आप सरकार के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की कथित एलएलबी की डिग्री रद्द कर दी। सीनेट की बैठक सोमवार यानी 20 मार्च को टीएनबी कॉलेज में प्रभारी कुलपति क्षमेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई जिसमें विश्वविद्यालय का 755 करोड़ रुपए का बजट भी पारित किया गया। इससे पहले पूर्व कुलपति प्रो. रमाशंकर दूबे की अध्यक्षता में सिंडिकेट की 3 दिसंबर को हुई बैठक में तोमर की डिग्री रद्द करने का फैसला लिया गया था और उस पर अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल सह कुलाधिपति के पास भेजा गया था। लेकिन राजभवन ने इस काम के लिए सीनेट को अधिकृत कर दिया था और 20 मार्च को बैठक बुलाने की इजाजत दी थी। इससे पहले विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने 2 दिसंबर को बैठक में तोमर की डिग्री रद्द करने की सिफारिश सिंडिकेट को भेजी थी। इसके साथ ही मामले में आरोपी 14 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई थी।

प्रभारी कुलपति ने जनसत्ता.कॉम को बताया कि दिल्ली पुलिस ने 23 जनवरी को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय के दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के लिए अनापत्ति पत्र (एनओसी) मांगा था। 7 फ़रवरी को कार्यभार संभालते ही 9 फ़रवरी को स्पीड पोस्ट से इस बारे में दिल्ली पुलिस को पत्र भेज दिया गया है। यहां यह बताना जरूरी है कि इससे पहले भी दो बार तोमर मुद्दे पर परीक्षा बोर्ड की बैठक हो चुकी है। एक बार अनुशासन समिति की भी बैठक हो चुकी है जिसमें इस मामले पर पूर्व प्रतिकुलपति अवधेश किशोर राय की अध्यक्षता में बनी आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट मंजूर की गई थी। जांच समिति ने कानून की डिग्री रद्द करने के लिए तोमर से जवाब तलब किया था। साथ ही विश्वविद्यालय और मुंगेर के विश्वनाथ सिंह कॉलेज ऑफ लीगल स्टडीज के 14 अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की थी। तोमर के जवाब से बोर्ड संतुष्ट नहीं था। फिर भी उन्हें जवाब देने का कई मौका दिया।

यह अलग बात है कि इस मामले में दोषी ठहराए गए दो परीक्षा नियंत्रक समेत 14 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में विश्वविद्यालय प्रशासन अभी भी लीपापोती कर रहा है लेकिन दिल्ली पुलिस की सूची में इनके अलावा 5 और नाम हैं जिनका खुलासा अदालत में आरोप पत्र दायर होने के बाद हो सकेगा। लिहाजा, तबतक यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों में खौफ और संशय बना हुआ है। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने अपनी जांच में पाया है कि मुंगेर के विश्वनाथ सिंह कॉलेज ऑफ लीगल स्टडीज में साल 1994 में एलएलबी में दाखिला लेते वक्त तोमर ने अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद से विज्ञान स्नातक की डिग्री और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी का माइग्रेशन सर्टिफिकेट साल 2001 में जमा किया था। जांच में ये दोनों कागजात फर्जी पाए गए थे। भागलपुर तिलकामांझी विश्वविद्यालय ने भी अपने स्तर से जांच कराई थी, उसमें भी उनके दस्तावेज जाली साबित हुए थे।

इस सिलसिले में दिल्ली के हौज खास थाना के एसएचओ सतिंदर सांगवान की अगुवाई में जांच टीम 6 बार भागलपुर आई और हर बार तहकीकात कर नए सुराग की तलाश करती रही। इस दौरान कुलपति, प्रतिकुलपति, कुलसचिव डा. आशुतोष प्रसाद से भी मुलाकात की। सांगवान ने मुंगेर के वीएनएस कॉलेज ऑफ लीगल स्टडीज के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की। पुलिस जांच अधिकारी ने साल 1994 से अबतक रहे विश्वविद्यालय के सभी पर परीक्षा नियंत्रकों की सूची कुलसचिव से मांगी है। टेबुलेशन रजिस्टर और इससे जुड़े कई कागजात भी यहां से ले गई। विश्वविद्यालय के दो अधिकारियों को दिल्ली जाकर इन कागजातों को सत्यापित भी करना पड़ा था। अब क़ानूनी पहलू पर पुलिस मशविरा कर रही है। ताकि आरोप पत्र दायर करने में कोई चूक न रह जाए। सूचना है कि 22 मार्च को दिल्ली पुलिस इस सिलसिले में फिर भागलपुर आ रही है।

मालूम रहे कि पूर्व कुलपति प्रो. रमाशंकर दुबे और प्रति कुलपति डा. अवधेश किशोर राय का कार्यकाल फरवरी 2017 में पूरा हो चुका है और ये दोनों ही रिटायर हो चुके हैं जबकि यह मसला फरवरी 2016 से ही विश्वविद्यालय के लिए सिरदर्द बना हुआ है। मगर एक साल बीतने पर भी न तो तोमर की डिग्री रदद् हुई और न ही दोषी पर कोई खास कार्रवाई। जाहिर है पल्ला झाड़ने की नीयत और नरम रवैए की वजह से मामला झूलता रहा। सोमवार को हुई सीनेट की बैठक ने सारे मामले का निचोड़ निकाल कर अब तोमर की एलएलबी डिग्री रद्द करने का दो टूक फैसला लेकर उनकी डिग्री को फर्जी घोषित कर दिया है जो तोमर के लिए अदालत में कानूनी फंदा कसने का काम कर सकता है।

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