Senate meeting of Tilka manjhi Bhagalpur University on 20th March, may cancel LLB Degree of AAP Leader and ex Law Minister Jitendra Singh Tomar  - भागलपुर यूनिवर्सिटी की सीनेट बैठक 20 मार्च को, रद्द हो सकती है दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर की डिग्री - Jansatta
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भागलपुर यूनिवर्सिटी की सीनेट बैठक 20 मार्च को, रद्द हो सकती है दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर की एलएलबी डिग्री

तोमर ने अवध विश्वविद्यालय फैजावाद से विज्ञान स्नातक की डिग्री और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी का माइग्रेशन सर्टिफिकेट साल 2001 में जमा किया था। ये दोनों सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए हैं।

दिल्ली के गिरफ्तार पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ।

दिल्ली के विधायक और पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की कथित एलएलबी की डिग्री रद्द करने के लिए तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के सीनेट की बैठक 20 मार्च को बुलाई गई है। सीनेट ही तोमर की डिग्री रद्द करने का अंतिम फैसला करेगी। यह जानकारी प्रभारी कुलपति प्रो. क्षमेंद्र कुमार सिंह ने दी है। उधर दिल्ली पुलिस भी 5 मार्च के बाद तोमर और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर करने की तैयारी में है। थाना हौज खास के एसएचओ सतिंदर सांगवान ने भी इसकी जानकारी दी है। दरअसल, विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग और 2 दिसंबर को हुई सिंडिकेट की बैठक में तोमर की डिग्री रद्द करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही मामले में आरोपी 14 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। यह बैठक पूर्व कुलपति रमाशंकर दूबे की अध्यक्षता में हुई थी जिनका कार्यकाल 7 फ़रवरी, 2017 को खत्म हुआ है। बैठक में लिए गए फैसले को लागू करने के लिए राज्यपाल सह कुलाधिपति के पास भेजा गया था। मगर इसी साल जनवरी के आखिरी हफ्ते में राजभवन से फाइल यह कहकर लौटा दी गई कि सीनेट इस तरह के निर्णय लेने के लिए सक्षम है।

प्रभारी कुलपति बताते हैं कि दिल्ली पुलिस ने 23 जनवरी को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय के दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के लिए अनापत्ति पत्र (एनओसी) मांगा था। 7 फ़रवरी को कार्यभार संभालते ही 9 फ़रवरी को स्पीड पोस्ट से इस बारे में दिल्ली पुलिस को पत्र भेज दिया गया है। प्रभारी कुलपति ने बताया कि सीनेट की 20 मार्च को हो रही बैठक विश्वविद्यालय के बजट के लिए है मगर तोमर प्रकरण भी बैठक में एक अहम मुद्दा है। थाना हौज खास के एसएचओ से मोबाइल पर इस सिलसिले में हुई बातचीत में बताया गया कि आरोप पत्र चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के कोर्ट में दायर होगा। आरोप पत्र तैयार करने में विधि शाखा से मशविरा लिया जा रहा है। उम्मीद है 5 तारीख के बाद कभी भी चार्जशीट दायर कर दी जाएगी।

इससे पहले भी दो बार तोमर मुद्दे पर परीक्षा विभाग की बैठक हो चुकी है। एक बार विश्वविद्यालय की अनुशासन समिति की भी बैठक हो चुकी है जिसमें इस मामले पर पूर्व प्रतिकुलपति अवधेश किशोर राय की अध्यक्षता में बनी आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट मंजूर की गई थी और कानून की डिग्री रद्द करने के बाबत तोमर से जवाब तलब किया गया था। साथ ही विश्वविद्यालय और मुंगेर के विश्वनाथ सिंह कॉलेज ऑफ लीगल स्टडीज के 14 अधिकारी और कर्मचारी से पूछताछ की गई थी। तोमर के जवाब से परीक्षा विभाग संतुष्ट नहीं हुआ तो उन्हें जवाब देने का एक मौका और दिया गया। यह अलग बात है कि इस मामले में दोषी ठहराए गए दो परीक्षा नियंत्रक समेत 14 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में विश्वविद्यालय प्रशासन लीपापोती कर रहा है लेकिन दिल्ली पुलिस की सूची में इनके अलावे 5 नाम और हैं जिनका खुलासा आरोप पत्र दायर होने के बाद ही होगा। तबतक यूनिवर्सिटी कर्मचारियों में कानूनी डंडे का खौफ बना हुआ है।

यहां यह बताना जरूरी है कि दिल्ली पुलिस ने अपनी जांच में पाया है कि मुंगेर के विश्वनाथ सिंह कॉलेज ऑफ लीगल स्टडीज में दाखिला 1994 में लेते वक्त तोमर ने अवध विश्वविद्यालय फैजावाद से विज्ञान स्नातक की डिग्री और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी का माइग्रेशन सर्टिफिकेट साल 2001 में जमा किया था। ये दोनों सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए हैं। भागलपुर तिलकामांझी विश्वविद्यालय ने भी अपने स्तर से जांच कराई थी। उसमें भी उनके जमा दस्तावेज जाली साबित हुए। इस सिलसिले में थाना हौज खास की पुलिस टीम एसएचओ सतिंदर सांगवान की अगुवाई में पांच बार भागलपुर आ चुकी है और हर बार जांच में नए सुराग की तलाश करती रही। इस दौरान एसएचओ सतिंदर सांगवान ने कुलपति, प्रतिकुलपति, कुलसचिव डा. आशुतोष प्रसाद से मुलाकात की। मुंगेर के वीएनएस कॉलेज ऑफ लीगल स्टडीज के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी सांगवान ने पूछताछ की। सांगवान ने साल 1994 से अबतक विश्वविद्यालय के सभी परीक्षा नियंत्रकों की सूची कुलसचिव से मांगी थी। टेबुलेशन रजिस्टर और इससे जुड़े कई कागजात भी यहां से ले गई। विश्वविद्यालय के दो अधिकारियों को दिल्ली जाकर इन कागजातों को सत्यापित करना पड़ा। अब क़ानूनी पहलू पर जानकारों से मशविरा पुलिस कर रही है। ताकि आरोप पत्र दायर करने में कोई चूक न रह जाए।

गौरतलब है कि कुलपति प्रो. रमाशंकर दुबे और प्रतिकुलपति डा. अवधेश किशोर राय का कार्यकाल फरवरी 2017 में पूरा हो चुका है और दोनों अधिकारी रिटायर हो चुके हैं। जबकि यह मसला फरवरी 2016 से ही विश्वविद्यालय के लिए सिरदर्द बना हुआ है। मगर एक साल बीत जाने पर भी न तो तोमर की डिग्री रद्द हुई और न ही दोषियों पर कोई खास कार्रवाई। जाहिर है पल्ला झाड़ने की नीयत और नरम रवैए की वजह से मामला झूलता रहा। अब सीनेट की बैठक का इंतजार है।

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