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नीतीश राज में बैंक-एनजीओ गठजोड़ से 295 करोड़ का फर्जीवाड़ा- 8 साल में 10 डीएम आए-गए, सभी बेखबर

270 करोड़ रूपए के करीब जिला भू-अर्जन विभाग, 15 करोड़ रुपए जिला कोषागार और 10 करोड़ 26 लाख के करीब मुख्यमंत्री नगर विकास योजना के हैं।
भागलपुर सर्किट हाउस से निकलते आर्थिक अपराध शाखा के आईजी जितेंद्र सिंह गंगवार , भागलपुर के आईजी सुशील खोपड़े , डीआईजी विकास वैभव और एसएसपी मनोज कुमार। (फोटो- गिरधारी लाल जोशी)

बिहार के दक्षिणी-पूर्वी शहर और सिल्क सिटी नाम से मशहूर भागलपुर में 295 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। जिला प्रशासन के अलग-अलग दफ्तरों द्वारा दर्ज कराई गई तीन एफआईआर के मुताबिक यहां की दो राष्ट्रीयकृत बैंक और एक निजी एनजीओ सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड की मिलीभगत से ये फर्जीवाड़ा हुआ है। इनमें से 270 करोड़ रूपए के करीब जिला भू-अर्जन विभाग, 15 करोड़ रुपए जिला कोषागार और 10 करोड़ 26 लाख के करीब मुख्यमंत्री नगर विकास योजना के हैं। इस रकम को संबंधित खातों में जमा न कर सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के बैंक खाते में जमा कर दी गई। जहां से रकम गायब है। ये तीनों प्राथमिकी में से एक सोमवार को और दो बुधवार देर शाम कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई है।

हैरत की बात है कि यह खेल साल 2009 से पहले से चल रहा है। इस बीच 10 डीएम आए और तबादला होकर गए। इतना ही नहीं 2015 में सरकारी ऑडिट भी हुआ। बावजूद इसके फर्जीवाड़े का कहीं जिक्र तक ऑडिट रिपोर्ट में नहीं है। जब कि 10 करोड़ 26 लाख की निकासी तो 27 सितंबर से 30 सितंबर 2014 के बीच हुई है। पटना से बुधवार शाम को आर्थिक अपराध के आईजी जितेंद्र सिंह गंगवार के नेतृत्व में आई पांच सदस्यीय टीम आते ही गहन जांच में लगी है। इनके सहयोग में भागलपुर रेंज के आईजी सुशील खोपड़े, डीआईजी विकास वैभव, एसएसपी मनोज कुमार लगे हैं।

छापेमारी कर पुलिस की अलग-अलग टीमें सुराग ढूंढ़ने में लगी है। नाजिर राकेश कुमार झा से गुरूवार को एसएसपी आवास पर पूछताछ की गई। इधर डीआईजी ने इंडियन बैंक के जोनल मैनेजर डीजीएम बुद्ध सिंह और स्थानीय शाखा के सहायक प्रबंधक परमानन्द से सर्किट हाउस में बैंकिग नियमों की जानकारी ली लेकिन पूछताछ करने वाले कोई भी अफसर पत्रकारों को कुछ भी बताने से कतरा रहे हैं।

दो बैंकों बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक में में ही सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड का खाता है और सरकारी खाते भी है। मुख्यमंत्री नगर विकास योजना का खाता ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में है। जहां से समाशोधन के जरिए इंडियन बैंक ने 10 करोड़ 26 लाख रूपए मंगाए थे। बैंकों की दलील है कि चेक और रकम हस्तान्तरण के लिए पत्र के बगैर दूसरे के खाते में रकम कैसे जमा कर सकते है। बाकायदा बैंकों के पास पत्र है। जिच यही है। डीएम कहते हैं पत्र जाली है। चेक पर दस्तखत फर्जी हैं। यह माजरा तो दस्तखत की फोरेंसिक जांच से ही सुलझेगा। यह जांच अधिकारियों की आपसी में बातचीत में खुलासा हुआ है।

इस घोटाले की वजह से बिहार सरकार को पसीना आया हुआ है। ख़ुफ़िया महकमा की विशेष शाखा के एडीजी आलोक राज पटना से भागलपुर में बैठे अपने मातहत अफसरों से पल पल की जानकारी फोन से ले रहे है। जितेंद्र सिंह गंगवार आर्थिक अपराध के साथ ख़ुफ़िया महकमा के भी आईजी है। यहां यह बताना जरूरी है कि सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड बीते 1996 से निजी तौर पर एनजीओ का काम करती है और इसका वर्चस्व बैंकिंग कामों और बड़े अफसरों को अपने प्रभाव में लेकर कीमती तोहफे देने से लेकर बहुत कुछ पेश कर खातिरदारी करना रहा है। इनमें महिलाओं के नाम पर थोड़े से लोगों का ही दबदबा कायम है। कई बड़े अफसर, उनकी पत्नी और राजनैतिक रसूख वाले नेता इस संस्था से कर्ज भी ले रखे है। जिनमें तत्कालीन एसडीओ कुमार अनुज की पत्नी भी है। संस्था को केवल 11 महिला सदस्य संचालित करती हैं। इसकी संस्थापक मनोरमा देवी की हाल में मौत होने के बाद ही सारी असलियत सामने आई। सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड की संस्थापक स्व. मनोरमा देवी के बाद उनके पुत्र अमित कुमार की पत्नी प्रिया अब संस्था की सचिव हैं। इनके सभी दलों के बड़े नेताओं के साथ संपर्क है।

भाजपा सांसद मनोज तिवारी के साथ अमित कुमार (बीच में)।

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