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सरेंडर कर बोले लालू- तबियत ठीक नहीं रहती, कोर्ट ने कहा- सब ईश्‍वर की मर्जी है

गुरुवार की सुबह वह सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसएस प्रसाद की अदालत में समर्पण करने के लिए पहुंचे। इस कोर्ट में चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले से जुड़ी सुनवाई हो रही है।

रांची की विशेष सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण करने जाते राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव। फोटो- पीटीआई

चारा घोटाले में दोषी साबित होने के बाद सजा काट रहे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद के मुखिया लालू प्रसाद यादव ने गुरुवार (30 अगस्त) को सीबीआई कोर्ट में सरेंडर किया था। झारखंड हाई कोर्ट ने लालू प्रसाद की पैरोल अवधि को तीन महीना बढ़ाने की अपील को 25 अगस्त को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने आदेश दिया था कि लालू प्रसाद 30 अगस्त तक सरेंडर करें।

बुधवार की शाम को लालू प्रसाद पटना से रांची पहुंच गए थे। गुरुवार की सुबह वह सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसएस प्रसाद की अदालत में समर्पण करने के लिए पहुंचे। इस कोर्ट में चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले से जुड़ी सुनवाई हो रही है। लालू प्रसाद ने कोर्ट को अपनी गिरती सेहत की जानकारी दी। इसके साथ ही जज को मोबाइल दिखाकर कहा कि हुजूर दिल्ली के पटियाला कोर्ट से समन आया है। कल हाजिर होना है। हमें जेल भेजा जा रहा है। तबियत भी ठीक नहीं है। ऐसे में कैसे वहां हाजिर हो पाएंगे? अदालत ने लालू प्रसाद की बातों को सुनकर कहा कि तबियत खराब होती रहती है। ये सब ईश्वर की मर्जी है। इस पर कोर्ट ने उनका पक्ष सुनते हुए सरेंडर सर्टिफिकेट दिया और कहा कि पटियाला कोर्ट में इसे पेश किया जा सकता है।

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बाद में मीडिया से बात करते हुए लालू प्रसाद के अधिवक्ता प्रभात कुमार और अनंत कुमार विज ने कहा कि रांची कोर्ट से मिला सरेंडर सर्टिफिकेट ही दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाएगा। वैसे बता दे कि लालू प्रसाद अब चारा घोटाला मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत में सरेंडर करने के पहले लालू प्रसाद ने मीडिया से कहा कि उन्हें न्याय पर भरोसा है। हाईकोर्ट का आदेश का वे पालन करने यहां आए हैं।

वैसे बता दें कि चारा घोटाले के देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद को 23 दिसंबर 2017 को दोषी करार दिया गया था। लालू प्रसाद उसी वक्त से रांची जेल में थे। इसी मामले में 6 जनवरी 2018 को लालू प्रसाद सहित 16 दोषियों को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई थी। उन पर 10 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया था। बाद में गिरते स्वास्थ्य के कारण लालू प्रसाद को 17 मार्च को रिम्स में भर्ती कर दिया गया था। सुधार न होने पर 28 मार्च को उन्हें एम्स रेफर किया गया। एम्स से उन्हें 30 अप्रैल को डिस्चार्ज कर रिम्स भेज दिया गया था।

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