...तो यहां की सभी गाय सिर्फ बछिया देगी फिर सूबे में बहेगी दूध की गंगा, जानिए कैसे? - Rivers of milk will flow in Bihar by this scheme of Nitish government - Jansatta
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…तो यहां की सभी गाय सिर्फ बछिया देगी फिर सूबे में बहेगी दूध की गंगा, जानिए कैसे?

इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे पशुपालन विभाग के प्रिंसिपल एस सामंत रे ने बताया कि इस नई तकनीक के जरिए एक्स और वाई क्रोमोजोम्स (स्पर्म) को अलग किया जा सकेगा।

फुलवती अपने जीवन भर में दान से अर्जित की हुई धन से गौशाला बनवाना चाहती हैं। (File Photo)

बिहार में नीतीश सरकार डेनमार्क की तर्ज पर पशुपालन को लेकर कदम उठाने जा रही है। योजना के अनुसार अगर सब कुछ ठीक रहा तो वो दिन दूर नहीं, जब बिहार में दूध की नदियां बहने लगे। एक तरफ जहां देशभर में गोहत्या को लेकर बहस छिड़ी हुई है, वहीं बिहार सरकार यह प्रयास काबिले तारिफ है। दरअसल, बिहार सरकार का पशुपालन विभाग 6 जिलों में नई योजना के तहत गर्भधारण करने वाली गायों को एक ऐसा इंजेक्शन लगाएगी, जिससे गाय सिर्फ बछिया को ही जन्म देंगी।

शुरुआत में इसे प्रयोग के तौर पर 6 जिलों में शुरु किया जाएगा। इससे गायों की संख्या में इजाफा होगी। बिहार सरकार के पशुपालन मंत्री अवेधश सिंह ने कहा, “हमलोग गायों को जो इंजेक्शन लगाएंगे इससे सिर्फ बछिया ही पैदा होंगी। इस योजना से बिहार में गायों की संख्या में बढ़ोतरी होगी और साथ ही लोगों की आमदनी में इजाफा भी होगा। योजना के सफल होने पर इसे दूसरे जिलों में लागू किया जाएगा।”

जाहिर सी बात है कि हाल ही गाय एक राजनीतिक बहस का मुद्दा बन चुकी है। लेकिन उनमें अधिकांश लोग ऐसे भी हैं जो गाय और बैल को धार्मिक दृष्टि से देखते हैं। गायों को सर्वोच्च स्थान देने के पीछे कारण ये भी है कि उनसे दुग्ध पदार्थों की आपूर्ति होती है, जबकि बैलों से खेती में काम लिया जाता है। पिछले दो दशक से कृषि कार्यों में ट्रैक्टर के बढ़ते चलन के कारण अब बैलों का उपयोग खत्म होता जा रहा है। यही वजह है कि अब लोग बैलों को पालने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं, क्योंकि उन्हें पालने में आर्थिक बोझ जैसा साबित हो रहा है।

इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे पशुपालन विभाग के प्रिंसिपल एस सामंत रे ने बताया कि इस नई तकनीक के जरिए एक्स और वाई क्रोमोजोम्स (स्पर्म) को अलग किया जा सकेगा। जो स्पर्म बछिया पैदा करने में मददगार होगा उसे ही बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई तकनीक में यह संभव है। हमलोग बिहार में इसे पहली बार लागू करने जा रहे हैं।

वहीं केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव वे कहा कि गांव के लोगों के लिए पशुधन बहुत बड़ी संपत्ति है। अगर सरकार इस तरह की कोई योजना ला रही है तो हम इसका स्वागत करते हैं।

बिहार सरकार इस योजना के जरिए गायों की संख्या में इजाफा करना चाहती है। अगर सबकुछ सही रहा तो इसे अन्य जिलों में भी शुरु किया जाएगा। इसके साथ ही दुग्ध पदार्थों की आपूर्ति में भी वृद्धि होगी, जिससे लोग बेचकर कमाई कर सकेंगे। आपको बता दें कि इस योजना को महाराष्ट्र में लागू किया जा चुका है।

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