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रांची हाईकोर्ट से लालू प्रसाद को बड़ी राहत, राजद ने बताया संविधान की जीत

राजद सुप्रीमो लंबे समय से बीमार चल रहे हैं। उन्हें शुगर के साथ ही हाई बीपी और फिस्टुला की भी समस्या थी। वकीलों ने स्वास्थ्य के आधार पर उनकी जमानत अवधि बढ़ाने की मांग की थी जिसे ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने मंजूर कर लिया।

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव। Express Photo By Prashant Ravi

आरजेडी के मुखिया लालू प्रसाद यादव को रांची हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अब लालू प्रसाद की जमानत की अवधि को छह हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है। ये फैसला लालू प्रसाद की सेहत को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस अपरेश सिंह की कोर्ट ने सुनाया है। लालू प्रसाद की जमानत याचिका पर अगली सुनवाई अब 10 अगस्त को होगी। गौरतलब है कि लालू प्रसाद को पिछले साल चारा घोटाले के तीन मामलों में जेल की सजा हुई है।

बता दें कि राजद सुप्रीमो लंबे समय से बीमार चल रहे हैं। उन्हें शुगर के साथ ही हाई बीपी और फिस्टुला की भी समस्या थी। जिसका आॅपरेशन हाल ही में उन्होंने मुंबई में करवाया है। लालू प्रसाद के वकीलों ने स्वास्थ्य के आधार पर उनकी जमानत अवधि बढ़ाने की मांग की थी, जिसे ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने मंजूर कर लिया। लालू प्रसाद के वकील अभिषेक सिंघवी ने मीडिया को बताया कि बीते 26 तारीख को लालू प्रसाद का आॅपरेशन हुआ है। इसके घाव भरने में तीन महीने का समय लगेगा। हमने कोर्ट को उनके स्वास्थ्य की जानकारी दी थी, जिसके बाद कोर्ट ने ये फैसला दिया है। वहीं सरकारी वकील ने कहा कि लालू प्रसाद का इलाज तो रांची के रिम्स अस्पताल में भी हो सकता है।

पहले भी मिली है जमानत: पहले भी लालू प्रसाद को 11 मई 2018 से 6 हफ्तों के लिए जमानत मिली थी। लालू प्रसाद इलाज के लिए मुंबई और बेंगलुरु भी गए थे। इलाज के दौरान बेटी मीसा भारती, बेटा तेजप्रताप और बहू ऐश्वर्या हमेशा उनके साथ रहे। इससे पहले लालू प्रसाद को बेटे तेजप्रताप की शादी के लिए एक हफ्ते की पैरोल मिली थी। 22 जून को भी उनकी जमानत की अवधि 3 जुलाई तक के लिए बढ़ाई गई थी।

राजद ने बताया न्याय की जीत: रांची हाई कोर्ट के फैसले से आरजेडी कार्यकर्ता बेहद खुश हैं। आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता और विधायक भाई वीरेन्द्र ने इसे कानून की जीत बताया। उन्होंने कहा,”राष्ट्रीय जनता दल संविधान पर यकीन करने वाला दल है। हम कोर्ट के हर फैसले का सम्मान करते हैं। लालू प्रसाद के बेहतर इलाज के लिए ये जरूरी था कि उनकी जमानत अवधि को बढ़ाया जाए। ये न्याय और संविधान में यकीन रखने वालों की जीत है।”

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