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पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में शहाबुद्दीन की संलिप्तता,वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए होगी पेशी

उल्लेखनीय है कि शहाबुद्दीन को सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर पर पटना की सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल शिफ्ट किया गया था।

बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन (Photo Source: PTI Photo)

बहुचर्चित पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड मामले में तिहाड़ जेल में राजद नेता और पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की मुश्किलें फिर से बढ़ने वाली है। दरअसल, सीबीआई ने इस हत्याकांड में पूर्व सांसद की संलिप्तता पाई है। जानकारी के मुताबिक सीबीआई को राजदेव मर्डर केस में प्रोडक्शन वारंट की अनुमति मिली है। बताया ये भी जा रहा है कि 1 जून को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से शहाबुद्दीन की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में पेशी होगी।

बता दें कि इस वक्त पूर्व सांसद और बाहुबली राजद नेता तिहाड़ जेल में बंद है। पिछले साल 13 मई की शाम सीवान में पत्रकार राजदेव रंजन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी पत्नी आशा रंजन के बयान पर अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इस मामले में लड्डन मियां सहित छह आरोपी जेल में हैं।

मामले की जांच कर रहे सीबीआई के डीएसपी सुनील सिंह रावत ने सीबीआई स्पेशल कोर्ट के समक्ष एक अर्जी दाखिल की, जिसमें पूर्व सांसद के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी कर मामले की पेशी के लिए हाजिर करने की याचिका दायर की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अब 1 जून को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में उनकी पेशी होगी।

उल्लेखनीय है कि शहाबुद्दीन को सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर पर पटना की सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल शिफ्ट किया गया था। शहाबुद्दीन राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के काफी करीबी माने जाते हैं। वो शुरुआत से ही लालू प्रसाद यादव के साथ रहे हैं। शहाबुद्दीन ने 1990 में लालू यादव की सरपरस्‍ती में राजनीति में कदम रखा था। लेकिन इससे पहले उनका अपराधिक छवि भी रहा है। वो 1986 में ही अपराध की दुनिया में शामिल हो गया था, तब वह केवल 19 साल का था।

वे सुर्खियों में तब आए जब 2007 में हत्‍या के एक मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद शहाबुद्दीन को चुनाव लड़ने से प्रति‍बंधित कर दिया गया। इसके बाद शहाबुद्दीन ने फरवरी 1999 में शुक्‍ला को निशाना बनाया और उनका अपहरण कर हत्‍या करवा दी। शुक्‍ला मर्डर केस में शहाबुद्दीन को दोषी पाया गया और 2007 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

सीवान आरजेडी के एक नेता के मुताबिक, “शहाबुद्दीन ने दुकानदारों को धमकाया और उनसे वसूली शुरू की। उसके गुर्गे जमीनों, दुकानों और घरों पर कब्‍जा करने लगे। उन्‍हें भूमि विवाद सुलझाने पर हिस्‍सा भी मिलता था। शहाबुद्दीन अदालत लगाता और शादियों के झगड़े और डॉक्‍टर की फीस जैसे मामले सुलझाता था। एक समय ऐसा भी आया जब उसका दबदबा कबूल करने के लिए दुकानदारों को शहाबुद्दीन की तस्‍वीर दुकान में लगानी पड़ी।”

कुख्‍यात तेजाब कांड भी शहाबुद्दीन के गुर्गों की वजह से हुआ। वे चंद्रशेखर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू और उसके एक किराएदार के बीच झगड़ा सुलझाने के बदले 2 लाख रुपए मांग रहे थे।

देखिए वीडियो -सुप्रीम कोर्ट का आदेश- "शहाबुद्दीन को 7 दिन के भीतर सिवान जेल से तिहाड़ जेल शिफ्ट करें"

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