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350 किलो बारूद, 408 सुराखों में डाल उड़ा दिया 150 साल पुराना रेल ब्रिज

भागलपुर के नजदीक कहलगांव में रेलवे लाइन पर करीब 150 साल पुराना पुल एक धमाके के साथ देखते ही देखते ध्वस्त कर दिया गया।

भागलपुर के नजदीक कहलगांव में रेलवे लाइन पर करीब 150 साल पुराना पुल एक धमाके के साथ देखते ही देखते ध्वस्त कर दिया गया।

भागलपुर के नजदीक कहलगांव में रेलवे लाइन पर करीब 150 साल पुराना पुल एक धमाके के साथ देखते ही देखते ध्वस्त कर दिया गया। यह पुल अंग्रेज जमाने की याद दिलाता था। इसे लोग उल्टा पुल के नाम से भी जानते थे। मालदा रेल डिवीजन के तहत क्यूल-साहेबगंज रेल सेक्शन पर यह पुल पड़ता था। अंग्रेजी शासनकाल में बने इस आरओबी-127 को रेलवे के अधिकारियों और सीएमएफआर धनबाद के विशेषज्ञों ने रविवार (03 दिसंबर) को बड़ी ही कुशलता के साथ जमींदोज किया। पुल के जर्जर और पुराना होने की वजह से रेलवे पिछले कई दिनों से इसे ध्वस्त करने की योजना बना रहा था।

बता दें कि इस पुल को ध्वस्त करने के लिए अधिकारियों ने 350 किलो बारूद का इस्तेमाल किया है। इसके लिए पहले पुल में 408 सुराख किए गए। फिर विस्फोट कर पुल को उड़ा दिया गया। यह जानकारी धनबाद से आए विशेषज्ञ सोमलियाना ने दी। पुल ध्वस्तीकरण में किसी को कोई नुकसान न पहुंचे इसका विशेष ख्याल रखा गया था। पुलिसकर्मियों ने दोनों तरफ से लोगों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी थी और उसे बैरिकेट कर दिया था।

भागलपुर के एसएसपी मनोज कुमार के मुताबिक भीड़ को काबू में करने और हिफाजत के ख्याल से छह थानों की पुलिस को वहां तैनात किया गया था। इस दौरान शहर की बिजली आपूर्ति तकरीबन सात घंटे बंद कर दी गई थी। विस्फोट स्थल पर आधा दर्जन मजिस्ट्रेट की भी तैनाती की गई थी। क्यूल-साहेबगंज रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही भी सुबह 9 बजे से शाम 3 बजे तक रोक दी गई थी। मसलन, हिफाजत के पूरे इंतजाम करने के बाद रेल प्रशासन ने इस पुल को गिराया।

धनबाद से आए वैज्ञानिकों ने पुल को उड़ाने के लिए नोनेल तकनीक यानि नन-इलेक्ट्रिक इनीशिएसन का प्रयोग किया।इस टेक्नोलॉजी में 84 मिनी सेकंड के अंदर तीन स्तर पर ब्लास्ट किए गए। फिलहाल, पुल ध्वस्त होने की वजह से रेल पटरियों पर गिरे मलवे को हटा लिया गया है। अब इस रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन भी शुरू कर दिया गया है।

देखिए वीडियो- कैसे देखते ही देखते ध्वस्त हुआ 150 साल पुराना रेल पुल

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