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मोदी और नीतीश की लड़ाई में लटक गई सेंट्रल यूनिवर्सिटी, दो साल बाद भी नहीं मिली जमीन, 500 करोड़ रुपये बेकार पड़े

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अगस्त 2015 को बिहार के आरा की जनसभा में भागलपुर में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना का एलान किया था।

नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार

भागलपुर में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना का काम दो साल बीत जाने के बाद भी अब तक शुरू नहीं हो सका है। यह खुलासा सूचना का अधिकार कानून के तहत मिली जानकारी से हुआ है। दरअसल, बिहार सरकार ने ही अबतक इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं ली है। भागलपुर के डीएम आदर्श तितरमारे ने भी बातचीत में इस मद में कोई फंड सरकार से नहीं मिलने की बात कही है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अगस्त 2015 को बिहार के आरा की जनसभा में भागलपुर में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना का एलान किया था। इसी महीने की 3 तारीख को जब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ऐतिहासिक विक्रमशिला दौरे पर आए थे तो उस वक्त मंच पर बैठे केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूढी ने राष्ट्रपति को बताया था कि लोकसभा में बीते साल बजट में 500 करोड़ का प्रावधान इस विश्वविद्यालय के लिए किया गया है। राष्ट्रपति ने मंच से अपने भाषण में ये बातें कहीं। उन्होंने यह भी कहा था कि इस मुद्दे पर वो प्रधानमंत्री से बात करेंगे लेकिन सूचना के अधिकार कानून के तहत इस बाबत मांगी गई सूचना कुछ और ही बयां करती है। यह सूचना आरटीआई कार्यकर्ता अजित कुमार सिंह ने मांगी थी।

भागलपुर जिलाधिकारी के तहत आने वाले भू-अर्जन दफ्तर ने पत्रांक 162 दिनांक 23 मार्च 2017 के जरिए स्पष्ट तौर पर बताया है कि भागलपुर में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की जगह केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के बाबत बिहार सरकार से हमें कोई निर्देश नहीं मिला है। इसलिए इस सिलसिले में इस कार्यालय ने भू-अर्जन की कोई कार्रवाई नहीं की है। इससे पहले 21 दिसंबर 16 को प्रधानमंत्री दफ्तर से भी इस बाबत आरटीआई कार्यकर्ता अजित ने सूचना मांगी थी जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के स्तर से किए गए पत्राचार और मिले जवाब की कॉपी के साथ अद्यतन स्थिति मुहैया कराने का अनुरोध किया गया था।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने 14 जनवरी 2017 को प्रवीण कुमार अवर सचिव के दस्तखत से जवाब भेजा जिसके साथ बिहार सरकार से किए गए पत्राचार की कॉपी भी संलग्न है। ये पत्राचार 20 नवंबर 2015, 13 जून 2016 और 6 सितंबर 2016 को किए गए। इन पत्रों पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय उच्चतर शिक्षा विभाग के सचिव विनयशील ओबेराय का दस्तखत है। पत्र बिहार सरकार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह को संबोधित करते हुए लिखा गया है। पत्र में लिखा है कि ऐतिहासिक विक्रमशिला विश्वविद्यालय के नजदीक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 2-3 भूखंड का चयन कर जल्द से जल्द भेजा जाय। ताकि चयन समिति इन भूखंडों का मुआयना कर सके और विश्वविद्यालय के लिए किसी एक भूखंड को तय कर सिफारिश कर सके।

इतना ही नहीं विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए केंद्र सरकार ने 500 करोड़ रुपए भी आवंटित किए हैं मगर भूखंड बिहार सरकार को मुफ्त में मुहैया कराना है। यह बात इन पत्रों में स्पष्ट लिखी है। लगता है इसी वजह से बिहार सरकार ने इस बारे में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है और चुप्पी साधे बैठी है। तभी इन पत्रों का कोई जवाब केंद्र सरकार को नहीं भेजा है। जवाबी पत्र में यह भी लिखा है कि बिहार सरकार ने अबतक कोई जवाब नहीं दिया है। नतीजतन केंद्र सरकार का इस मद में आवंटित 500 करोड़ रुपए दो साल से यूँ ही पड़े हैं।

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