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बिहार में होने वाली रहस्यमय मौतों के पीछे लीची, रिसर्च में हुआ खुलासा

साल 2013 में नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (NCDC) और यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल ने इस मामले में संयुक्त रूप से जांच शुरू की थी। मुजफ्फरपुर के श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और कृष्णादेवी देवीप्रसाद केजरीवाल मैटरनिटी हॉस्पिटल में 15 साल से कम के 350 बच्चे मस्तिष्क संबंधी बीमारियों की वजह से भर्ती कराए गए थे।
मौतों के पीछे लीची। (Representative Image)

बिहार के मुजफ्फरपुर में मस्तिष्क संबंधी बीमारी (neurological illness) से हर साल सैकड़ों लोगों की मौत हो रही है। भारत और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने मौत के पीछी की इस गुत्थी को सुलझा लिया है। मुजफ्फरपुर में साल 2014 से हर साल करीब 100 लोगों की मौत हो रही है। इन मौतों की वजह जानने के लिए भारत और अमेरिका के सांइटिस्टों ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। जांच में निष्कर्ष निकला कि इस बीमारी का कारण लीची नाम का फल है। वैत्रानिकों के मुताबिक खाली पेट लीची खाने के कारण यह बीमारी और मौतें हुई है। बता दें कि मुजफ्फरपुर लीची के लिए पूरे देश में फेमस है।

मुजफ्फरपुर इस रहस्मयी बीमारी से करीब दो दशकों से गुजर रहा है। कुछ ऐसे ही मामले पश्चिम बंगाल के मालदा में भी सामने आए थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार शोधकर्ताओं का कहना है कि रात को खाना न खाने के कारण शरीर में हाइपोग्लाइसेमिया या लो ब्लड शुगर की प्रॉब्लम हो जाती है। खासकर उन बच्चों में जिनके लिवर और मसल्स में ग्लाइकोजन-ग्लूकोज को स्टोर करने की क्षमता सीमित होती है। जिसके कारण शरीर में एनर्जी पैदा करने वाले फैटी एसिड और ग्लूकोज का ऑक्सीकरण हो जाता है। हालांकि लीची में hypoglycin A and methylenecyclopropylglycine (MPCG) टॉक्सिन पाया जाता है, जो कि फैटी एसिड मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है, जो कि लो ब्लड शुगर की ओर ले जाता है। जिसके बाद मस्तिष्क संबंधी दिक्कतें आना शुरू हो जाती है। शोध के निष्कर्षों को मेडिकल जर्नल ‘The Lancet’ के नवीनतम अंक में प्रकाशित किया गया है। इस भयानक बीमारी का पता लगाने के लिए पहले भी कई सिद्धांत प्रस्तावित किए गए जिसमें इन्सेफेलाइटिस और कीटनाशक से बीमारी शामिल है, लेकिन कोई भी इसकी पुष्टि नहीं कर सका।

साल 2013 में नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (NCDC) और यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल ने इस मामले में संयुक्त रूप से जांच शुरू की थी।  मुजफ्फरपुर के श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और कृष्णादेवी देवीप्रसाद केजरीवाल मैटरनिटी हॉस्पिटल में 15 साल से कम के 350 बच्चे मस्तिष्क संबंधी बीमारियों की वजह से भर्ती कराए गए थे, जिनमें से 122 बच्चों (31 पर्सेंट) की मौत हो गई थी। इनमें से 204  (62%) बच्चों का ब्लड-ग्लूकोज लेवल कम था। बीमार बच्चों के परिवार वालों ने बताया था कि इनमें से ज्यातादर बच्चों ने शाम का खाना नहीं खाया था और लीची का सेवन किया था। उनका कहना है कि मई और जून महीने में बच्चे लीची खाते हैं और रात को घर आकर बिना खाना खाए सो जाते हैं। Lancet स्टडी की रिपोर्ट में डॉक्टरों ने कहा कि इस शोध से पता चला है कि यह बीमारी लीची खाने और hypoglycin A तथा MPCG से टॉक्सिटी से जुड़ी हुई है।

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