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सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द होने के बाद मोहम्मद शहाबुद्दीन ने किया सरेंडर, कोर्ट ने भेजा जेल

सुप्रीम कोर्ट ने शहाबुद्दीन की जमानत रद्द कर दी है। राजीव रोशन नाम के शख्स की हत्या के दोषी पाए गए शहाबुद्दीन को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।

राजद के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता शहाबुद्दीन। (फाइल फोटो)

बिहार के राजद नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन ने जमानत रद्द होने के बाद सीवान कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इसके बाद कोर्ट ने शहाबुद्दीन को जेल भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (30 सितंबर) को मोहम्मद शहाबुद्दीन की जमानत रद्द कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने शहाबुद्दीन से समर्पण करने के लिए कहा भी था। सर्वोच्च अदालत ने निचली अदालत से राजीव रोशन हत्या मामले में तेज सुनवाई करने के लिए भी कहा है। राजीव रोशन हत्या मामले में आरोपी शहाबुद्दीन को पटना हाई कोर्ट से जमानत मिली थी। उनकी जमानत के खिलाफ राजीव के पिता चंद्रकेश्वर प्रसाद (चंदा बाबू) ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। उनकी अपील के बाद बिहार सरकार ने भी सर्वोच्च अदालत से शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करने की अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 19 सितंबर को शहाबुद्दीन को अपना पक्ष रखने के लिए कहा ता। गुरुवार को जस्टिस पीसी घोष और अमितावा रॉय की खंडपीठ ने मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शहाबुद्दीन पर 40 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। हत्या के एक मामले में निचली अदालत ने शहाबुद्दीन को उम्र कैद की सज़ा सुनाई थी। जिसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में अपील कर रखी है।

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सीवान के चंदा बाबू के तीन बेटों राजीव, गिरीश और सतीश की हत्या हुई है। उनके बड़े बेटे राजीव अपने दोनों भाइयों की हत्या के मामले में मुख्य गवाह थे। बाद में राजीव की भी हत्या हो गई। राजीव की हत्या मामले में शहाबुद्दीन भी आरोपी हैं। शहाबुद्दीन 2005 से ही जेल में हैं। निचली अदालत में कार्रवाई में होती देरी के चलते हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने नीतीश कुमार की अगुवाई वाली बिहार सरकार को जमकर लताड़ लगाई थी। न्यायालय के सख्त रुख का सामना कर रही बिहार सरकार से सवाल किया था कि राजीव रोशन हत्याकांड के 17 महीने बाद भी शहाबुद्दीन को आरोप-पत्र की प्रति क्यों नहीं मुहैया कराई गई।

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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के वकील को कड़ी फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि आरजेडी नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन की जमानत रद्द कराने के लिए अब इतना उतावलापन क्यों दिखाया जा रहा है। जस्टिस पी सी घोष और जस्टिस अमित्व रॉय की खंडपीठ ने यह भी पूछा कि जब पटना हाईकोर्ट में मामला था तब आप कहां थे? जज ने टिप्पणी की कि अभी वो बेल पर स्टे ऑर्डर नहीं दे सकते। चंद्रकेश्वर प्रसाद की तरफ से मामले की पैरवी कर रहे वकील प्रशांत भूषण ने भी जब कोर्ट से अनुरोध किया था कि शहाबुद्दीन के बेल पर तुरंत रोक लगे। इसपर तब कोर्ट ने कहा था, “हमलोगों ने केस के तथ्यों को देखा है और अभी इस पर हम कोई स्थगनादेश नहीं दे सकते।”

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