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जमानत के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शहाबुद्दीन से मांगाजवाब

शहाबुद्दीन ने हाल ही में भागलपुर जेल से छूटने के बाद कहा था कि नीतीश कुमार परिस्थितियों के मुख्यमंत्री हैं।

Author नई दिल्ली | September 20, 2016 5:10 AM
बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन शनिवार (10 सितंबर) को जेल से बाहर आ गया।

सुप्रीम कोर्ट राजद के विवादित नेता शहाबुद्दीन की बिहार के सिवान में अपने दो भाइयों की नृशंस हत्या के मामले के गवाह की हत्या के मामले में मिली जमानत को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई के लिए सोमवार को सहमत हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने सिवान निवासी चंद्रकेश्वर प्रसाद की याचिका पर शहाबुद्दीन से जवाब मांगा है। प्रसाद के तीन पुत्रों की दो अलग-अलग घटनाओं में हत्या कर दी गई थी। हालांकि न्यायालय ने पटना हाई कोर्ट के जमानत आदेश पर रोक के अंतरिम अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। शहाबुद्दीन के खिलाफ 2014 में 58 आपराधिक मामले लंबित थे। गठबंधन की बाध्यताओं को दरकिनार करते हुए नीतीश कुमार नीत सरकार प्रसाद की याचिका से भी एक कदम आगे बढ़ गई। उसने राजद के बाहुबली नेता के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए जाने की मांग की। शहाबुद्दीन ने हाल ही में भागलपुर जेल से छूटने के बाद कहा था कि नीतीश कुमार परिस्थितियों के मुख्यमंत्री हैं।

न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमर्ति अमिताभ रॉय की पीठ ने वकील प्रशांत भूूषण और बिहार सरकार की दलीलें करीब एक घंटे तक सुनी और कहा कि वह शहाबुद्दीन का पक्ष भी सुनना चाहती है। पीठ ने पटना हाई कोर्ट के सात सितंबर 2016 के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने वाली याचिका और विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी करने को कहा जिस पर अगले सोमवार यानी 26 सितंबर तक जवाब देना है।प्रसाद उर्फ चंदा बाबू की ओर से पेश भूषण ने कहा कि शहाबुद्दीन कुख्यात अपराधी है। बिहार विशेषकर सिवान में उसका आतंक है। उन्होंने कहा, ह्य2014 में एक अन्य मामले में बिहार सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे के मुताबिक, शहाबुद्दीन के खिलाफ 58 आपराधिक मामले लंबित हैं और उनमें से आठ में सजा दोषसिद्धि हो चुकी है। सुनवाई अदालत ने दो मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई है।

चंदा बाबू के बेटे राजीव रोशन की हत्या के मामले में शहाबुद्दीन को हाल ही में हाई कोर्ट से जमानत मिली है। राजीव सिवान में अपने दो भाइयों की नृशंस हत्या मामले में एकमात्र चश्मदीद गवाह था। राजद नेता को दोहरे हत्या मामले में दोषी ठहराया गया है और उम्रकैद की सजा सुनाई गई है जबकि रोशन हत्या मामले में सुनवाई अभी शुरू नहीं हुई है।
भूषण ने कहा कि हाई कोर्ट ने इस तथ्य पर गौर किया कि रोशन हत्या मामले में सुनवाई शुरू नहीं हो सकी क्योंकि शहाबुद्दीन भागलपुर जेल में हैं और अब जमानत पर रिहा कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का सबसे अच्छा आदेश यह हो सकता था कि भागलपुर जेल से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए सुनवाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि शहाबुद्दीन को बिहार से बाहर किसी जेल में स्थानांतरित किया जाना चाहिए था। भूषण ने आरोप लगया कि शहाबुद्दीन का इतना प्रभाव है कि जेल के अधिकारी शहाबुद्दीन को अपने समर्थकों से मिलने की अनुमति दे देते थे। भूषण ने दावा किया कि एक छापे के दौरान, शहाबुद्दीन के सेल से 40 मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। ऐसी खबरें थीं कि शहाबुद्दीन को अक्सर जेल से बाहर जाने दिया जाता है। इस वजह से एक बार एक जेल अधीक्षक को निलंबित किया गया था।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने भूषण से सवाल किया कि वह शहाबुद्दीन को मिली जमानत को रद्द करने की मांग कर रहे हैं या पटना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दे रहे हैं। भूषण ने कहा, ह्यमैं पटना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दे रहा हूं।ह्ण इसके साथ ही उन्होंने इस मुद्दे को रेखांकित करने के लिए कई कानूनों का जिक्र किया कि जमानत दिए जाते समय विभिन्न प्रासंगिक सामग्री के साथ ही आरोपी के आपराधिक अतीत पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमानत पर रिहा राजद नेता के खिलाफ लंबित मामलों में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है क्योंकि गवाह और लोग बयान देने में भय महसूस करेंगे।  भूषण ने कहा कि बिहार के एक अन्य विवादित नेता पप्पू यादव से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिशा-निर्देश दिया था और जमानत देते समय हाई कोर्ट को उसका पालन करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि विवादित नेता को मिली राहत इस अदालत द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के खिलाफ है। वकील ने शहाबुद्दीन को ऐसा ह्यक्लास-ए हिस्ट्री शीटरह्ण करार दिया जिसे सुधारा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट को शहाबुद्दीन को जमानत नहीं देना चाहिए था। बिहार सरकार ने भी भूषण की दलीलों का समर्थन किया और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के एक आदेश का जिक्र किया। इसमें शहाबुद्दीन को जमानत देने से इनकार करते हुए न्यायालय ने कहा था कि लंबे समय तक जेल में रहने के आधार पर वह जमानत के हकदार नहीं हो जाते।

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