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बिहार: स्कूल में जाति के हिसाब से छात्र-छात्राओं को बिठाया! शिकायत करने वाली लड़की की मदद रोकने का भी आरोप

छात्र-छात्राओं को जाति के आधार पर क्लास में अलग-अलग बिठाए जाने का मामला सोमवार को उस वक्त प्रकाश में आया जब वैशाली जिला शिक्षा अधिकारी ने एक टीम स्कूल भेजी।

Author December 20, 2018 7:46 AM
लालगंज स्थित जीए हाई स्कूल। (एक्सप्रेस फोटो)

स्कूल में जाति के आधार पर अलग बिठाए जाने का विरोध बिहार के लालगंज स्थित सरकारी स्कूल की दसवीं क्लास में पढ़ने वाली अंजलि कुमारी को भारी पड़ा है। जीए हाई स्कूल प्रशासन पर आरोप है कि इस छात्रा को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सहूलियतों को रोक दिया गया है। बुधवार को छात्रा ने लालगंज ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (BEO) अरविंद तिवारी को लिखित में शिकायत की है। अरविंद कुमार ने कहा कि छात्र-छात्राओं को क्लास में जातिगत आधार पर अलग-अलग बिठाना संवैधानिक अधिकारों का हनन है। उधर, इसी स्कूल में 9वीं के एक स्टूडेंट ने कहा है कि इस तरह बिठाए जाने की परंपरा 4 साल से चली आ रही है।

छात्र-छात्राओं को जाति के आधार पर क्लास में अलग-अलग बिठाए जाने का मामला सोमवार को उस वक्त प्रकाश में आया जब वैशाली जिला शिक्षा अधिकारी ने एक टीम स्कूल भेजी। इस बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट स्टेट सेकेंडरी एजुकेशन डायरेक्टर को भेज दी गई है। स्कूल के रिकॉर्ड के मुताबिक, जीए हाई सकूल की 9वीं से लेकर 12वीं तक की कक्षा में कुल 1500 स्टूडेंट हैं। उपस्थिति रजिस्टर में हर स्टूडेंट के नाम के साथ उसकी जाति का भी जिक्र है। यह व्यवस्था कथित तौर पर इसलिए की गई है ताकि ‘स्कूल प्रशासन को सरकारी योजनाओं के लाभांवितों की पहचान करने’ में आसानी हो सके। इस उपस्थिति रजिस्टर को वैशाली जिला सेकेंडरी एजुकेशन ऑफिस ने जब्त कर लिया है।

बता दें कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत, एक दसवीं के स्टूडेंट को साइकिल खरीदने के लिए 3 हजार रुपये मिलते हैं। वहीं, नवीं से लेकर 12वीं तक की छात्राओं को यूनिफॉर्म के लिए 1 हजार रुपये जबकि सैनिटरी पैड्स के लिए 150 रुपये मिलते हैं। वहीं, 9वीं से लेकर 11वीं के छात्रों को सालाना 1800 रुपये की स्कॉलरशिप मिलती है। हालांकि, ये सभी सहूलियतें तभी मिलती हैं, जब स्टूडेंट्स की उपस्थिति 75 प्रतिशत हो। स्कूल की इंचार्ज प्रिंसिपल मीना कुमारी का कहना है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर हर महीने मांगी जाती हैं। कभी-कभी तो पाक्षिक रिपोर्ट भी मांगी जाती है।

मीना कुमारी के मुताबिक, उनके पहले के प्रिंसिपल मोहम्मद अंसारी ने 2014 में उपस्थिति रजिस्टर में जाति के जिक्र की व्यवस्था शुरू की थी, जिसे उनके बाद भी फॉलो किया जा रहा है। प्रिंसिपल के मुताबिक, इससे रिपोर्ट बनाने और लाभांवितों की पहचान करने में आसानी होती है। उन्होंने जातिगत आधार पर स्टूडेंट्स को अलग अलग बिठाए जाने के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा, ‘आपको जानना चाहिए कि हमारे पास सिर्फ 6 क्लासरूम हैं, जिसमें ज्यादा से ज्यादा 600 स्टूडेंट बैठ सकते हैं। दैनिक उपस्थिति 50 से 60 फीसदी होती है। हमें हर रोज क्लास के दो सेक्शन साथ बिठाने पड़ते हैं। जातिगत आधार पर भेदभाव की कोई भावना नहीं है। घरवालों और स्टूडेंट्स ने भी कभी शिकायत नहीं की।’

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