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सौ साल का हो गया पटना का जीपीओ

क जुलाई 1917 को ब्रिटिश काल में बने इस भवन को हैरिटेज बिल्डिंग की सूची में शामिल किया गया है। जुलाई 2017 में इस इमारत ने अपने सौ साल पूरे कर लिए।
Author नई दिल्ली | July 5, 2017 05:37 am
पटना का जीपीओ (जनरल पोस्ट आॅफिस)।

संदीप भूषण

चंद्रगुप्त मौर्य से लेकर सम्राट अशोक के शौर्य की गवाह बनी पाटलीपुत्र की धरती अपने आगोश में कई इतिहास समेटे हुए हैं। यहां कई ऐतिहासिक इमारतें हैं जिनमें से एक है बिहार की राजधानी पटना का जीपीओ (जनरल पोस्ट आॅफिस)। एक जुलाई 1917 को ब्रिटिश काल में बने इस भवन को हैरिटेज बिल्डिंग की सूची में शामिल किया गया है। जुलाई 2017 में इस इमारत ने अपने सौ साल पूरे कर लिए।

बांकीपुर डाकघर था नाम
पटना का पुराना नाम बांकीपुर भी है। इस कारण जीपीओ पटना को लोग बांकीपुर डाकघर के नाम से भी जानते थे। इस इमारत के निर्माण में उस समय दो लाख 67 हजार 667 रुपए लगे थे।
पहला प्रीपेड स्टांप
पटना जीपीओ के मुख्य पोस्टमास्टर के मुताबिक दुनिया का पहला प्रीपेड टिकट 1773 में पटना से ही जारी किया गया था। यह तांबे का होता था। इस कारण इसका नाम कॉपर टिकट पड़ा। बाद में इसे लोग अजीमाबाद इक्कनी के नाम से भी जानते थे।
नएपन के साथ इतिहास भी संरक्षित
पटना जीपीओ में समय के साथ कई बदलाव किए गए। इसके बावजूद यहां की ऐतिहासिक चीजों को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया गया। आज भी यहां ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया के शासनकाल की पत्र पेटी रखी हुई है।
किताब में जीपीओ का इतिहास
यहां के एक अधिकारी उमेश चंद्र प्रसाद ने जीपीओ के इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक किताब भी लिखी है। इसमें जीपीओ के इतिहास से जुड़ी सभी सभी बातों का उल्लेख है। उन्होंने पटना जीपीओ के इतिहास को लोगों तक पहुंचाने के लिए कई अन्य अभियान भी चला रखे हैं।
तीन इमारतें बनी थीं
जीपीओ को ब्रिटिश गौथिक शैली में बनाया गया है। उस समय इस तरह की बिहार में तीन इमारतें और बनी थीं, जिनमें पटना म्यूजियम, पटना हाई कोर्ट और पुराना सचिवालय शामिल है। 1915 में बायसराय चार्ल्स हार्डिंग ने इसकी नींव रखी थी। इसके आर्किटेक्ट जोसेफ म्यूनिंग थे।

 

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