ताज़ा खबर
 

बिहार के पूर्व विधायक ने कहा- बॉबी सेक्‍स स्‍कैंडल रफा-दफा नहीं करवाते तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता, ताजा नाबालिग रेप केस भी दफन करने में ही भलाई

एफआईआर दर्ज होने के दो महीने बाद भी बिहार नाबालिग दलित लड़की के यौन शोषण मामले के आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

आरोपी ब्रजेश पाण्डेय (बाएं) बिहार कांग्रेस का उपाध्यक्ष था। पीड़िता ने कहा है कि उसे न्याय नहीं मिला तो वो आत्मदाह कर लेगी। (तस्वीर-फेसबुक/वीडियो स्क्रीनग्रैब)

ऋचा रितेश

बिहार की राजधानी पटना में एक नाबालिग दलित लड़की के यौन शोषण मामले का हश्र तीन दशक से ज्यादा पुराने बॉबी सेक्स स्कैंडल जैसा होने की आशंका बढ़ती जा रही है। मामले की एफआईआर दर्ज होने के दो महीने बाद भी जिस तरह आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं उससे राज्य की नीतीश कुमार सरकार के “सुशासन” के दावों की पोल खुलती दिख रही है। लड़की के पिता पूर्व मंत्री हैं फिर भी पुलिस मामले में ढिलाई बरत रही है। सत्ता के गलियारों में ये कानाफूसी हो रही है कि मामले के दो आरोपी काफी हाई प्रोफाइल हैं इसलिए पुलिस जानबूझकर उन्हें नहीं गिरफ्तार कर रही है। मामले का मुख्य आरोपी निखिल प्रियदर्शी पूर्व आईएएस का बेटा है। दूसरा आरोपी ब्रजेश पाण्डेय एक मशहूर टीवी एंकर का भाई और कांग्रेसी नेता है। ब्रजेश पाण्डेय बिहार कांग्रेस का उपाध्यक्ष था। मामले के मीडिया में आने के बाद उसने पद से इस्तीफा दिया। इतना ही नहीं पुलिस केस डायरी के अनुसार नाबालिग का यौन शोषण करने वालों में राज्य के कई अन्य रसूखदार लोग शामिल हैं।

क्या था बॉबी सेक्स स्कैंडल- श्वेतनिशा त्रिवेदी (बॉबी) बिहार सचिवालय में काम करती थी। उस वक्त के लोग बताते हैं कि वो देखने में बहुत ही खूबसूरत थी। सचिवालय में उसके कई रसूखदार लोगों से ताल्लुकात बने। 1982 में पुलिस को उसका शव मिला। उस वक्त मीडिया में खबरें आईं कि बॉबी के कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से लेकर युवा कार्यकर्ताओं तक से शारीरिक सम्बन्ध थे। कहा गया कि कुछ लोगों से बॉबी ने अपनी मर्जी से सम्बन्ध बनाए तो कई लोगों ने उसके साथ जबरदस्ती यौन शोषण किया। जब उसने शोषण के इस चक्र से निकलने की कोशिश की तो उसे जहर देकर मार दिया गया। आरोप लगा कि ताकतवर आरोपियों ने डॉक्टर पर दबाव डालकर बॉबी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलवा दी थी। नाबालिग दलित लड़की के मामले में भी उस समय जैसे ही हालत बन रहे हैं। इस मामले में भी कई रसूखदार लोगों के नाम आ रहे हैं।

उस समय राज्य में जगन्नाथ मिश्रा के नेतृत्व वाली कांग्रेसी सरकार थी। मीडिया के दबाव में मुख्यमंत्री मिश्रा ने उस समय युवा पुलिस अधिकारी किशोर कुणाल को मामले की जांच सौंपी। कुणाल की छवि एक ईमानदार और दबाव के आगे न झुकने वाले पुलिस अफसर की थी। कुणाल ने बॉबी के शव को कब्र से निकलवाकर उसका दोबारा पोस्टमार्टम कराया। उन्होंने मामले से जुड़े कई सबूत इकट्ठा किए। सत्ता के गलियारों में कहा जाने लगा कि बहुत जल्द पुलिस बॉबी सेक्स स्कैंडल के आरोपियों को पकड़ पहुंच सकती है। लेकिन ऐसा हो न सका।

कहा जाता है कि एक बुजर्ग कांग्रेस नेता जिन्हें सूबे की राजनीति में चाणक्य माना जाता था, आरोपियों के बचाव में आगे आए। बुजर्ग कांग्रेसी नेता के नेतृत्व में करीब 100 विधायकों  ने सीएम मिश्रा को सरकार गिराने की धमकी दी। ये विधायक चाहते थे कि बॉबी की मौत और उससे जुड़े आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। राज्य के सीएम विधायकों की मांग के आगे झुक गए और मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।

राज्य के पुराने कांग्रेसी नेताओं की माने तो मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बाद कांग्रेसी चाणक्य ने “मैडम” से कहकर मामले को दफन करा दिया था। बिहार की राजनीति में कांग्रेस भले ही अब हाशिये पर जा चुकी हो लेकिन उस दौर के कई नेता आज भी मौजूद हैं। बॉबी सेक्स स्कैंडल में शामिल बताए जाने वाले एक पूर्व विधायक का आज भी बॉबी सेक्स स्कैंडल को दबवा देने को अपनी राजनीतिक सूझबूझ की मिसाल मानते हैं। इस पूर्व विधायक ने इस रिपोर्टर के सगर्व बताया कि “अगर हम लोग मामला रफा-दफा नहीं करवाते तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता क्योंकि हमाम में सब नंगे थे।”  ये नेता कहते हैं कि नाबालिग दलित लड़की के मामले को भी बॉबी सेक्स स्कैंडल की तरफ दफन कर देने में ही भलाई है।

वीडियो: भाई ब्रजेश पांडे पर लगे छेड़छाड़ के आरोप पर घिरे पत्रकार रवीश कुमार; कई लोगों ने किया समर्थन

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App