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NRC: असम में महिला को घोषित कर दिया विदेशी, परिवार का दावा- बिहार के रहने वाले तो ‘विदेशी’ कैसे?

NRC Assam Additional Draft List 26 June 2019: हालांकि अमिला शाह के पारिवारिक सदस्यों का नाम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) में शामिल किया गया है। इसमें उनके भाई-बहनों का नाम भी शामिल है।

Author नई दिल्ली | June 26, 2019 11:56 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (एक्सप्रेस फोटो)

Assam NRC Additional Draft List 26 June 2019: एनआरसी से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। असम में इस महीने की शुरुआत में ट्रिब्यूनल ने एक चालीस साल की महिला को विदेशी घोषित कर दिया। बाद में महिला को गिरफ्तार कर लिया गया और असम के डिटेंशन सेंटर में भेज दिया गया। हालांकि महिला के परिवार ने कहा कि उसके पिता का जन्म बिहार में हुआ था और ब्रिटिश काल से वो असम में रह रहे हैं। अमिला शाह को 15 जून को सोनितपुर जिले के ढोलीबील से गिरफ्तार किया गया। फॉरनर्स ट्रिब्यूनल ने 30 अप्रैल को घोषित किया कि अमिला शाह यह साबित करने में नाकाम रहीं कि केशब प्रसाद गुप्ता के बेटी हैं, जिनका जन्म बिहार के नालंदा में हुआ। गुप्ता साल 1948 में असम के प्रतापगढ़ टी ईस्टेट चले गए थे।

हालांकि अमिला शाह के पारिवारिक सदस्यों का नाम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) में शामिल किया गया है। इसमें उनके भाई-बहनों का नाम भी शामिल है। शाह के भाई रमेश गुप्ता ने बताया, ’15 जून को उन्हें डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। हम वास्तव में भारतीय हैं। हम हिंदी भाषा बोलने वाले लोग हैं और असम में रह रहे हैं। हमारी जड़े बिहार में हैं। हमारे पिता बिहार से असम आए थे। हम गरीब हैं और पढ़े-लिखे भी नहीं हैं इसलिए दस्तावेज रखना पेचीदा हुआ। मगर इसका मतलब ये कतई नहीं है कि हम भारतीय नहीं हैं। हमारे नाम एनआरसी लिस्ट में आ गए हैं।’ एनडीटीवी में छपी एक खबर के मुताबिक अमिला शाह का परिवार फॉरन ट्रिब्यूनल के फैसले के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट में अपील करने की योजना बना रहा है।

अमिला के बेटे भोला शाह ने बताया, ‘यह एनआरसी का सवाल नहीं है। एनआरसी अवैध विदेशियों का पता लगाने के लिए है। हम भारत के ही राज्य बिहार के प्रवासी हैं। ऐसे में मेरी मां विदेशी कैसे हो सकती हैं?’ एनआरसी का मसौदा 30 जुलाई, 2018 को प्रकाशित हुआ था, जिसमें 3.29 करोड़ लोगों में से 2.89 करोड़ लोगों के नाम शामिल किए गए। सूची में 40.7 लाख लोगों के नाम नहीं शामिल किए जाने से तब खासा विवाद भी हुआ था। एनआरसी की फाइनल लिस्ट 31 जुलाई को प्रकाशित होगी।

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