मुजफ्फरपुर शेल्टर होम: विपक्ष की 'मुस्कान' पर हमलावर नीतीश, बोले- ऐसी चिंता में कोई हंसते हुए बैठता है - muzaffarpur shelter home rape case Bihar cm Nitish kumar reacts sharply on opposition laughing in protest in delhi said no one will be spared - Jansatta
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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम: विपक्ष की ‘मुस्कान’ पर हमलावर नीतीश, बोले- ऐसी चिंता में कोई हंसते हुए बैठता है

पटना में लोक संवाद की बैठक के बाद नीतीश ने कहा कि इस मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा, जो दोषी होंगे वो जाएंगे। सीएम ने कहा कि इस मामले में जैसे ही लोगों ने भ्रम फैलाना शुरु किया और उन्हें इसकी जानकारी मिली उन्होंने तुरंत सीबीआई जांच की सिफारिश की। सीएम ने कहा कि जो लोग आज शोर मचा रहे हैं अगर उन्हें पहले से ही मामले की जानकारी थी तो उनलोगों ने बताया क्यों नहीं।

नीतीश कुमार ने कहा कि महिलाओं के प्रति अपशब्द कहने वाले नेता भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल थे।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में विपक्ष पर जोरदार हमला किया है। सीएम ने सोमवार (6 अगस्त) पटना में कहा कि उनकी चुप्पी का गलत मतलब निकाला गया। पटना में लोक संवाद की बैठक के बाद नीतीश ने कहा कि इस मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा, जो दोषी होंगे वो जाएंगे। सीएम ने कहा कि इस मामले में जैसे ही लोगों ने भ्रम फैलाना शुरु किया और उन्हें इसकी जानकारी मिली उन्होंने तुरंत सीबीआई जांच की सिफारिश की। सीएम ने कहा कि जो लोग आज शोर मचा रहे हैं अगर उन्हें पहले से ही मामले की जानकारी थी तो उनलोगों ने बताया क्यों नहीं।

सीएम नीतीश कुमार ने राज्य की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा का बचानव किया। सीएम ने कहा कि जब उन्होंने इन आरोपों के बावत उनसे पूछा तो उन्होंने इससे इंकार कर दिया है। सीएम ने कहा कि किसी को बेवजह कैसे जिम्मेदार ठहराया जाए। सीएम ने कहा कि मंत्री के स्तर पर कोई फैसला हुआ तो कार्रवाई की जाएगी, लेकिन किसी को हटा दें यह सही नहीं होगा। जेडीयू अध्यक्ष ने दिल्ली में विपक्ष के धरने पर भी जोरदार हमला बोला। उन्होंने धरने पर बैठे नेताओं की कथित मुस्कान पर भी तीर छोड़ा। उन्होंने कहा, “इतने संवेदनशील मुद्दे पर आयोजित धरने में लोग हंस रहे थे, क्या ऐसी चिंता में कोई हंसते हुए बैठता है।” नीतीश कुमार ने कहा कि महिलाओं के प्रति अपशब्द कहने वाले नेता भी इसमें शामिल थे। नीतीश ने शरद यादव का नाम लिये बिना कहा, “महिलाओं को अपशब्द कहने के कारण जिस नेता की आलोचना हुई थी…कैंडल लेकर खड़े हैं…’परकटी कहा था ना?’ बता दें कि 5 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विपक्ष ने इस मुद्दे पर बड़ा प्रदर्शन किया था। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल, शरद यादव समेत लेफ्ट के नेता भी पहुंचे थे।

इधर बिहार में चाइल्ड केयर होम्स में लापरवारी बरतने वाले अधिकारियों पर सरकारी डंडा लगातार चल रहा है। इसी सिलसिले में भागलपुर बाल गृह के अधीक्षक प्रदीप शर्मा को पुलिस ने रविवार (5 अगस्त) को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें सजौर स्थित आवास से पूछताछ के लिए पुलिस ने बुलाया था। देर शाम उनकी गिरफ्तारी की डीएसपी मुख्यालय ने पुष्टि की। इधर समाज कल्याण महकमा ने बिहार के आठ और अधिकारियों को रविवार देर रात निलंबित कर दिया है। इससे पहले शनिवार को ज़िलों में तैनात छह सहायक निदेशक को निलंबित किया था। रविवार को निलंबित किए ये अधिकारी बाल संरक्षण के लिए ज़िलों में तैनात थे। इनमें भागलपुर के तत्कालीन सीपीओ रंजन कुमार, पटना के लवलेश कुमार सिंह, मुंगेर के तत्कालीन बाल संरक्षण अधिकारी अमरजीत कुमार, गया के मिराजुद्दीन सदानी, मधुबनी के संगीत कुमार ठाकुर, पूर्वी चंपारण के विकास कुमार के साथ अररिया के पर्यवेक्षण गृह के अधीक्षक मो. फिरोज और गया की सहायक निदेशक शामिल हैं।

दरअसल मुजफ्फरपुर के बालिक गृह में 3 लड़कियों के साथ रेप की खबर सुर्खियों में आने के बाद बिहार के सभी ज़िलों के आलाधिकारियों शेल्टर होम्स का मुआयना करने का निर्देश मिला था। इसी के तहत भागलपुर के जिलाधीश प्रणब कुमार और एसएसपी आशीष भारती ने 27 जुलाई को शेल्टर होम्स का निरीक्षण किया था। इस दौरान वहां रह रहे बच्चों ने आपबीती बताई थी। वहां की कुव्यवस्था और बदतर हालात देख ये अधिकारी काफी नाराज हुए थे। दो बच्चे भी वहां से फरार थे। डीएम ने समाज कल्याण और बाल संरक्षण की सहायक निदेशक गीतांजलि प्रसाद को जरूरी हिदायतें दी थी। अब गीतांजलि को भी निलंबित कर दिया गया है।

मुआयने के दौरान ही बच्चों ने प्रदीप शर्मा द्वारा प्रताड़ित करने बात डीएम को बताई थी। इसी के तहत पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है। बीते साल सितंबर में टाटा इंस्टीच्यूट आफ सोशल (TISS) साइंसेज की टीम ने इस संस्था का सोशल ऑडिट किया था, उस वक्त भी प्रदीप शर्मा ही अधीक्षक थे। TISS ने बिहार के 38 ज़िलों के 110 शेल्टर होम की सोशल ऑडिट कर सरकार को फरवरी में ही सौंप दिया था। इसे 15 मार्च को प्रकाशित किया गया। मगर कार्रवाई के नाम पर कोताही बरती गई। इस रिपोर्ट के आधार पर चार महीने बाद 18 जुलाई को भागलपुर के औद्योगिक थाना में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें शेल्टर होम की संचालिका रुपम को आरोपी बनाया गया था। इसकी जांच डीएसपी खुद कर रहे है। इधर पुलिस सूत्रों के मुताबिक प्रदीप शर्मा ने बच्चों को प्रताड़ित करने के आरोप को सिरे से इंकार किया है। बल्कि उन्होंने कहा है कि गलतियां उजागर करने की सजा मिल रही है।

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