Muzaffarpur shelter home case victim being consulled in patna bihar sexual abuse girl fights with each other - मुजफ्फरपुर शेल्‍टर होम: गुस्‍से से भरी पीड़‍ित बच्चियां आपस में लड़ती-रोती रहती हैं, चल रही काउंसलिंग - Jansatta
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मुजफ्फरपुर शेल्‍टर होम: गुस्‍से से भरी पीड़‍ित बच्चियां आपस में लड़ती-रोती रहती हैं, चल रही काउंसलिंग

लड़कियों की काउंसिलिंग कर रहे लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है उनके गुस्से को कंट्रोल करना। काउंसलर के मुताबिक लड़कियां काफी हिंसक हो चुकी हैं। अगर एक बार उनके बीच लड़ाई शुरू हो जाती है तो वे एक दूसरे को मारने-पीटने और गालियां देने लगती हैं।

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर (Express photo by Lokesh Bihari)

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में ‘नरक’ भोग चुकी लड़कियां गहरे मानसिक तनाव से गुजर रही हैं। इन बच्चियों की काउसिलिंग कर रहे एक शख्स ने बताया कि इन लड़कियों में गुस्सा भरा है, वे हिंसक हो उठती हैं, जब 30 मई को वे यहां आईं थीं तो वे आपसी लड़ती थीं, चिल्लाती थीं…एक दूसरे पर हमला कर देती थीं, शायद ही कभी उन्हें शांत देखा जाता था, जब वे बात करतीं सिर्फ वापस में लड़तीं। शेल्टर होम के 34 में से 10 लड़कियों की काउंसिलिंग कर रही एक महिला ने बताया , “हमलोग उन घटनाओं के बारे में बात नहीं करते हैं, क्योंकि इससे उनको और दुख होता है…हम जो कहते हैं और उन्हें बताते हैं वो ये तो सुनती हैं लेकिन कभी-कभी प्रतिक्रिया नहीं देती हैं…उन्होंने बहुत पीड़ा झेली है, उनको इससे निकलने में वक्त लगेगा।”

इस सेंटर में लड़कियों को दो कमरों में रखा गया है। पूरे दिन के लिए इनका रुटीन तय है। बच्चियां 6 बजे सुबह उठती हैं, सात से आठ बजे के बीच योग करती हैं, 9 बजे नाश्ता मिलता है। 9.30 बजे बच्चियां सब्जी काटती हैं, फिर तीन घंटे तक इनकी पढ़ाई होती है। लड़कियों को हिन्दी, अंग्रेजी और गणित पढ़ाया जाता है। इस केन्द्र की सभी लड़कियां लगभग अनपढ़ हैं, वे मुश्किल से भोजपुरी बोल पाती हैं। इस केन्द्र की एक ने कहा, “हमें सुनिश्चित करना पड़ता है कि वे एक सामान्य रुटीन का पालन करें, वैसा ही रुटीन जैसा कि एक नॉर्मल लड़की फॉलो करती है।” लड़कियों की काउंसिलिंग कर रहे लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है उनके गुस्से को कंट्रोल करना। काउंसलर के मुताबिक लड़कियां काफी हिंसक हो चुकी हैं। अगर एक बार उनके बीच लड़ाई शुरू हो जाती है तो वे एक दूसरे को मारने-पीटने और गालियां देने लगती हैं। शाम पांच बजे लड़कियों को एंगर मैनेजमेंट सेशन होता है। रात 9 बजे उन्हें एक घंटे तक टीवी देखने की इजाजत है। इस दौरान उन्हें फिल्में और सीरियल्स देखने दिया जाता है।

कुछ दिन पहले तक लड़कियों को कैंपस में टहलने भी दिया जाता था। लेकिन लगातार मीडिया कवरेज और आस पास मीडिया की मौजूदगी के बाद उन्हें अब ये सुविधा नहीं दी गई है। काउंसिलिंग कर रहे लोगों का कहना है कि बारिश खत्म होने के बाद बच्चियों की आउटडोर एक्टीविटीज फिर से शुरू की जाएगी, ताकि लड़कियां और सामान्य महसूस कर सके।

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