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मुजफ्फरपुर शेल्‍टर होम केस: जेल बैरक में नहीं, अस्‍पताल में आराम फरमा रहा है ब्रजेश ठाकुर

2 जून को बिहार पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से ठाकुर ने करीब तीन सप्ताह हॉस्पिटल में बिताए। एक समाचार पत्र को दिए अपने बयान में मुजफ्फरपुर जेल के सुपरीटेंडेंट राजीव कुमार ने खुद इसकी बात की पुष्टि की है।

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बिहार के मुजफ्फरपुर में शेल्टर होम कांड के प्रभावशाली आरोपी ब्रजेश ठाकुर से जुड़ी चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बच्चियों संग यौन शोषण के आरोप में जेल में बंद ब्रजेश ठाकुर इन दिनों में जेल की बैरक की जगह हॉस्पिटल वार्ड में आराम से रह रहा है। ऐसा करीब पिछले चालीस दिनों से चल रहा है जब उसे 27 जून को श्रीकृष्णा मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल (SKMCH) से जेल में शिफ्ट किया गया। 2 जून को बिहार पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से ठाकुर ने करीब तीन सप्ताह हॉस्पिटल में बिताए। एक समाचार पत्र को दिए अपने बयान में मुजफ्फरपुर जेल के सुपरीटेंडेंट राजीव कुमार ने खुद इसकी बात की पुष्टि की है।

उन्होंने बताया कि यौन शोषण मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर को वार्ड नंबर-8 में भर्ती कराया गया है। ऐसा हॉस्पिटल के डॉक्टरों की सलाह पर किया गया, चूंकि डॉक्टरों ने बताया कि ठाकुर को स्लिप डिस्क की बीमारी है। उसे डायबिटीज के अलावा ब्लड प्रेशर की भी समस्या की बात कही गई। इसलिए उसे लगातार डॉक्टरों की निगरानी में रहने की जरुरत है। जेल सुपरीटेंडेंट के मुताबिक इन सब के बाद बैरक में अगर उसे कुछ हो जाता तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता? अगर डॉक्टर कहते हैं कि उसे हॉस्पिटल में रखा जाए तो हम इसमें क्या कर सकते हैं? उसने बहुत से अपराध किए हैं, इसका मतलब यह तो नहीं कि उसे उपयुक्त उपचार ना दिया जाए। यह उसका अधिकार है।

अधिकारी ने आगे कहा, ‘क्या हो अगर वो बैरक में मर जाए? लोग कहेंगे किसी साजिश की वजह से उसकी मौत हुई है।’ वहीं पटना के एक सीनियर वकील ने बताया कि मेडिकल उपचार के बहाने हॉस्पिटल में रहना, हो सकता है कि ठाकुर पटना हाईकोर्ट से पहले जमानत की कोशिश में लगा हो। जबकि मामले के अन्य 9 आरोपी जेल बैरक में बंद हैं। बता दें कि ठाकुर की जमानत याचिका को पोस्को कोर्ट पहले ही खारिच कर चुका है। 31 मई को एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने ठाकुर को 2 जून को गिरफ्तार किया।

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