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मुस्लिम विधायकों को पढ़नी थी जुमे की नमाज, इसलिए नीतीश कुमार ने छोटा रखा अपना भाषण

मुस्लिम आरजेडी-जेडीयू सरकार में मंत्री अब्दुल गफूर और अब्दुल बारी सिद्दीक़ी ने जुमे की नमाज के लिए ब्रेक की मांग की। विधानसभा के सदस्यों की इस मांग पर सीएम तुरंत राजी हो गये।
विधानसभा के बाहर लोगों का अभिवादन करते सीएम नीतीश कुमार (Photo-PTI)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार 28 जुलाई को विश्वासमत परीक्षण के दौरान बहुत छोटा भाषण दिया। नीतीश कुमार मात्र 12 मिनट ही विधानसभा में बोले। ऐसा नहीं था कि नीतीश कुमार को स्पीकर की ओर से वक्त नहीं दिया गया था। लेकिन सीएम ने राज्य के मुस्लिम विधायकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए विपक्ष के आरोपों का मात्र 12 मिनट में जवाब दिया। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक नीतीश कुमार ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के 40 मिनट के भाषण का जवाब देने के लिए 45 मिनट तक बोलने की योजना बनाई थी। लेकिन इस दौरान उनकी नजर घड़ी पर भी थी। दरअसल मुस्लिम आरजेडी-जेडीयू सरकार में मंत्री अब्दुल गफूर और अब्दुल बारी सिद्दीक़ी ने जुमे की नमाज के लिए ब्रेक की मांग की। विधानसभा के सदस्यों की इस मांग पर सीएम तुरंत राजी हो गये।

 

विधानसभा स्पीकर विजय चौधरी ने कहा कि विश्वास मत पर बहस और वोट 12.45 मिनट पर खत्म हो जाएगा। सीएम नीतीश कुमार विश्वास मत के दौरान चल रहे बहस पर बोलने वाले आखिरी वक्ता था। इसलिए नीतीश ने छोटा सा ही भाषण दिया ताकि मुस्लिम विधायक वक्त पर नमाज पढ़ने के लिए जा सकें। हालांकि नीतीश कुमार ने वादा किया कि वे विपक्ष के आरोपों का बाद में विस्तार से जवाब देंगे।

नीतीश कुमार ने अपने छोटे से भाषण में विपक्ष पर जोरदार हमला किया और कहा कि साम्प्रदायिकता की आड़ में करप्शन को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। नीतीश ने कहा कि सत्ता लोगों की सेवा के लिए होती है न कि ‘मेवा’ के लिए। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने कई समस्याओं का सामना किया, बावजूद इसके गठबंधन धर्म का पालन करने का हरसंभव प्रयास किया। परंतु जब स्थिति खराब हो गई और जनता परेशान होने लगी तो इसके अलावे और कोई रास्ता नहीं था।”नीतीश ने तेजस्वी की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि उन्हें जनता ने एक परिवार की सेवा के लिए बहुमत नहीं दिया था।सुशासन बाबू ने आक्रोशित अंदाज में अपने पूर्व सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा, “जनता का वोट काम करने के लिए मिला है। हमारी प्रतिबद्धता है जनता की सेवा करने, बिहार के विकास के प्रति है, किसी एक परिवार की सेवा करने के लिए नहीं है।”

 

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  1. B
    bitterhoney
    Jul 29, 2017 at 12:02 am
    हमारे नेताओं को भारत जैसे विभिन्न सम्प्रदायों वाले देश में सभी धर्मों का आदर करना चाहिए. हमारे संविधान ने सभी भारतयों को अपने अपने धर्म का पालन करने की पूर्ण स्वतंत्रता की गारंटी दी है. नितीश जी ने संविधान का ही पालन किया है.
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