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कुशवाहा की पार्टी को महागठबंधन में भी जगह मिलनी मुश्किल, पासवान ने कर लिया राज्‍यसभा का जुगाड़

नीतीश कुमार ने बिहार में पासवान की जाति आधारित पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के लिए तीन सीटें सुरक्षित की हैं। इसके अलावा भाजपा आलाकमान ने पासवास को यह आश्वासन भी दिया है कि उन्हें असम से राज्यसभा के लिए नामित भी किया जाएगा।

Author November 25, 2018 8:23 AM
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी लीडर उपेंद्र कुशवाहा। (फाइल फोटो)

बिहार में भाजपा-जेडीयू गठबंधन के साथ उपेंद्र कुशवाह का मूल झगड़ा यह था कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को 2014 में मिली तीन सीटों से अधिक दी जाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री कुशवाहा तब से विरोधी खेमे महागठबंधन में भी अपनी दाल गलाने की कोशिश में जुटे हैं। इंडियन एक्सप्रेस में छपे कूमी कपूर के कॉलम के मुताबिक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक सीट साझा करने के समझौते पर पहुंचे जिसे कुशवाहा ने छोड़ दिया। इस मामले में केवल दो RLSP विधायक जेडीयू से बातचीत कर रहे हैं। कुशवाहा ने अब दूसरे खेमें में यानी महगठबंधन में पाया कि उनके लिए वहां भी बहुत कम जगह बची है। इस खेमे में आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई, एनसीपी और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तान अवाम मोर्चा और अन्य पार्टियां शामिल हैं। खास बात यह है कि कुशवाहा के विपरीत राम विलास पासवान ने भाजपा-जेडीयू गठबंधन में अपना अच्छा जुगाड़ कर लिया। इंडियन एक्सप्रेस में छपे कॉलम के मुताबिक नीतीश कुमार ने बिहार में पासवान की जाति आधारित पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के लिए तीन सीटें सुरक्षित की हैं। इसके अलावा भाजपा आलाकमान ने पासवास को यह आश्वासन भी दिया है कि उन्हें असम से राज्यसभा के लिए नामित भी किया जाएगा।

बता दें कि RLSP अध्यक्ष कुशवाहा शनिवार को कह चुके हैं कि वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में हैं, लेकिन अपमान सहकर कहीं नहीं रह सकते। मुंगेर के पोलो मैदान में आयोजित ‘हल्ला बोल-दरवाजा खोल’ कार्यक्रम में उन्होंने अगले लोकसभा चुनाव के लिए राजग में सीट बंटवारे को लेकर की जा रही बातों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि रोलासपा अपमानित महसूस कर रही है। उन्होंने कहा, “हम राजग में हैं और राजग में रहेंगे। लेकिन अपमान सहकर नहीं, बल्कि सम्मान के साथ।”

कुशवाहा ने भाजपा और जद (यू) के कुछ नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे लोग नहीं चाहते कि नरेंद्र मोदी फिर प्रधानमंत्री बनें। पुराने दिनों की याद करते हुए उन्होंने कहा, “साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी का नाम प्रधानमंत्री उम्मीदवार के लिए सामने आया था, उस समय भाजपा के एक नेता भी नरेंद्र मोदी का नाम नहीं ले रहे थे। उस समय रालोसपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने की बात कही। मैं नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाना चाहता हूं।”

रालोसपा को कार्यकर्ताओं की पार्टी बताते हुए उन्होंने कहा कि 30 नवंबर को सीट बंटवारे को लेकर प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी के लहजे में कहा, “चार दिसंबर को वाल्मीकिनगर में कार्यकर्ताओं की बैठक आयोजित की गई है, जिसमें रालोसपा अपना निर्णय तय कर अपनी राह चलेगी।” (एजेंसी इनपुट)

 

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