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बीजेपी से मेल के खिलाफ 20 राज्यों के जदयू नेता नीतीश को लिखेंगे चिट्ठी, शरद भी जल्द तोड़ेंगे चुप्पी

जदयू के एक सूत्र ने बताया कि शरद यादव बीजेपी के साथ गठजोड़ के "पूरी तरह खिलाफ" थे।

Author July 31, 2017 9:23 AM
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (बाएं) और जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव। (फाइल फोटो)

जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से नाराज हैं और वो एक दो दिनों में इसकी सार्वजनिक घोषणा कर सकते हैं। शरद बिहार के सीएम और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के लालू यादव और कांग्रेस के साथ महागठबंधन तोड़कर बीजेपी के समर्थन से राज्य में सरकार बना ली है। शरद यादव की इस बगावत का सीधा असर राज्य सभा में जदयू की स्थिति पर पड़ेगा। उच्च सदन में पार्टी के 10 सांसद हैं। शरद यादव उच्च सदन में पार्टी के नेता हैं। दो राज्य सभा सांसदों अली अनवर और वीरेंद्र कुमार पहले ही नीतीश के खिलाफ खुलकर बोल चुके हैं। जदयू के एक सूत्र ने बताया कि शरद यादव बीजेपी के साथ गठजोड़ के “पूरी तरह खिलाफ” थे। नीतीश ने पिछले साल अक्टूबर में शरद को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटवाकर ही पार्टी की कमान अपने हाथ में ली थी। नीतीश ने 26 जुलाई को राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी को इस्तीफा सौंपा। 27 जुलाई को उन्होंने पद की शपथ ली और 29 जुलाई को बहुमत साबित किया।

शरद यादव ने तेजी से बदले घटनाक्रम पर अभी तक कोई सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है लेकिन जदयू समेत कई विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। शरद यादव मध्य प्रदेश, गुजरात और केरल के जदयू नेताओं से भी मिले हैं। कहा जा रहा है कि शरद यादव ने इन नेताओं से कहा है कि उन्हें इस फैसले से “काफी तकलीफ” है क्योंकि नीतीश ने ये फैसला ऐसे समय में लिया है जब विपक्षी एकता की सबसे ज्यादा जरूरत थी। रविवार (30 जुलाई) को शरद यादव के आवास पर उनसे मिलने वालों में सीपीआई नेता डी राजा और रालोद प्रमुख अजीत सिंह शामिल थे। शुक्रवार (28 जुलाई) को कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद और सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी उनसे मिल चुके हैं। एनसीपी के तारिक अनवर भी शरद से मिल चुके हैं।

लालू यादव के रिश्तेदार और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने भी शरद से बात की है। लालू यादव ने भी शरद यादव से साथ आने की अपील की है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी शरद यादव से बात की है। माना जा रहा है कि सपा सांसद नरेश अग्रवाल जल्द ही शरद यादव से मिलने वाले हैं। मध्य प्रदेश के गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के हीरा सिंह मरकाम और और गुजरात से सात बार विधायक रह चुके जदयू नेता छोटू भाई वासवा भी शरद के साथ हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली और बीजेपी के बिहार प्रभारी धर्मेंद्र यादव से भी शरद की मुलाकात हुई और माना जा रहा है कि वो दोनों शरद को मनाने में नाकामयाब रहे हैं। हालांकि रविवार को भी कुछ बीजेपी नेता शरद के संपर्क में थे। माना जा रहा है कि बीजेपी शरद को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने का प्रस्ताव दे रही है। 26 जुलाई के बाद नीतीश ने शरद से बात तो की है लेकिन दोनों के बीच बात बनी नहीं है।

दूसरी तरफ जदयू के महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि पटना में अगले महीने हो रहे पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सभी नेता खुलकर अपनी बात रख सकेंगे। त्यागी ने कहा कि शरद जी जदयू के संस्थापक अध्यक्ष रहे हैं, वो पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें पूरे सम्मान के साथ बैठक में बुलाया गया है। एक जदयू नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि शरद यादव 19 अगस्त को आयोजित बैठक में शामिल होकर अपनी नाराजगी जाहिर कर सकते हैं। पार्टी के एक अन्य सूत्र ने कहा कि 20 राज्यों के जदयू नेता शरद और नीतीश को पत्र लिखकर अपनी राय रख सकते हैं। पार्टी के एक धड़े का मानना है कि नीतीश 2013 में जिस तरह एनडीए गठबंधन से “जल्बाजी में” अलग हुए थे उसी तरह इस बार शामिल हुए हैं।

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