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लालू यादव ने बना ली थी बिहार में नीतीश कुमार के ‘तख्ता पलट’ की योजना? यूपी में भाजपा के प्रचंड बहुमत से धरी की धरी रह गई चाल

पटना के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि लालू यादव ने अपने बेटे और बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को सीएम बनाने के लिए तैयार कर ली थी रणनीति।
राजद प्रमुख लालू यादव अपने बेटे और बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी याद के साथ होली मनाते हुए। (PTI Photo)

ऋचा रितेश

कुछ दिन पहले लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि ‘‘मैं और नीतीश कुमार जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर हैं यानी बूढ़े हो रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में तेजस्वी प्रसाद यादव जैसे होनहार युवक हम दोनों की राजनीतिक विरासत को संभालेगें।’’ राजद सुप्रीमो का यह कथन अनायास नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत था। कहते हैं पिछले तीन महीने से लालू प्रसाद यादव की देख-रेख में गुपचुप तैयारी चल रही थी कि येन-केन-प्रकारेण तेजस्वी प्रसाद यादव को बिहार का सीएम बनवा दिया जाए। राबड़ी देवी के अलावा राजद के कई वरिष्ठ नेताओं ने खुल्लम-खुल्ला एलान करना शुरू कर दिया था कि बिहार की जनता तेजस्वी प्रसाद यादव को सीएम के पद पर देखना चाहती है। लेकिन यूपी की चुनावी सूनामी और उसमें नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा की प्रचंड जीत  ने राजद अध्यक्ष की तैयारी को तहस नहस कर दिया।

वैसे, बिहार में संभावित तख्ता पलट का संकेत यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने भी देश के नामी पत्रकार नीरजा चैधरी को दिए एक साक्षात्कार में दिया था। अखिलेश यादव ने उनसे कहा था कि ‘‘मेरी दिल की आवाज है कि यूपी में मेरे नेतृत्व में दुबारा सरकार बनेगी। तब 2019 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर मैं आगे बढ़ूगा। कांग्रेस तो साथ है ही, फिर लालू प्रसाद यादव और ममता बनर्जी के साथ मिलकर तैयारी करूंगा।’’ माना जा रहा था कि यूपी विधानसभा चुनाव की जीत अखिलेश यादव को नरेन्द्र मोदी के विकल्प के रूप में मजबूती से खड़ा कर देगी। नीतीश कुमार को कमजोर करने के लिए ये बेहद जरूरी है कि उन्हें सीएम के ओहदे से बेदखल किया जाए।

विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि लालू प्रसाद यादव ने लगभग मन बना लिया था कि अखिलेश यादव के यूपी मेें सीएम पद के शपथ लेने के एक महीने के अन्दर राजद का विलय सपा में करवा देंगे और फिर कांग्रेस की मदद से अपने पुत्र तथा उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव को बिहार में सीएम के पद पर आसीन करा देंगे। बिहार विधानसभा के कुल 243 सदस्यों में राजद के 80 तथा कांग्रेस के 27 विधायक हैं। सरकार गठन के लिए 122 विधायकों के समर्थन की दरकार होती है। कहते हैं जोड़-तोड़ के उस्ताद लालू प्रसाद यादव ने जनता दल (यू) के 25 विधायकों से दल-बदल के लिए बात पक्की भी कर ली थी। ये वही विधायक हैं जो नीतीश कुमार के शराबबंदीे कानून से आर्थिक व मानसिक रूप से त्रस्त हैं।

लालू प्रसाद यादव द्वारा रचित चक्रव्यूह की भनक सीएम नीतीश कुमार को लग गई थी। जनता दल (यू) का यूपी विधानसभा चुनाव में भाग नहीं लेने का निर्णय उस चक्रव्यूह का ही तोड़ था। ऐसा सियासी राजनीति की तिकड़म पर पैनी नजर रखने वाले महारथियों का मानना है। नीतीश कुमार ने सोची समझी रणनीति के तहत बीजेपी से भितरिया मधुर संबन्ध बढ़ाया ताकि अपने को राजनीति के डाक्टर होने का दावा करने वाले लालू प्रसाद यादव की चाल को बेकार किया जा सके।

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