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नीतीश ने बीएसएससी पेपर लीक मामले में भाजपा के सीबीआई जांच को नकारा

नीतीश ने कहा कि इस मामले की ‘निष्पक्ष’ जांच होगी जिसमें किसी का भी नाम आए बख्शा नहीं जाएगा।

Author पटना | February 28, 2017 11:44 PM
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (फाइल फोटो)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) प्रश्न पत्र लीक मामले की सीबीआई से जांच की विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए इस मामले की ‘निष्पक्ष’ जांच होगी जिसमें किसी का भी नाम आए बख्शा नहीं जाएगा। बिहार विधानमंडल के संयुक्त सत्र को गत 24 फरवरी को राज्यपाल राम नाथ कोविंद के अभिभाषण बिहार विधानसभा में सरकार की ओर से जवाब देते हुए नीतीश ने भाजपा के सरकार पर गलत करने वालों जिनमें कुछ मंत्रियों और सत्तापक्ष के विधायकों तथा एक छात्रा के साथ यौन शोषण मामले में फरार एक कांग्रेस नेता को बचाने के आरोप को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि चाहे वह बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में टॉपर्स घोटाला, बिहार कर्मचारी चयन आयोग का प्रश्न पत्र लीक मामला हो, अवैध पत्थर उत्खनन का मामला अथवा सबौर कृषि विश्वविद्यालय में नियुक्ति से संबंधित मामला आदि हो सब को लेकर हमलोगों का रुख और रवैया पूरे तौर पर स्पष्ट है।

नीतीश ने भाजपा पर उपहास करते हुए कहा कि वे उनसे कहेंगे कि ऐसे मामलों की जांच के लिए पुलिस अधिकार दिए जाने के लिए आईपीसी और सीआरपीसी में संशोधन के वास्ते सदन में प्रस्ताव लाएं हम उसे पारित करने में सहयोग करेंगे और अगर उसपर राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हो जाती है तो भाजपा नेताओं को उनकी इच्छा के अनुसार बीएसएसी मामले और अन्य मामलों का जांच अधिकारी बना देंगे। मुख्यमंत्री का जवाब शुरू होने पर भाजपा सहित राजग के अन्य सदस्य सदन से बहिगर्मन कर गए थे और वे उनके जवाब के अंत में सदन में वापस लौटे। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में इंटरमेडिट परीक्षा टॉपर्स घोटाला में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर इस मामले में पुलिस केस दर्ज हुआ और एक-एक कर लोग पकड़ाते गए।

नीतीश ने कहा कि बीएसएससी प्रश्न पत्र लीक अखबारों में खबर आने की पुष्टि होने पर पुलिस महानिदेशक की रिपोर्ट और मुख्यसचिव की अनुशंसा पर उक्त परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि इस मामले की जब जांच हो रही थी इसको लेकर विपक्ष द्वारा बवाल मचाने की क्या जरूरत है। नीतीश ने कहा इस देश में राष्ट्रपति को छोड़कर सभी पर जांच का कानून लागू होता है। उन्होंने कहा, ‘जांच का दायित्व पुलिस का है और इसके लिए विशेष जांच टीम का गठन किया गया है। यदि किसी को लगता है कि उसे फंसाया जा रहा तो उसे निश्चित तौर पर राहत मिलेगा। जांच के दौरान साक्ष्य नहीं होने पर बगैर साक्ष्य के पुलिस कोई कार्रवाई करेगी तो उसपर भी कार्रवाई होगी। ऐसे में विवाद का कोई औचित्य नहीं है।’

उन्होंने कहा, ‘सरकार को जांच में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है और नाही अदालत हस्तक्षेप करती है। ना हम कह सकते हैं कि इसको फंसाओ और नाहीं किसी को बचाने को कह सकते हैं। ऐसे में अगर काम हो रहा है तो उसे होने दीजिए।’ उन्होंने कहा कि आजकल सीबीआई जांच का फैशन हो गया है। सीबीआई में भी तो पुलिस सेवा के ही लोग हैं। वह भी पुलिस का ही संगठन है। नीतीश ने ब्रहमेश्वर मुखिया हत्याकांड, मुजफ्फरपुर के नवरुणा चक्रवर्ती हत्या, भगवान महावीर की मूर्ति चोरी मामला और सिवान में पत्रकार राजदेव नंदन हत्या मामले का उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या इन मामलों को सीबीआई को सौंपे जाने पर भी पुलिस अनुसंधान से आगे कोई खास तथ्य आया, मैं जानना चाहता हूं।

उन्होंने कहा, ‘सीबीआई जांच की मांग… कभी-कभी हमें लगने लगता है कि अनुसंधान जो प्रगति पर रहता है उसपर पर्दा डालने के लिए तो नहीं होता है, यह देखा जाना चाहिए। हमें किसी चीज में क्या एतराज है। अपने इतने वर्षाों के कार्यकाल में नातो किसी को फंसाया और नाही बचाया है लेकिन कानून सबके समान है।’ आईएएस एसोसिएशन की बिहार शाखा के बीएसएससी अध्यक्ष सुधीर कुमार की गिरफ्तारी के विरोध में राज्यपाल और सदन अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपे जाने के बारे में नीतीश ने कहा, ‘मुझे उसकी अधिकारिक तौर पर प्रति प्राप्त होने का इंतजार है। उसका एक-एक शब्द पढ़ने, उसी विस्तृत जांच करवाने के बाद देश के संविधान और कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करूंगा।’ उन्होंने कहा कि उक्त ज्ञापन के एक एक बिंदू की समीक्षा कर हम उदाहरण पेश करना चाहते हैं वह गवर्नेंस के क्षेत्र में माईलस्टोन होगा।

नीतीश कुमार ने कहा, ‘यकीन रखें। मुझे पूरा भरोसा है कि इस मामले का अनुसंधान कर रही एसआईटी बगैर किसी पूर्वाग्रह के अपना काम करेगी चाहे कोई किसी को सर्टिफिकेट दे या कोई किसी की निंदा करे। इससे प्रभावित न हों।’ उन्होंने कहा, ‘एसआईटी से अपेक्षा है कि उसपर किसी के बयान और किसी बात का असर नहीं पड़ेगा तथा पूरी इमानदारी और निष्पक्षता के साथ जांच करेगी। ना किसी को फंसाईए नाही किसी को बचाईए।’ नीतीश ने सबौर कृषि विश्वविद्यालय में नियुक्ति मामले में तत्कालीन कुलपति सह अपनी पार्टी के विधायक मेवालाल चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बारे में कहा कि इस मामले में विश्वविद्यालय द्वारा प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है और इसकी जांच के लिए एसआईटी गठित है जो अनुसंधान कर रही है। उन्होंने विपक्ष के आरोप पर कहा, ‘मैं चुनौती देता हूं कि साक्ष्य के साथ बतावें कि सरकार किसको बचाना चाहती है।’

नीतीश ने कहा कि आप सभी के समर्थन से और बिहार की जनता के आदेश से अगर मैं किसी पद पर बैठा हुआ हूं तो मेरा कोई कर्तव्य है। उन्होंने पूर्व मंत्री की पुत्री सह एक छात्रा से यौन शोषण मामला जिसमें कांग्रेस नेता ब्रजेश पांडेय आरोपित हैं, का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रा और उसके अभिभावक के उनसे मिलने पर वे तुरंत पुलिस महानिदेशक और मुख्यसचिव को तत्क्षण कार्रवाई करने का निर्देश दिया। ‘अब इसके बाद किसकी संलिप्तता है, क्या मामला है। उसके चलते हमारे गठबंधन के एक दल को बदनाम करना चाहते हैं। भाई क्या मतलब है इसका। कौन बचाव कर रहा है। जांच होगी और किसी के दोषी पाए जाने पर कौन उसे धरती पर बचाएगा। पर जब अनुसंधान चल रहा है तो उस दौरान क्यों प्रश्न उठाया जाता है। जांच में साक्ष्य मिलने पर अनुसंधान करने वाली टीम किसी को पकड़ती है और अदालत से वारंट लेने के बाद गिरफ्तार करती है।’ सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा पर राज्य के कर्मचारियों को पुनरीक्षित वेतनमान दिए जाने के बारे में नीतीश ने कहा कि गत एक जनवरी से इसका भुगतान किया जाएगा।

पप्‍पू यादव ने किया नीतीश कुमार का चरित्रहनन, कहा- कैशलेस का समर्थन करते हैं और खुद पैसे देकर मनसुख, नयनसुख लेते हैं

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