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ब‍िहार में फ‍िर टॉपर घोटाले की बू: टॉप करने वाले गणेश कुमार के कॉलेज सचिव ने नतीजों पर जताई हैरानी

इस साल बिहार बोर्ड का कहना है कि उन्होंने इस बार बहुत बारीकी से कॉपियों की जांच की है। जिससे इस साल करीब 64 फीसदी छात्र परीक्षा में पास नहीं हो सके।

बिहार में कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद राज्य में एक बार पिर हड़कंप मचना शुरू हो गया है। (फाइल फोटो)

बिहार में कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद राज्य में एक बार पिर हड़कंप मचना शुरू हो गया है। क्योंकि मंगलवार (30 मई, 2017) को परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद से ही राज्य में सबसे अधिक अंक लाने वाला छात्र गणेश कुमार का कुछ पता नहीं है। खबरों के अनुसार झारखंड के गिरिडीह में रहने वाले गणेश कुमार समस्तीपुर के राम नंदन सिंह जगदीप नारायण कॉलेज के छात्र हैं जो बिहार बोर्ड के परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद से गायब चल रहे हैं। गणेश के गायब होने से बिहार बोर्ड टॉपर को लेकर एक बार फिर शक पैदा हो गया है। न्यूज चैनल इंडिया टुडे मामले में जानकारी हासिल करने के लिए जब गणेश के कॉलेज पहुंचा, जहां उन्होंने साल 2015 में कॉलेज में दाखिला लिया था। यहां गणेश का एडमिशन फॉर्म देखा जिसपर अब कई सवाल उठने लगे हैं। जैसे अपने घर से 250 किलोमीटर की दूरी पर गणेश ने दाखिला क्यों लिया। गणेश ने एडमिशन फॉर्म में अपनी जन्मतिथि 2 जून 1993 बताई है, जिसका मतलब है कि आज गणेश 24 साल के हो गए हैं जबकि कक्षा में 12 में पढ़ने वाले छात्र की उम्र आमतौर पर 17 से 19 साल के बीच होती है। नियमित छात्र होने के बाद भी कॉलेज में एडमिशन की कोई निश्चित तारीख नहीं दी गई। एडमिशन फॉर्म में स्थाई पता भी नहीं दिया गया। स्थाई पते के नाम पर सिर्फ झारखंड जिले के गिरिडीह सरिया लिखा है।

वहीं बिहार परीक्षा में गणेश कुमार के अव्वल आने पर कॉलेज संस्थापक सचिव जवाहर प्रसाद कहते हैं कि मुझे आश्चर्य हैं कि उन्होंने आर्ट्स स्ट्रीम में बिहार टॉप किया है। वहीं इस दौरान गणेश की दसवीं कक्षा की मार्कशीट भी सामने आई है जिसमें उन्होंने म्यूजिक (प्रेक्टिकल) में 70 में से 65 जबकि थ्योरी में 30 में से 18 और हिंदी में 100 में 92 नंबर हासिल किए हैं। परीक्षा परिणाम के बाद जब गणेश के परिवार से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनकी बहन ने बताया कि करीब चार साल पहले गणेश घर छोड़ चुका है और इस दौरान वो एक भी बार घर नहीं आया। जानकारी के लिए बता दें कि बीते साल बिहार में फर्जी टॉपर्स को लेकर पर्दाफाश हुआ था जिसमें छात्रों से मोटी रकम लेकर कॉलेजों ने उनकी अधिक अंक दिलवाने में मदद की थी। जबकि इस साल बिहार बोर्ड का कहना है कि उन्होंने इस बार बहुत बारीकी से कॉपियों की जांच की है। जिससे इस साल करीब 64 फीसदी छात्र परीक्षा में पास नहीं हो सके।

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