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पटना नाबालिग दलित बलात्कार कांड: दारोगा ने दिया मुख्‍य आरोपी का सुराग तो सीनियर अफसर ने लताड़ा- ज्‍यादा स्‍मार्ट मत बनो

बॉबी सेक्स स्कैंडल में संदेह के घेरे में रहे एक पूर्व विधायक कहते हैं कि लोकतंत्र को बचाने के लिए उस मामले को दफन करवाया था। नाबालिग दलित लड़की के मामले को भी ऐसे ही दफना देना चाहिए।

नाबालिग दलित पीड़िता ने मीडिया से कहा था कि अगर उसे इंसाफ नहीं मिला तो वो आत्मदाह कर लेगी।

ऋचा रितेश

बिहार के पूर्व मंत्री की नाबालिग बेटी के यौन शोषण और बलात्कार मामले की जांच को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है। जितने मुंह उतनी बातें। सत्ता के गलियारे से ताल्लुक रखने वाले दिमागदार सरकारी मुलाजिमों का आकलन है कि इसको भी बॉबी सेक्स स्कैंडल की तरह सुपुर्दे खाक कर दिया जाएगा। वो कहते हैं कि मामले में आरोपी कांग्रेसी नेता ब्रजेश पाण्डेय और पूर्व आईएएस के बेटे और जीप एजेंसी के मालिक निखिल प्रियदर्शी के अलावा और कई और ताकतवर लोगों ने पीड़िता का यौन शोषण किया है। ऐसे लोगों में पूर्व कांग्रेसी केन्द्रीय मंत्री का बेटा, राज्य में कार्यरत सुपरकॉप का बेटा तथा एक रिटायर्ड अध्यात्मिक मिजाज पुलिस अफसर की बिगड़ैल संतान भी शामिल हैं।

मामले की जांच कर रही एसआईटी से जुड़े एक पुलिस अफसर ने बताया यह कांड बर्रे के छत्ते की तरह है जिसके भीतर हाथ डालने का साहस कोई नहीं जुटा पा रहा है। नाबालिग पीड़िता दलित है और उसके पूर्व मंत्री पिता  दंबग कांग्रेसी नेता माने जाते हैं फिर भी वो अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। मामले का मुख्य आरोपी निखिल प्रियदर्शी ठाट से आजाद घूम रहा है। लेकिन पुलिस को उसपर हाथ डालने की हिम्मत नहीं हो पा रही है। 22 दिसम्बर 2016 को एफआईआर दर्ज होने के कई दिनों बाद तक उसके मोबाइल का लोकेशन पटना में मिलता रहा।

बिहार पुलिस के एक दारोगा ने बताया कि 24 दिसम्बर को निखिल पटना के एक प्रख्यात माल में सिनेमा का लुत्फ उठा रहा था जिसकी सूचना मैंने एक पुलिस अधिकारी को दी। उस अधिकारी ने मुझे बेरहमी से हड़काया कि ज्यादा स्मार्ट बनने की काशिश मत करो। अपना काम करो। डीआईजी स्तर के एक ईमानदार अफसर का कहना है कि निखिल और ब्रजेश पाण्डेय दिल्ली में हैं लेकिन कोई उन्हें छू नहीं सकता। वहीं जांच से जुड़े एक डीएसपी स्तर के अफसर का कहना है कि एसआईटी की छानबीन जारी है। दबिश के कारण निखिल लगातार अपना लोकेशन बदल रहा है। कुछ दिन पहले तक उसका लोकेशन लखनऊ में मिला था। यूपी पुलिस के अधिकारियों को पत्र भेजकर उसकी गिरफ्तारी के लिए मदद मांगी गई है।

अंदरखाने खबर है कि जांचकर्ताओं को डर है कि पकड़े जाने पर निखिल पुलिसिया पूछताछ को ज्यादा देर तक सह नहीं पाएगा और सारी पोल खोल देगा। इसलिए सोची-समझी रणनीति के तहत उसको सेफ पैसेज दिया जा रहा है। सोमवार (27 फरवरी) को पास्को कोर्ट में निखिल तथा ब्रजेश की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। अगली सुनवाई दो और तीन मार्च को होगी। एसआईटी प्रभारी ममता कल्याणी की तरफ से केस डायरी कोर्ट को सौंपी जा चुकी है। एफआईआर, केस डायरी तथा धारा 164 के तहत दिए गए पीड़िता के बयान और उसके माता-पिता के बयान एवं कुछ अन्य लड़कियों के बयान का कोर्ट द्वारा अवलोकन किया जाएगा। पुलिस महकमे में अंदरखाने चर्चा है कि रंगीन मिजाज वाले वर्दीधारी चाहते हैं कि दोनों आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल जाए। कल विधान परिषद में भी भाजपा सदस्यों ने इस मुदे को जोर-शोर से उठाया और सरकार से सीबीआई जांच कराने की मांग की।

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