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बिहार में शराब पर पाबंदी हटाने के हाई कोर्ट के आदेश पर रोक

शराब की बिक्री और सेवन को प्रतिबंधित करने के लिए नीतीश सरकार दो अक्तूबर को गांधी जयंती के मौके पर नया कानून अधिसूचित कर दिया था।

Author नई दिल्ली | October 8, 2016 4:06 AM
BSSC Paper Leak news, BSSC Paper Leak Latest news, Nitish Kumar BSSC, Nitish Kumar news, Nitish Kumar latest news, Nitish Kumar BJP, BSSC CBI Probeबिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पटना हाई कोर्ट के उस फैसले के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी, जिसके तहत बिहार सरकार द्वारा राज्य में सभी प्रकार की शराब की बिक्री और सेवन पर लगाए गए प्रतिबंध को निरस्त कर दिया गया था। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति उदय यू ललित के पीठ ने कुछ शराब निर्माताओं समेत सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। इन प्रतिवादियों की याचिका के आधार पर ही हाई कोर्ट ने नीतीश कुमार सरकार के प्रतिबंध कानून को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था। सुप्रीन कोर्ट इस मामले की सुनवाई अब आठ हफ्ते बाद करेगा।  बिहार सरकार ने हाई कोर्ट के 30 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसने राज्य में शराब की बिक्री और सेवन को प्रतिबंधित करने वाली अधिसूचना को खारिज कर दिया था। हालांकि यह कानून निरस्त किए जाने पर, शराब की बिक्री और सेवन को प्रतिबंधित करने के लिए नीतीश सरकार दो अक्तूबर को गांधी जयंती के मौके पर नया कानून अधिसूचित कर दिया था। राज्य सरकार ने याचिका में शीर्ष अदालत से अनुरोध किया है कि वह हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दे, जिसके जरिए शराब पर प्रतिबंध लगाने वाली पांच अप्रैल की अधिसूचना को निरस्त कर दिया है।

इसमें बिहार मद्य निषेध एवं आबकारी कानून, 2016 का उल्लेख करते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि राज्य में भारत निर्मित विदेशी और देसी शराब समेत शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध जारी रहे। हाई कोर्ट के 30 सितंबर के फैसले का विरोध करते हुए बिहार सरकार ने अदालत से इस बात का फैसला करने के लिए कहा था कि राज्य शराब के वितरण व सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा सकता है या नहीं। किसी व्यक्ति को शराब पीने को संविधान के तहत अपना मौलिक अधिकार बनाकर दावा पेश करने का अधिकार है या नहीं। नीतीश सरकार ने दावा किया कि हाई कोर्ट के आदेश के परिणामस्वरूप, शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की राज्य सरकार की कोशिशों को धक्का लगा है।

हाई कोर्ट ने 30 सितंबर को राज्य में शराब की बिक्री और सेवन को प्रतिबंधित करने की अधिसूचना निरस्त करते हुए कहा था कि यह संविधान के अधिकारक्षेत्र से बाहर है। यह आदेश शराब व्यापार संघों एवं अन्य द्वारा दायर याचिकाओं के आधार पर पारित किया गया था। इन याचिकाओं में कड़े दंडात्मक प्रावधानों वाले शराब कानून को चुनौती दी गई थी। कुछ ही समय बाद बिहार सरकार शराब को प्रतिबंधित करने वाला नया कानून लेकर आई। इसमें निषेध पदार्थ बरामद होने पर घर के सभी व्यस्कों को गिरफ्तार किए जाने जैसे कड़े प्रावधान शामिल थे। बिहार में महागठबंधन की सरकार ने एक अप्रैल से देश में निर्मित शराब का निर्माण, व्यापार, बिक्री और सेवन प्रतिबंधित किया था। लेकिन बाद में उसने राज्य में सभी प्रकार की शराब प्रतिबंधित कर दी थीं और इनमें विदेशी शराब भी शामिल थी।

 

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