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बिहार: डिप्टी सीएम के क्षेत्र में जानवरों के साथ रह रहे बाढ़ पीड़ित, कैंप में भोजन तक नदारद

बिहार के राघोपुर और हाजीपुर के 2500 से ज्यादा लोग पिछले 15 दिनों से राहत कैंपों में रह रहे हैं। लोगों की शिकायत है कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल पा रहा है या फिर भोजन मिल ही नहीं रहा है।

राहत शिविरों में रह रहे लोगों को भोजन वितरण (Express Photo)

बिहार में भारी बारिश और बाढ़ के चलते हजारों लोग घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। बिहार के राघोपुर और हाजीपुर के 2500 से ज्यादा लोग पिछले 15 दिनों से राहत कैंपों में रह रहे हैं। राघोपुर बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का क्षेत्र हैं। यूपी, एमपी और झारखंड से गंगा तथा सोन नदी में ज्यादा पानी छोड़े जाने के कारण बिहार के 12 जिले प्रभावित हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है। साथ ही वैशाली जिला प्रशासन को बाढ़ पीड़ितों का भोजन वितरण सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से सचेत किया गया है। हालांकि कैंप में लोगों के सामने भोजन की समस्या फिर भी खड़ी हो रही है।

राहत शिविरों में रह रहे लोगों के भोजन वितरण का काम सरकार ने एकता शक्ति संगठन नाम के एक एनजीओ को सौंपा है। नाश्ते में लोगों को बारी बारी से गुड़-चना और चूड़ा-गुड़ दिया जा रहा है। नाश्ता वितरण शुरू होने के 5 मिनट बाद ही लोग उठ जाते हैं और शिकायत करने लगते हैं कि उन्हें पर्याप्त खाना नहीं मिला है या फिर खाना ही नहीं मिला। वॉलेंटियरों के जाने के बाद कुछ लोग पॉली बैग में नाश्ता स्टोर कर लेते हैं। आधे घंटे बाद दोबारा नाश्ते बांटने पर वह फिर से नाश्ते के लिए हाथ बढ़ा देते हैं। इसके बाद वॉलेंटियर्स ने लोगों को पंक्ति में खाने के लिए राजी किया और यह तरीका काम कर रहा है। स्पेशल मेजिस्ट्रेट अरविंद कुमार का कहना है कि हमे इस तरह की परेशानी का सामना लंच और डिनर में नहीं करना पड़ता है, जब लोग बैठकर खाते हैं। दोनों टाइम लोगों को खाने में दाल, चावल और सब्जी दी जाती है।

शिविरों में रह लोग अपने घर को फिर से बसाने को लेकर चिंतित है। एक टेंट में दो गायों के साथ रह रहे देवीलाल महतो का कहना है कि ऐसा लगता है कि हमे फिर से अपनी जिंदगी शुरू करनी होगी। इसके साथ ही बाढ़ के कारण सांप का डर भी लोगों को सता रहा है। चिश्ती गांव से आए राजमुनि देवी, गुड़िया देवी, कांति देवी, उमेश दास और सहदेव दास का कहना है कि हमें नहीं पता की सरकार घर बनाने के लिए पैसे देगी या नहीं। राजमुनि देवी ने कहा कि हम सरकार की ओर से दिए जा रहे भोजन से खुश है। उसी सड़क के साथ लगते हुए करीब डेढ़ किलोमीटर पर लोगों और जानवरों के लिए प्लास्टिक के टैंट बनाए गए हैं। जिसमें लोग अपनी बेशकीमती संपत्ति गाय और भैंस के साथ सो रहे हैं।

 

 

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