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नीतीश कुमार के समर्थन में कांग्रेस ने कहा- दिक्‍कत है तो महागठबंधन से अलग हो जाए लालू की पार्टी

बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह और बाहुबली शहाबुद्दीन के हमलो के बाद कांग्रेस ने पलटवार किया है।

बिहार चुनावों से पहले लालू और नीतीश ने भाजपा को रोकने के लिए हाथ मिलाए थे। कांग्रेस भी बाद में इस गठबंधन से जुड़ गई थी।

बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह और बाहुबली शहाबुद्दीन के हमलो के बाद कांग्रेस ने पलटवार किया है। बिहार कांग्रेस अध्‍यक्ष अशोक चौधरी ने मंगलवार को लालू की पार्टी को महागठबंधन से अलग होने की चुनौती दी। उन्‍होंने कहा, ”यदि नीतीश कुमार से कोई शिकायत या दिक्‍कत है तो राजद महागठबंधन सरकार से अलग हो सकती है।” गौरतलब है कि महागठबंधन में जेडीयू, राजद और कांग्रेस शामिल हैं। चौधरी ने कहा कि राज्‍य सरकार और सत्‍ताधारी गठबंधन का हिस्‍सा बनकर राजद का नीतीश की आलोचना करना गलत है।

उन्‍होंने कहा, ” नीतीश कुमार की छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है। बाहर रहकर वो कहते हैं कि गठबंधन हिमालय जैसा मजबूत है, लेकिन वैसा होना भी तो चाहिए। मुख्‍यमंत्री को बार-बार निशाना बनाना ठीक नहीं है।” आपको बता दें कि राजद के उपाध्‍यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा था कि वह नीतीश कुमार को बिहार के मुख्यमंत्री बनाने के लिए राजी नहीं थे। उन्‍होंने कहा, ”नीतीश कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला महागठबंधन के नेताओं का था, इसलिए मैंने फैसले को स्वीकार कर लिया।” कुछ महीने पहले रघुवंश प्रसाद ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार को स्वार्थी बताया था। सिंह ने कहा, ‘नीतीश ने पहले तो बिहार के सभी घरों तक शराब पहुंचाई और अब राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बैन लगा रहे हैं। हर कोई जानता है कि बिहार में सबसे ज्यादा राजस्व शराब की बिक्री से आता है।’

वहीं जेल से जमानत पर बाहर आए बाहुबली नेता शहाबुद्दीन ने भी कहा कि उनके नेता लालू यादव हैं। नीतीश कुमार परिस्थितियों के सीएम हैं। राजद सुप्रीमो लालू यादव ने भी शहाबुद्दीन के बयान का समर्थन किया था। इस बारे में पूछे जाने पर उन्‍होंने कहा, ”शहाबुद्दीन ने कुछ भी गलत नहीं कहा है। शहाबुद्दीन ने कोई ऐसी बात नहीं की है, ये कहा कि लालू जी नेता हैं। इस बात से नीतीश जी को कोई तकलीफ नहीं है।” गौरतलब है कि बिहार चुनावों से पहले लालू और नीतीश ने भाजपा को रोकने के लिए हाथ मिलाए थे। कांग्रेस भी बाद में इस गठबंधन से जुड़ गई थी।

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