बिहार बजट: शराबबंदी के बाद नीतीश कुमार को नशामुक्ति की चिंता, सात महीनों में 11% बढ़ी दूध की खपत

बिहार सरकार के अनुसार अगले चार साल में हरेक घर नल का जल, शौचालय, पक्की गली, नाली का निर्माण और बिजली का कनेक्शन का काम पूरा हो जाएगा।

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गिरधारी लाल जोशी

बिहार सरकार ने सोमवार को पेश किए बजट में नशा मुक्त बिहार बनाने और शराबबंदी के फायदे बताने की ख़ास मुहिम चलाने को लेकर बड़ा फोकस किया है। मद्दनिषेध, आबकारी और निबंधन महकमा की तमाम योजनाओं को पूरा करने के लिए वितीय साल 2017-18 के लिए 152.80 का प्रावधान किया है। जाहिर है अब बिहार शराबबंदी के बाद नशा मुक्ति की ओर बढ़ चला है। कुल बजट 1.60 लाख करोड़ का पेश हुआ है। जो बीते साल के बजट से 15389.42 करोड़ रुपए ज्यादा है।

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी चेतना यात्रा के क्रम में इसे हरेक सभा में दोहराते रहे है। जीविका की दीदीयों और महिलाओं को शराबबंदी पर जागरूक करने के वास्ते नुक्कड़ नाटक और लोकगीत टोली गाती है ‘ दारू बंदी कानून को घर-घर पहुँचाना है, गांव गाँव घर घर टोले तक अलख जगाना है।’ इस पर मंच पर बैठे मुख्यमंत्री तालियां लगातार तब तक बजाते रहे जब तक गीत खत्म न हो गया। सभा में आई जीविका की दीदीयों भी तालियां बजाकर उनका साथ देती दिखीं। यह सिलसिला उनकी हरेक सभा का था। 22 मार्च को बिहार दिवस है।नशामुक्ति का संदेश मुहिम की तरह जारी रहेगा।

एक बात तो यह पक्की तौर पर कही जा सकती है कि शराब बंदी और नशा मुक्त बिहार नीतीश कुमार का सामाजिक बुराई के मुद्दे के साथ राजनैतिक पकड़ भी मजबूत कर रहा है। महिलाओं का मिला समर्थन इनके हौसले को बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सभाओं में महिलाओं की ओर मुखातिब होकर बोलते है कि शराब बंदी साम्प्रदायिक सद्भाव का भी प्रतीक है। यह सभी धर्म, जाति के लिए है। मानव श्रृंखला नशा मुक्ति, शराबबंदी के हिमायत में एक जुटाता का संदेश दिया है। इससे झारखंड, उत्तरप्रदेश और हरियाणा से शराब लाकर दो नंबर धंधा करने वालों का भी मनोबल चूर होगा। बिहार हमेशा देश को नई दिशा दिया है। नशामुक्ति में भी विश्व को संदेश देगा। इसमें महिलाओं की भूमिका अग्रणी है। जिनने शराब छोड़ा है वे किसी दूसरे मादक पदार्थ का सेवन नहीं कर रहे । इसका ध्यान रखना जरुरी है। सावधानी हटी दुर्घटना घटी। ऐसा नीतीश कुमार बोलते हैं।

5 अप्रैल 2016 से लागू पूर्ण शराब बंदी के बाद हरेक तरह से बिहार के वाशिंदों का भला हुआ है। बजट में भी इन बातों का जिक्र किया है और वे भी बाकायदा आंकड़ा पेश कर शराब बंदी के फायदे गिनाते हैं। पहली अप्रैल 2016 के बाद बिहार में घरेलू हिंसा के 70 फीसदी कमी आई है। हत्या और डकैती में 23 फीसदी, लूट और सड़क दुर्घटना में 19 फीसदी और दंगे में 33 फीसदी, अपहरण में 42 फीसदी की कमी आई है। विरोधी कहते है शराबबंदी से 5 हजार करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। लेकिन मेरा मानना है 10 हजार करोड़ रुपए का फायदा हुआ। वे बताते हैं कि सात महीनों के दौरान 11 फीसदी दूध की खपत बढ़ी। 44 फीसदी रेडीमेड कपड़ों की बिक्री में इजाफा हुआ। सिलाई मशीन की 19 फीसदी और घरेलू उत्पादों की बिक्री में 22 फीसदी बढ़ोतरी हुई। सबसे बड़ी बात कि शराबबंदी से लोगों का व्यवहार बदला और घर का माहौल खुशहाल हुआ।

बजट में महिला सशक्तिकरण की ओर ठोस कदम उठाने की बात है। मुख्यमंत्री खुद सभाओं में भी इस ओर लिए फैसले और किए काम का बखान करते है। लड़कियों को साइकिल और पोशाक दिए। नतीजतन स्कूल जानेवाली लड़कियों की तायदाद एक लाख 70 हजार से बढ़कर आज 8 लाख 15 हजार हो गई। जाहिर है इनके अरमानों को पंख लगे। बिहार सरकार की नौकरी में 35 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया। पंचायती राज, स्थानीय निकाय में 50 फीसदी सीटें आरक्षित कर फायदा दिया। और भी कई योजनाएं चल रही हैं।

मगर युवाओं के लिए सात निश्चय में पांच उन्हीं के लिए है। दरअसल बिहार में युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। इसी को मद्देनजर राज्य सरकार ने हरेक जिले में एक इंजीनियरिंग कालेज, पालीटेक्निक, और एक महिला आईटीआई खोलने का फैसला लिया है। साथ ही सूबे में 5 नए मेडिकल कालेज खोले जाएंगे। इसके लिए काम तेजी से चल रहा है। अपना उद्योग लगाने वाले युवाओं को आर्थिक सहायता देने के वास्ते 500 करोड़ रुपए का एक कोष बनाया है। 12वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए 4 लाख का स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, कुशल युवा कार्यक्रम के तहत 20 से 25 साल आयु वाले 10 वीं पास को कम्प्यूटर , भाषा और व्यवहार लिए दो अक्टूबर से निबंधन और परामर्श केंद्रों की स्थापना कर लागू कर दिया है। सरकारी कालेज और विश्वविद्यालय में मुफ्त वाईफाई दी जा रही है। बिहार की उन्नति के लिए काम करे। तो आने वाले सालों में बिहार विकसित राज्य की गिनती में आ जाएगा।

बिहार सरकार के अनुसार अगले चार साल में हरेक घर नल का जल, शौचालय, पक्की गली, नाली का निर्माण और बिजली का कनेक्शन का काम पूरा हो जाएगा। ये योजना सभी के लिए है। बजट में सात निश्चयों को और मजबूत करने पर बल दिया है। अल्पसंख्यक कल्याण, बच्चों और बुजुर्गों की सेहत का भी पूरा ध्यान बजट में रखा है। शिक्षा पर भी पूरा गौर फ़रमाया है। नोटबंदी और शराबबंदी के बाबजूद योजना का आकार बढ़ा है। केंद की नोटबंदी और राज्य की शराब बंदी से आर्थिक परेशानी तो जरूर बढ़ी है। यह भी माना है। जिसकी भरपाई को सरकार सजग है। आर्थिक मामलों के जानकार शैलेंद्र सर्राफ, प्रदीप झुनझुनवाला इत्यादि ने बजट को बिहार के विकास को गति प्रदान करने वाला बताया है।

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