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बिहार: फिर उठी पूर्व CM कर्पूरी ठाकुर की मौत की जांच की मांग, एक प्रत्यक्षदर्शी का दावा प्राण निकलने से पहले मुंह से निकल रहा था झाग

बिहार बीजेपी के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने की राज्य के सीएम नीतीश कुमार से पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर की मौत की जांच कराने की मांग की है। इससे पहले पूर्व सीएम राम सुन्दर दास और पूर्वी केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह भी ऐसी मांग कर चुके हैं।

karpoori thakur, bihar ex cmकर्पूरी ठाकुर दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे। उनका 1988 में देहांत हुआ था।

ऋचा रितेश

बिहार में दलितों और पिछड़ों के मसीहा माने जाने वाले कर्पूरी ठाकुर की 24 जनवरी को जयंती थी। दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे ठाकुर की इस जयंती पर बिहार बीजेपी के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने उनकी मृत्यु की जांच की मांग करके गड़े मुर्दे को उखाड़ने का प्रयास किया है। इससे पहले भी कई नेता कर्पूरी ठाकुर की मौत की जांच की मांग कर चुके हैं। अगर नीतीश सरकार राय की बात मानती है तो इससे राज्य की कई राजनीतिक हस्तियों समेत कर्पूरी ठाकुर के करीबियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इससे पहले राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह, बिहार के पूर्व सीएम स्वर्गीय राम सुन्दर दास, राजद एमएलसी मुद्रिका सिंह यादव जैसे नेता भी कर्पूरी ठाकुर की मौत की जांच की मांग कर चुके हैं। आखिर इतने सालों बाद भी “जन नायक” कहे जाने वाले कर्पूरी ठाकुर की मौत पर संदेह के बादल क्यों हैं?

कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी 1924 को आजादी से पहले बिहार के समस्तीपुर में हुआ था। ठाकुर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ गए थे। भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान वो करीब 26 महीने जेल में रहे थे। आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण के करीबी रहे ठाकुर 1970 में पहली बार बिहार के सीएम बने। 1977 में वो दूसरी बार सूबे के सीएम बने। 17 फ़रवरी 1988 को उनका देहांत हो गया। कर्पूरी ठाकुर को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राजद अध्यक्ष लालू यादव और लोजपा नेता राम विलास पासवान जैसे नेताओं का राजनीतिक गुरु माना जाता है। कर्पूरी ठाकुर को बिहार की दलित और पिछड़ा राजनीति का अगुआ माना जाता है। इसलिए उनकी राजनीतिक विरासत पर सभी नेता दावा करते हैं। नीतीश ने रविवार (24 जनवरी) को उनकी जंयती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए केंद्र सरकार से ठाकुर को भारत रत्न देने की भी मांग की।

जब लालू प्रसाद यादव बिहार के सीएम थे तो राम सुन्दर दास ने एक लम्बा पत्र लिखकर कर्पूरी ठाकुर की मौत की जांच की मांग की थी। लालू प्रसाद ने इस पत्र को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तमाल करते हुए अपने कई तत्कालीन राजनीतिक विरोधियों के ऊपर नकेल कसे रखी लेकिन जांच कराने की जहमत नहीं उठायी। अब बीजेपी भी कर्पूरी ठाकुर की मौत की जांच की मांग करके महागठबंधन के नेताओं को साधने के साथ-साथ अति पिछड़ों के वोट बैंक को अपने पाले में लाने का प्रयास कर रही है। लेकिन इस बात की संभावना दूर-दूर तक नहीं दिख रही है कि सीएम नीतीश कुमार जांच के लिए किसी सूरत में तैयार होंगे।

आखिर ऐसा क्या राज है कि कोई भी सरकार स्वर्गीय ठाकुर की रहस्यमय मौत की जांच कराने के लिए तैयार नहीं होती है? इस पर एक बुजुर्ग सत्ताधारी नेता कहते हैं, “कोई भी सरकार जान बूझ कर अपने गले में फंदा क्यों डालेगी?’’ 1980 के दशक में बिहार की राजनीति को करीब से देखने वाले कई दूसरे लोग भी इस बात की तरफ संकेत करते हैं कि अगर कर्पूरी ठाकुर की मौत में कोई साजिश निकली तो इसके सूत्रधार उनके करीबी लोग ही हो सकते हैं। बिहार के सत्ताधारी दल के एक अन्य नेता ने कर्पूरी ठाकुर की मौत से जुड़े सवाल पर व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “प्रबुद्व लोगों का भी ये मत रहा है कि भूतकाल को भूलकर, भविष्य से चिंता रहित होकर मनुष्य को वर्तमान में जीने की आदत डालनी चाहिए, जिससे परम सुख मिलता है।”

बिहार की राजनीति को उस दौर में करीब से देखने वाले कुछ वरिष्ठ पत्रकारों की मानें तो मृत्यु से पहले के सालों में कर्पूरी ठाकुर काफी तनाव में रहते थे। 1979 में उनके करीबी लोगों ने उन्हें धोखा दिया और राज्य के सीएम की कुर्सी उनके हाथ से चली गयी। उसी समय एक महिला नेता ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। अंत समय से पहले उनके कुछ करीबियों पर ठाकुर के साथ मारपीट का भी आरोप लगा। मृत्यु से पहले ठाकुर एक योगी की मदद से कुछ यौगिक क्रियाएं भी करते थे। कुछ लोग कहते हैं कि मृत्यु से पहले ठाकुर के कुछ करीबी एक महिला नेता को तवज्जो देने को लेकर उनसे काफी नाराज रहते थे।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने नाम न देने की शर्त पर दावा किया कि प्राण निकलने से पहले कर्पूरी ठाकुर के मुंह से काफी झाग निकल रहा था। उनकी मृत्यु के बाद उन्हें योग कराने वाला योगी रातोंरात फरार हो गया। आरोप है कि ठाकुर के परिजनों और करीबियों ने उस योगी को पकड़ने की कभी कोशिश नहीं की। सरकारी दस्तावेज के अनुसार कर्पूरी ठाकुर की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। लेकिन कर्पूरी ठाकुर के कई चाहने वाले बगैर जांच के इस पर यकीन करने को तैयार नहीं।

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