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बिहार कृषि विश्वविद्यालय घोटाला: पुलिस ने सेलेक्शन कमेटी के सदस्यों और चयनित शिक्षकों को किया तलब, नीतीश कुमार के ‘करीबी’ हैं मुख्य आरोपी

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉक्टर मेवालाल को राज्य के सीएम नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय भर्ती घोटाला (सांकेतिक तस्वीर)

गिरधारी लाल जोशी

बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में गलत तरीके से बहाली करने को लेकर पूर्व कुलपति डा. मेवालाल चौधरी के खिलाफ दर्ज एफआईआर मामले में डीएसपी रमेश कुमार ने चयन समिति के 8 सदस्यों और पहली सूची में बहाल 15 कनीय शिक्षकों को नोटिस भेज हाजिर होने को कहा है। जिन कनीय बैज्ञानिकों नोटिस भेजी गयी है उनकी अकादमिक योग्यता बहाली के मापदंड के लायक नहीं थी। जस्टिस महफूज आलम की जांच रपट में भी इन नामों का जिक्र है। और इनमें ज्यादातर दूसरे प्रदेश के हैं। इससे पहले रजिस्ट्रार अशोक कुमार से डीएसपी ने पूछताछ की थी। जाहिर है मेवालाल को मेवा देकर मेवा खाने वाले सभी धीरे-धीरे पुलिस के घेरे में आएंगे।

एसएसपी मनोज कुमार बताते है कि पूर्व कुलपति के खिलाफ विभिन्न गैरजमानती दफा के तहत प्राथमिकी संख्या 35/17 लिखी है। जाँच के दौरान जरुरत और अपराध के मुताबिक दफाएं बदली भी जा सकती है। इसमें विश्वविद्यालय के अधिकारी और जिन्हें फायदा मिला वे भी घेरे में आ सकते है। इसके लिए डीएसपी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम का गठन किया है।

गौरतलब है कि डा. मेवालाल चौधरी फ़िलहाल मुंगेर के तारापुर विधानसभा सीट से जद(एकी) के विधायक है। जब भागलपुर कृषि कालेज को नीतीश कुमार की सरकार ने विश्वविद्यालय का दर्जा दिया तो मेवालाल चौधरी को पहला कुलपति बनाया। ये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विश्वासपात्र और नजदीकी माने जाते है। ये रिटायर हुए तो इनको जद (एकी) का टिकट दे विधायक बना दिया। इससे पहले ये जब कुलपति थे तो इनकी पत्नी नीता चौधरी जद (एकी) की टिकट पर तारापुर की विधायक चुनी गई थी। नीतीश कुमार से रिश्ते का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है। लेकिन बहाली में गड़बड़ी की बात सामने आने और राजभवन से प्राथमिकी दर्ज होने के बाद विपक्षियों के तेवर इनके खिलाफ कड़े होने की वजह से मेवालाल चौधरी को जद (एकी) से बाहर का रास्ता दिखाने को नीतीश कुमार को मजबूर होना पड़ा। दिलचस्प बात है कि विधायक बनने के पूर्व इन दोनों पत्नी पति की राजनैतिक पृष्टभूमि नहीं रही है। सोमवार और मंगलवार को विधान परिषद में भी विपछ ने डा. मेवालाल चौधरी की गिरफ़्तारी की मांग को लेकर हंगामा किया।

जानकार बताते है कि इनके कुलपति कार्यकाल में बड़ा खेल हुआ है। बहरहाल तो मामला 161 सहायक शिक्षक और जूनियर वैज्ञानिक बहाली में धांधली का है। इन बहालियों में डा. मेवालाल चौधरी ही बतौर कुलपति ही चयन बोर्ड के अच्छे थे। ये बहाली जुलाई 2011 में प्रकाशित इश्तहार के माध्यम से बाकायदा इंटरव्यू प्रक्रिया के तहत की गई थी। जिसमें 80 अंक अकादमी योग्यता, 10 अंक इंटरव्यू और 10 अंक पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के मिलकर 100 अंक तय किए थे। जिन 15 लोगों को हाजिर होने का नोटिस पुलिस ने दिया है उनमें किसी का भी अकादमी अंक 80 नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर के आधे से भी कम है। मगर इन्हें इंटरव्यू और प्वाइंट प्रजेंटेशन में पूरे 10-10 अंक देकर काबिल करार बता बहाल कर लिया।

बार-बार इस बात को बताना जरूरी है कि बहाली में गड़बड़ी और शोर-शराबा इनके अवकाश ग्रहण करते ही होने लगा था। जो मामला राजभवन पटना तक पहुंचा। मामला संगीन जान राज्यपाल सह कुलाधिपति ने गहन जांच का जिम्मा सेवानिवृत जज महफूज आलम को सौंपा। इन्होंने अपनी 63 पन्नों की जांच रपट हाल-फिलहाल राजभवन को दी। इसी 16 फरवरी को कुलाधिपति के प्रधान सचिव ने मेवालाल चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश वर्तमान कुलपति प्रो. अजय कुमार को दिया। और कुलसचिव ने एफआईआर दर्ज कराई।

जानकार बताते है कि माननीय न्यायमूर्ति महफूज आलम ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि उत्तराखंड के पंतनगर के उम्मीदवारों का फर्जी आवासीय प्रमाणपत्र बनाया गया। कम योग्यता वालों को साक्षात्कार और पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन में पूरे अंक दिए और उनके बारे में अनुकूल टिप्पणी भी खुद ही लिखी। और तो और काबिल और योग्य उम्मीदवारों को शून्य या एक दो नम्बर देकर अयोग्य करार दे दिया। शून्य या एक पाने वाले काबिल उम्मीदवारों की संख्या 133 बतायी जा रही है। इतना ही नहीं जिनको आकदमी योग्यता के 80 में 40 अंक आए उन्हें भी बहाल कर लिया गया। 23 ऐसे उम्मीदवारों का रिपोर्ट में जिक्र है जो नेट इम्तहान ही पास नहीं है। गड़बड़ी भवन निर्माण में भी है। जाहिर है चहेतों को बहाल किया और रुपयों ने हाथ बदला। मेवालाल चौधरी पंतनगर में भी रहे है।

एसएसपी मनोज कुमार बताते है कि जस्टिस की जांच रपट को ही आधार मानकर पुलिस भी अपनी तहकीकात करेगी। इस दौरान और गड़बड़ी मिली तो कसूरवार को बख्शा नहीं जाएगा। इधर जानकार बताते हैं कि डा. मेवालाल चौधरी अदालत से अग्रिम जमानत लेने की जुगत में है। हालांकि पुलिस उनको गिरफ्त में लेने से पहले हर तरह से पख्ता सबूत जुटाने में लगी है।

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