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कोख में बेटी की कामना

छठ के कुछ गीत हमें यह याद दिलाते हैं कि यह पर्व महज पुत्रों के लिए नहीं है, बल्कि बेटियों की शुभेच्छा से भी भरा हुआ है। इसके कई गीतों में बेटियों की कामना की गई है।

Author October 25, 2017 4:15 AM
Chhath Puja 2017 Geet, Songs: छठ पर्व सूर्यदेव की पूजा के लिए प्रसिद्ध है।

छठ शुद्ध रूप से प्रकृति पूजा का पर्व है। हर तरह के कर्मकांड और दिखावे से दूर, सिर्फ प्रकृति के प्रति कृतज्ञता दिखाने के अवसर के रूप में छठ को देखा जा सकता है। यह अवसर है सूर्य की पूजा का। सूर्य ही भारतीय संस्कृति में एकमात्र ऐसे देवता हैं जो साक्षात दिखते हैं। जलाशयों की महत्ता समझने-समझाने का त्योहार भी है यह। गौर करें कि छठ से पहले दशहरा और दिवाली आते हैं। दशहरे को हम बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाते हैं। यानी, अंत:करण की शुद्धता से जोड़ते हैं। इस पर्व के शुरू होते ही माना जाता है कि हम अपने भीतर की बुराइयों का खात्मा करने के लिए तत्पर हो जाते हैं। हम अपने भीतर की बुराइयों का समूल नाश कर खुद को शुद्ध करते हैं। आत्मिक शुद्धता के बाद बारी आती है घर के साफ-सफाई की। दिवाली वह अवसर है कि हम घर की साफ-सफाई शुरू कर देते हैं। खुद को नई रोशनी और ताजगी से भरने का पर्व है यह। तो इस तरह आत्मा और घर की शुद्धता के बाद बारी आती है समाज में साफ-सफाई की। नदी-तालाबों की साफ-सफाई की। इस साफ-सफाई का अवसर देता है महापर्व छठ। हम सड़क से लेकर नदी-तालाब तक की सफाई करने में जुट जाते हैं। दो शब्दों का यह चार दिवसीय पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर सप्तमी तक मनाया जाता है।  यूं तो पूरा कार्तिक महीना हिंदुओं के लिए धार्मिक रूप से खास महत्व रखता है, लेकिन उसमें भी छठ की विशेष अहमियत है। पूरे परिवार की सुख-समृद्धि और उन्नति के लिए यह त्योहार मनाया जाता है।

यह दुनिया का अकेला अवसर है जिसमें डूबते सूर्य का नमन किया जाता है। यह परंपरा इसे दूसरे पर्वों से अलग करती है। इससे समाज का यह दायित्व भी दिखता है कि जिस सूर्य ने हमें दिन भर तेज दिया, रोशनी दी, उसके निस्तेज होने पर भी हम उसे भूलते नहीं हैं। ऐसे ही संदेशों के कारण छठ को लोक आस्था का महापर्व कहा जाता है। इस पर्व पर लोककंठों से फूटने वाले गीत महज तुकबंदी नहीं हैं, बल्कि बेहद सारगर्भित हैं। यह बात खूब प्रचलित है कि छठ बेटों का त्योहार है। पुत्र प्राप्ति की इच्छा के साथ और पुत्र प्राप्ति के बाद कृतज्ञता जताने के लिए यह व्रत किया जाता है। लेकिन छठ के कुछ गीत हमें यह याद दिलाते हैं कि यह पर्व महज पुत्रों के लिए नहीं है, बल्कि बेटियों की शुभेच्छा से भी भरा हुआ है। इसके कई गीतों में बेटियों की कामना की गई है।

ऐसा ही एक गीत है – पांच पुत्तर, अन्न-धन लक्ष्मी, धियवा (बेटी) मंगबो जरूर। यानी बेटे और धन-धान्य की कामना तो की गई है, लेकिन उसमें यह बात भी है कि छठ माता से बेटी जरूर मांगना है। यह ‘जरूर’ शब्द साबित करता है कि बेटियों को लेकर छठ पूजा करने वाले समाज ने बेटों और बेटियों में फर्क नहीं किया। एक और गीत है कि रुनकी-झुनकी बेटी मांगिला, पढ़ल पंडितवा दामाद, हे छठी मइया…। ये गीत सदियों पुराने हैं। लोककंठों से फूटे थे ये गीत आज भी छठ के मौके पर गाए जाते हैं। इस गीत में रुनकी-झुनकी का मतलब स्वस्थ और घर-आंगन में दौड़ने वाली बेटी है। इसी पंक्ति में दामाद की भी मांग की गई है, पर गौर करें कि उस दामाद की कल्पना शरीर से बलिष्ठ नहीं, बल्कि मानसिक रूप से बलिष्ठ की है। इस गीत में छठी मइया से पढ़े-लिखे दामाद की मांग की गई है। यह बात ध्यान देने लायक है कि गीतों में नौकरीपेशा या व्यापार करने वाले दामाद की कल्पना नहीं है। तब हमारा समाज आज के मुकाबले भले ही अनपढ़ और पिछड़ा रहा हो, पर उस वक्त भी लोग समझते थे कि राजा तो अपने देश में ही पूजा जाता है, लेकिन विद्वान की पूजा सर्वत्र होती है (स्वदेशे पूज्यते राजा, विद्वान सर्वत्र पूज्यते)। इस सिद्धांत की औपचारिक जानकारी उस समाज को भले न हो, लेकिन विद्या के महत्त्व से वह परिचित था।

यह पर्व मुख्य रूप से बिहार (झारखंड समेत) और पूर्वी उत्तर प्रदेश का है, जो जातीयता के लिए बदनाम है। छठ के गीतों में भी समाज की जातीय संरचना को दरकिनार नहीं किया गया है। इस तल्ख सच्चाई से आंखें नहीं मूंदी गई हैं, बल्कि सभी जातियों को उचित सम्मान देने की कोशिश की गई है। एक बहुचर्चित गीत है – छोटी-मुटी मालिन बिटिया के भुइयां लोटे हो केस, फूलवा ले अइह हो बिटिया अरघिया के बेर। इसी तरीके से ग्वालिन बिटिया का अर्घ्य के समय दूध के लिए भी जिक्र आता है। साथ ही, एक बार फिर इन गीतों में बेटियों का जिक्र आना यह साबित करता है कि ऊपर के गानों में बेटियों की कामना महज संयोग नहीं है। यह अलग बात है कि पांच बेटों पर एक बेटी की कामना समाज में असमान होते लिंगानुपात को समान नहीं कर सकती, पर विचारणीय है कि उस समाज ने बेटी की कामना तो की है।

 

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