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ब‍िहार: नक्‍सल प्रभावित 1200 गरीब बच्‍चे रेलवे प्‍लैटफॉर्म पर कर रहे कम्‍पीट‍िशन की तैयारी, एसपी ने द‍िया एंट्री कार्ड

पटना से 170 किलोमीटर दूर सासाराम रेलवे स्टेशन पर नक्सल प्रभावित इलाके से आने वाले 1200 बच्चे रातभर जागकर रेलवे की रौशनी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

आमतौर पर पुलिस की छवि जनमानस में अच्छी नहीं होती है। पुलिस अधिकारियों को भी अक्सर शोषण करने वाला माना जाता है। यहां तक कि कहा जाता है कि पुलिस से ना तो दोस्ती अच्छी होती है और ना ही दुश्मनी लेकिन पटना के रेल एसपी जीतेन्द्र मिश्रा आज की तारीख में इसके अपवाद बन चुके हैं। उन्होंने ऐसे 500 गरीब बच्चों की मदद की है जो रात की रोशनी में रेलवे प्लेटफॉर्म पर पढ़कर कम्पीटिशन की तैयारी करते हैं। दे टेलीग्राफ के मुताबिक रेल एसपी की पहल पर इन गरीब बच्चों को प्लेटफॉर्म पर एंट्री के लिए आईकार्ड मुहैया कराया गया है।

दरअसल, पटना से 170 किलोमीटर दूर सासाराम रेलवे स्टेशन पर नक्सल प्रभावित इलाके से आने वाले 1200 बच्चे रातभर जागकर रेलवे की रौशनी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ये बच्चे सभी एक-दूसरे के मददगार हैं। सीनियर बच्चे जूनियर्स को सफलता के टिप्स देते हैं और उन्हें फ्री कोचिंग भी देते हैं। लेकिन अक्सर जीआरपी के लोग उन्हें प्लेटफॉर्म से भगा दिया करते थे। कुछ लोगों ने तो पुलिस में शिकायत भी की कि छात्रों के वेश में कुछ असामाजिक तत्वों ने प्लेटफॉर्म को डेरा बना लिया है।

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जब रेल एसपी जीतेंद्र मिश्रा इसकी जांच करने सासाराम रेलवे स्टेशन पहुंचे तो उन्होंने उन बच्चों से मुलाकात की। तब उन्हें पता चला कि ये लोग गरीबी की वजह से प्लेटफॉर्म पर आकर पढ़ते हैं। एसपी ने उनकी परेशानियों को समझते हुए 500 बच्चों को आईकार्ड दिलाया है ताकि वे लोग रेलवे स्टेशन परिसर में बिना कोई शुल्क दिए आ-जा सकें और अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। बता दें कि रेलवे परिसर में बिना प्लेटफॉर्म टिकट या यात्रा टिकट के प्रवेश करना प्रतिबंधित है। इसी की आड़ में अक्सर इन्हें रेलवे प्लेटफॉर्म से भाग दिया जाता था।

जिन बच्चों को आई कार्ड दिया गया है,उनलोगों ने खुशी जताई है और बताया कि उनके कई साथी का चयन रेलवे, एयर फोर्स, नेवी, बैंकिंग और अन्य सेवाओं की नौकरियों के लिए हो चुका है। इनके मुताबिक काफी लंबे समय से सासाराम प्लेटफॉर्म पर गरीब बच्चों का झुंड प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।

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