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नीतीश कुमार बिना ‘आधार’ के छात्रों को न देंगे स्कॉलरशिप, न साइकिल और न पोशाक, कैबिनेट में लिया फैसला

इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा में आर्थिक मदद और अन्य तरह की सुविधा प्राप्त करने के लिए लोगों को आधार कार्ड बनवाना होगा।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (पीटीआई फाइल फोटो)

केंद्र सरकार के नक्शे कदम पर चलते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कई चीजों के लिए आधार संख्या को अनिवार्य कर दिया है। नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में फैसला लिया गया कि बिना आधार संख्या के न तो छात्रों का छात्रवृत्ति दी जाएगी और न ही उन्हें पोशाक या साइकिल दी जाएगी। बिहार में अब जिसके पास आधार कार्ड होगा सरकार उसी बच्चे को छात्रवृत्ति देगी। शुक्रवार को नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इसके अलावा अन्य कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई गई।  सामाजिक सुरक्षा में आर्थिक मदद और अन्य तरह की सुविधा प्राप्त करने के लिए लोगों को आधार कार्ड बनवाना होगा। इसी के साथ कैबिनेट ने भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में जगह देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सिफारिश की है।

सरकार ने कहा कि 6 महीने के भीतर राज्य में लोगों को जागरूक किया जाएगा और आधार कार्ड बनवाने के लिए एक हजार केंद्र खोले जाएंगे। जानकारी के मुताबिक बिहार में 2.5 करोड़ ऐसे लोग हैं जिन्होंने अभी तक अपना आधार कार्ड नहीं बनवाया है जिनमें शून्य से पांच साल की आयु के 1.19 करोड़ बच्चे और पांच साल से ज्यादा उम्र के 1.31 करोड़ लोग शामिल हैं। वहीं राज्य में जिन स्कूली बच्चों को बिहार सरकार की तरफ से साइकिल, पोशाक जैसी अन्य सुविधा नहीं दी गई हैं उन बच्चों को अपने बैंक के खातों को 31 मार्च तक आधार कार्ड से लिंक कराने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि जितनी जल्दी बच्चों के खातों के साथ उनका आधार कार्ड जुड़ेगा उतनी जल्दी ही उनके खातों में उनके पैसे पहुंचा दिए जाएंगे।

आपको बता दें कि देश में 3 करोड़ से ज्यादा लोग भोजपुरी भाषा बोलते हैं। भोजपुरी नेपाल की दक्षिणी सीमा से लेकर झारखंड के छोटानागपुर और यूपी के कई जिलों समेत बिहार के कई जिलों में बोली जाती है। फिलहाल आठवीं सूची में अभी 22 भाषाएं शामिल हैं जिनमें बांग्ला, बोड़ो, डोगरी, गुजराती, हिन्दी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगू, उर्दू. असमिया शामिल हैं। मैथिली भाषा सबसे ज्यादा बिहार में बोली जाने वाली भाषा है।

 

 

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