Nitish Kumar appreciated all over India on Liquor Ban, while Narendra Modi in Trouble - शराबबंदी ने बढ़ाया नीतीश कुमार का कद: नरेंद्र मोदी ने की तारीफ, गुजरात ने कड़े किए नियम, यूपी-राजस्थान में भी उठी नशामुक्ति की मांग - Jansatta
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शराबबंदी ने बढ़ाया नीतीश कुमार का कद: नरेंद्र मोदी ने की तारीफ, गुजरात ने कड़े किए नियम, यूपी-राजस्थान में भी उठी नशामुक्ति की मांग

गुजरात सरकार ने बिहार की तर्ज पर अपने कानून में संशोधन किया है जिसके तहत शराबबंदी का उल्लंघन करने पर अब10 साल जेल और 5 लाख रुपए तक दंड का प्रावधान किया गया है।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार (बाएं) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (इंडियन एक्सप्रेस ग्राफिक्स)

स्वामी विवेकानंद ने लिखा था, ‘पहले हर अच्छी बात का मजाक बनाया जाता है, फिर उसका विरोध होता है और अंतत: उसे स्वीकार कर लिया जाता है।’ नीतीश कुमार की शराबबंदी योजना पर यह बात सटीक बैठती है। लगता है साल 2017 बिहार के लिए नव बिहार साबित होगा। इसकी बानगी अभी से दिखने लगी है। इसके साथ ही नीतीश कुमार ने शराबबंदी का जो झंडा बिहार में बुलंद किया है उसकी सुगबुगाहट अब दूसरे राज्यों में भी दिखने लगी है। मसलन, यूपी, राजस्थान में भी शराबबंदी की बात उठने लगी है। इधर, नीतीश सरकार ने राजगीर में हुई कैबिनेट बैठक में साल 2017- 2018 के लिए डिस्टिलरी (स्प्रिट बनाने के कारखाने) के लाइसेंस का नवीकरण नहीं करने का फैसला लिया है। फिलहाल राज्य में इस तरह की 21 डिस्टिलरी चल रही हैं। इन स्प्रिट से शराब बनती है। यह एक बड़ा और साहसिक फैसला है। विपक्ष इसकी लगातार मांग कर रहा था और शराबबंदी के बीच चल रहे इन कारखानों के मुद्दे पर सरकार को चिढ़ा रहा था। अब इस फैसले से सभी का मुंह बंद हो गया है। इतना ही नहीं बिहार को नशा मुक्त करने का अभियान भी जोरों पर है। 22 मार्च तक यह अभियान चलेगा।

हालांकि, इन सबके बीच राज्य में शराब की तस्करी भी जारी है। तस्करी कैसे रुके, यह नीतीश कुमार के लिए बड़ी चिंता है। फिर भी बिहार को नशामुक्त बनाने के लिए वो अडिग हैं। इत्तफाकन दूसरे फैसले से भी इनको समर्थन मिला है। मिसाल के तौर पर सुप्रीम कोर्ट का हाल में जारी आदेश है। आदेश के मुताबिक नेशनल और स्टेट हाईवे सड़क के इर्द-गिर्द शराब की दुकानों को पहली अप्रैल 2017 से हटाना होगा। अब नए लाइसेंस जारी करने की मनाही होगी। इतना ही नहीं 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानें नहीं खोली जा सकेंगी। इस फैसले से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय में एक शराबबंदी को पूरा बल मिला है। शायद तभी अपनी चेतना यात्रा के अंतिम चरण में नीतीश कुमार ने सीना ठोक कर इसे जायज बताया और कहा कि बिहार में इस वजह से अपराध में भी कमी आई है। इतना ही नहीं 21 जनवरी को 11 हजार 292 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला शराब बंदी के हिमायत में सूबे की सड़कों पर बनी। मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने दावा किया कि दुनिया की सबसे लंबी श्रृंखला किसी सामाजिक मुद्दे पर बिहार में बनी है। इसके लिए तमाम सरकारी अमले को लगाया गया था। थानों से लेकर सड़कों की दीवारों पर शराबबंदी का नारा लिखा गया। प्रकाश पर्व पर पटना आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शराबबंदी पर नीतीश कुमार की तारीफ कर उनमें और ऊर्जा भर दिया। तभी तो सभा में सीना ठोक कर नीतीश शराबबंदी की सफलता का दावा करते हैं और प्रधानमंत्री को पूरे देश खासकर भाजपा शासित राज्यों में इसे लागू कराने की बात कहते फिर रहे हैं। मसलन इस मुद्दे पर तारीफ करना अब नरेंद्र मोदी के गले की हड्डी बन गया है।

उनके दावे में कितना दम है। इस बहस से कोई लेना-देना नहीं है। मगर उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की सिकंदराबाद तहसील के ककोड़ इलाके के कपना गाँव मे बीते रोज बैठी पंचायत का फैसला तो आनेवाली सरकार को सोचने पर मजबूर कर देगा। पंचायत के मुखिया गिरेंद्र सिंह का कहना है कि पंचायत ने केवल शराबबंदी पर ही रोक नहीं लगाई है बल्कि शराब पीने और बेचने पर सख्त जुर्माना लगाने का ऐलान किया है। प्रावधान के तहत दारू पीते पकड़े जाने पर 2100 और बेचते धरे जाने पर 5160 रुपए नगद पंचायत को बतौर जुर्माना तत्काल देना पड़ेगा। शराब बेचने और पीने की सूचना देने वाले को पंचायत 500 रुपए इनाम भी देगी। इस फरमान का गाँव में बाकायदा नोटिस चिपकाया गया है। गाँव के ज्यादातर बाशिंदों ने भी शराबबंदी पर हामी भरी है और पंचायत के फैसले को अपने हक में बताया है।

मुखिया गिरेंद्र सिंह बताते हैं कि शराबखोरी से कई परिवार बर्बाद हो चुके हैं। हाल के सालों में शराब ने ना केवल कई जानें ली हैं बल्कि लोगों की जिंदगी में परेशानी का कारण भी बनी। पहले तो सिर्फ महिलाओं के जरिए शराब का विरोध होता था लेकिन अब तो बड़ा तबका बंदी का हिमायती है। इसी वजह से एकजुट होकर पंचायत ने यह फैसला सुनाया है। उत्तर प्रदेश में चुनाव है। हालांकि सभी दल इस मुद्दे पर मौन हैं। पर जो भी सरकार आएगी उसे सोचने पर मजबूर होना पड़ सकता है। पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच पर ही कपना गाँव की पंचायत ने यह काम किया। मसलन बिहार की आवाज अब उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के गाँव ने बुलंद की है।

दिसंबर के अंतिम हफ्ते में संवाददाता राजस्थान दौरे पर था। वहां के झुंझनु में एक स्थानीय नेता की होर्डिंग चौराहे पर दिखी, जिसपर लिखा था ‘ हमें चाहिए शराब मुक्त झुंझनु।’ इसी तरह जयपुर में एक होर्डिंग दिखी ‘ नए साल का स्वागत शराब से नहीं, दूध से कीजिये।’ इससे पहले दिल्ली सरकार ने भी शराबबंदी तो नहीं की। मगर सार्वजानिक स्थानों पर पीने की रोक लगाई है। कानून का उल्लंघन करने वाले को जुर्माना देना होगा। मसलन शराब बंदी की ओर यह पहला कदम माना जाना चाहिए। गुजरात में 1960 में शराबबंदी का कानून बना। वहां अबतक शराब बेचना या पीना मना है। पकड़े जाने पर 200-500 रुपए का जुर्माना और एक से छह महीने की जेल का प्रावधान है। बिहार के कानून में 10 लाख तक का जुर्माना और 7 से 10 साल तक जेल का नियम है। गुजरात सरकार ने इसी तर्ज पर पिछले दिनों अपने कानून में संशोधन किया है। जिसके तहत ज्यादा से ज्यादा 10 साल जेल और 5 लाख रुपए दंड का प्रावधान किया गया है।

जाहिर है गुजरात भी बिहार की तर्ज पर थोड़ा सख्त होने जा रहा है। यह अलग बात है कि बिहार में दंड के प्रावधान ज्यादा ही सख्त हैं, जिस पर लोगों से सुझाव मांगकर राज्य सरकार ने संशोधन के संकेत दिए हैं। यह ठीक भी है। मगर शराबबंदी का बिहार सरकार खास कर नीतीश कुमार के निश्चय का फैसला साल 2017 में लगता है देश के लिए नए युग की शुरुआत साबित हो सकता है। दूसरे सूबों में उठ रही आवाज तो यही बताती है।

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