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एनजीओ घोटाला: आधी रात में धरे गए डिप्टी कलेक्टर और नाजिर, लाखों के जेवर जब्त, विपक्ष ने मांगा सुशील मोदी का इस्तीफा

सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के साथ मिलकर इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा एवं सरकारी कर्मचारियों ने सरकारी खजाने को करीब 700 करोड़ रूपए का चूना लगाया गया है।
भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने बयान जारी कर मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अनुरोध पत्र लिखने की बात कही है।

भागलपुर की एनजीओ घोटाले में कार्रवाई करते हुए पुलिस और आर्थिक अपराध की एसआईटी ने रविवार की आधी रात को डिप्टी कलेक्टर रैंक के जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार और नाजिर महेश मंडल को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके आवास से लाखों के आभूषण और कागजात जब्त किए हैं। इन दोनों से गहन पूछताछ जारी है। एसएसपी मनोज कुमार के मुताबिक घोटाले में अब तक 8 एफआईआर दर्ज की गई हैं। डीएम के सहायक समेत 8 लोगों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। इस तरह कुल 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। बता दें कि सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के साथ मिलकर इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा एवं सरकारी कर्मचारियों ने सरकारी खजाने को करीब 700 करोड़ रूपए का चूना लगाया गया है।

इधर भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने बयान जारी कर मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अनुरोध पत्र लिखने की बात कही है। वहीं बांका से राजद सांसद जयप्रकाश नारायण यादव और भागलपुर के राजद सांसद बुलो मंडल ने भी सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि इतने बड़े घपले में लिप्त वैसे लोगों का असली चेहरा बगैर सीबीआई जांच के सामने नहीं आ पाएगा। यहां एक बात गौर करने लायक है कि अगर 2011 में आय कर महकमा द्वारा सृजन के गैर कानूनी लेन-देन पर किए गए सर्वे पर गौर किया जाता तो आज यह नौबत नहीं आती।

आर्थिक अपराध इकाई और पुलिस घोटाले से जुड़े 20 अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। उनमें से 10 लोगों की गहन तहकीकात चल रही है। इन लोगों की निशानदेही पर पुलिस संलिप्त लोगों के ठिकानों पर छापेमारी भी कर रही है। सृजन एनजीओ की सचिव प्रिया कुमार और उनके पति अमित कुमार को हिरासत में लेने के लिए पुलिस ने फिर से उनके आवास और दूसरे अन्य ठिकानों पर छापेमारी की है मगर कामयाबी हाथ नहीं लगी। इन दोनों का पासपोर्ट जब्त कराने के लिए एसएसपी ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है। आशंका जताई जा रही है कि ये दंपत्ति विदेश फरार हो सकते हैं। यों इनके ठिकाने से कई कागजात जब्त किए जा चुके हैं। इनसे सरकारी अधिकारियों, बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा राजनैतिक लोगों से खास संबंध जाहिर होता है।

गौरतलब है कि सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के कर्ताधर्ताओं के संबंध दिल्ली और पटना में बैठे बड़े राजनीतिक दलों के महारथियों से रहे हैं। इसके अलावा भागलपुर और आसपास के ऐसे दर्जनों लोग हैं जो सृजन के जरिए सरकारी धन को लूटकर रंक से राजा बन गए है। ऐसों की शहर में मॉल, बड़े-बड़े शोरूम और दर्जनों फ़्लैट हैं। इन लोगों ने रियल स्टेट और अपार्टमेंट बनाने में गलत तरीके से अर्जित धन को निवेश किया है। ऐसे लोगों की सूची आर्थिक अपराध इकाई और पुलिस के हाथ लगी है। एसएसपी इन सबको नोटिस भेजने की बात कह रहे हैं। चाहे वो कितनी भी हैसियत वाला हो।

भागलपुर के डीएम आदेश तितिरमारे इस फर्जीवाड़े को बैंकिंग धोखधड़ी कहते हैं। इस फर्जीवाड़े में मुख्यमंत्री नगर विकास योजना, नजारत, भू- अर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कल्याण विभागह, जिला विकास प्राधिकरण, डीआरडीए, जिला परिषद बगैरह विभागों की रकम शामिल है। दूसरे विभागों के हिसाब-किताब का मिलान अभी चल रहा है। पटना से वित्त विभाग की टीमें आकर ऑडिट और लेन-देन की जांच कर रही है। गबन की रकम 700 करोड़ से ज्यादा जाने की आशंका है।

सृजन महिला विकास सहयोग समिति की सचिव प्रिया कुमार।

बता दें कि साल 2011 में सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के लेन-देन का गहन सर्वे तत्तकालीन आयकर आयुक्त प्रशांत भूषण की निगरानी में हुआ था। इसके साथ ही इनसे जुड़े कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों, बिल्डरों और रंक से राजा बने लोगों का भी सर्वे आयकर विभाग की टीम ने किया था। उस वक्त 25 लाख रूपए अग्रिम टैक्स के तौर पर इनसे आयकर विभाग ने वसूले थे मगर संगठित गिरोह को यह रास नहीं आया। आयकर आयुक्त प्रशांत भूषण पर उस समय तरह-तरह के आरोप लगा उन्हें बदनाम किया गया था। फिर दिल्ली में बैठे इनके आकाओं के दबाव में उनका तबादला कर दिया गया था। इनके तबादला होते ही आयकर स्क्रूटनी में इन्हें क्लीन चिट दे दी गई। सूत्र कहते हैं कि अगर यह मामला फिर से खुले तो कुछ और असलियत सामने आ सकती है। प्रशांत भूषण फिलहाल पटना में पोस्टेड हैं। इनसे जनसत्ता.कॉम ने जब बात की तो उन्होंने इस बाबत अपनी हामी भरी है।

Bhagalpur एनजीओ घाटोले के आरोपियों को कोर्ट के आदेश पर जेल जाती हुई पुलिस।

इसके अलावे 2013 में भागलपुर के डीएम रहे  प्रेम सिंह मीणा ने रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देश के तहत सृजन महिला विकास समिति लिमिटेड के क्रियाकलापों की जांच के वास्ते कॉपरेटिव के दो अफसरों को लगाया था। सृजन का करोड़ों की जमा और करोड़ों का कर्ज देने की शैली उनके गले नहीं उतर रही थी। जबकि इसे रिजर्व बैंक के तहत कोई बैंकिंग लाइसेंस भी नहीं था। मगर उनके तबादले के बाद सब मामला रफा दफा हो गया मगर सृजन का खेल रसूखदारों के इशारे पर जारी रहा। अलबत्ता, राजद सांसद जयप्रकाश नारयण यादव और भागलपुर के सांसद बुलो मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी से इस्तीफे की मांग की है।

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