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बिहार: फर्जी टीईटी सर्टिफिकेट पर नौकरी कर रहे सैकड़ों लोग, अकेली पूनम के प्रमाण पत्र पर 11 लोग बन गए टीचर

वहीं इस मामले पर बात करते हुए जदयू के जिलाध्यक्ष जीवनलाल चंद्रवाशी ने दावा किया है कि जिस प्रकार पूनम से कई लोगों को भर्ती की गई है, उसी प्रकार राज्य में 800 शिक्षकों को भर्ती किया गया है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

बिहार में शिक्षकों की भर्ती में बहुत बड़ा घोटाला सामने आया है। हालत ये है कि टीईटी पास एक ही सर्टिफिकेट पर कई लोग नौकरी कर रहे हैं। विभागीय जांच में इसका खुलासा हुआ है। ताजा मामला नवादा जिले का है जहां पूनम नाम की शिक्षक के टीईटी सर्टिफिकेट पर 11 लोग नौकरी करते हुए पाए गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूनम कुमारी ने साल 2011 में बिहार शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास की थी लेकिन उसके सर्टिफिकेट पर 11 और पूनम शिक्षक बन गईं। ये सारी पूनम सरतकिया, मसोढ़ा उर्दू, पकरीबरावां के तिरवां, पीपरा पोखरा कौआकोल के मंझिला, मेसकौर के गांधीधाम, नारदीगंज के सुल्तानपुर, गोपालपुर और वारिसलीगंज के खीरभोजना जगहों के स्कूलों में शिक्षक हैं। वहीं इस मामले के उजागर होने का बाद शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं।

आपको बता दें कि पूनम के अलावा जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई लिस्ट में 260 ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें फर्जी टीईटी सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी दी गई। वहीं इसी के साथ कई ऐसे लोग भी हैं जो कि दूसरे जिलों के कोड नंबर और रोल नंबर पर शिक्षक की नौकरी कर रहे हैं। वहीं इस मामले पर बात करते हुए जदयू के जिलाध्यक्ष जीवनलाल चंद्रवाशी ने दावा किया है कि जिस प्रकार पूनम नाम से कई लोगों को भर्ती किया गया है, उसी प्रकार राज्य में 800 शिक्षकों को भर्ती किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके जरिए शिक्षक पैसा कमा रहे हैं। इसके बाद जिलाध्यक्ष चंद्रवंशी ने कहा कि इससे बिहार सरकार की किरकिरी हो रही है।

गौरतलब है कि शिक्षकों की तीसरे चरण की बहाली के लिए 2011 में टीईटी पास होना जरूरी कर दिया गया था। इसके बाद जब स्कूलों में भर्ती के लिए परीक्षा हुईं तो उसमें पास हुए परीक्षार्थियों के नकल के टीईटी के सर्टिफिकेट बना दिए गए। ऐसे में बैकलॉग के नाम पर स्कूलों में फर्जी शिक्षकों की भर्ती की गई। जहां एक तरफ तो सरकार जांच के आदेश दे रही है वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने इस मामले में जांच करने से मना कर दिया है। जिला प्रशासन ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर कहा है कि अधिकारियों की कमी के कारण जांच कराना संभव नहीं है। यह मामला दो महीने पुराना है लेकिन दो महीने के बाद भी अभी तक इस मामले में दोषियों के नाम सामने नहीं आ पाए हैं।

 

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