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ये सिर्फ आम नहीं, खास हैं- गुलाबख़ास, बंबईया, आम्रपाली, एलफेंसो की खुशबू से बाजार गुलजार

भागलपुर का मालदा आम दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसे लोग लँगड़ा आम के नाम से भी जानते हैं।

डॉक्टर भी मरीज को शरीर की लाली के लिए जर्दालू और बीजू आम खाने की सलाह देते हैं। (File Photo)

कम पैसे में भर पेट आम खाना हो तो मित्रों भागलपुर आइए। आंधी-तूफान के बावजूद फलों का राजा आम बाजार में छाया हुआ है। आम पेड़ों पर लटके पड़े हैं। गली-गली में सिर पर टोकरी लिए आम बेचने वालों का तांता लगा है। आम की कई नस्लें भागलपुर में पैदा होती हैं। फ़िलहाल आम यहां 30 से 50 रूपए प्रतिकिलो की दर से बिक रहा है। सैकड़ा भी 500 से 800 रूपए तक मिल रहा है। यानी, जैसा आम, वैसा दाम। आने वाले हफ्तों में आम के दाम और कम होने की उम्मीद है। यह मौका साल भर बाद आया है जब हरेक तबके के लोग पेट भर आम खाते हैं।

भागलपुर समेत पूर्वी बिहार के बाजार में अब तक मेहमान आम यानी दशहरी, हापुस और हिमसागर बगैरह नहीं आए हैं। और न ही यहां के लोग इसकी जरूरत महसूस कर रहे हैं बल्कि भागलपुर से रोजाना ट्रकों और रेल के जरिए देश के दूसरे हिस्सों में आम भेजे जा रहे हैं। मई के अंतिम हफ्ते से लेकर अब तक भागलपुर डिवीजन में कई रोज तेज आंधी और बारिश हुई, ओले पड़े। दो दर्जन के करीब मौतें हुई। अपराध से ज्यादा इन हादसों से लोग मरे। दर्जनों पेड़ गिरे। 20 फीसदी आम असमय टूटकर गिर गए। फिर भी आम के सीजन के अंत तक लोग आम खाते – खाते आजीज आ जाएंगे।

भागलपुर का मालदा आम दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसे लोग लँगड़ा आम के नाम से भी जानते हैं। जर्दालु और बीजू आम की अपनी तासीर है। इन आमों को डॉक्टर भी मरीज को शरीर की लाली के लिए खाने की सलाह देते हैं। यह पौष्टिक और सुपाच्य होता है। बीते दिनों भागलपुर के जिला प्रशासन की ओर से महामहिम राष्ट्रपति समेत कई केंद्रीय मंत्री को सैकड़ों पेटी जर्दालु आम सौगात के तौर पर भेजी गई। यहां के वाशिंदे भी देश के दूसरे जगह रह-रहे अपने रिश्तेदार को आम भेजकर ख़ुशी महसूस करते हैं।

हालांकि आम की किस्मों में गुलाबख़ास, बंबईया, आम्रपाली, एलफेंसो की खुशबू ही नहीं खाने को भी मिल जाएगा। लेकिन जर्दालु का मिठास भरा स्वाद बुजुर्ग – बच्चों को साल भर तरावट और ताजगी दिए रहता है। आम की किस्म सुकुल मुख्य तौर पर अचार के काम आती है। आम का स्वभाव है एक पेड़ में एक साल छोड़ कर मंजर आते है। मसलन जिस पेड़ में इस साल फल हो गया उसमें अगले साल फल नहीं होगा। वे पेड़ ठूठ से खड़े रहेंगे। मगर भागलपुर में हरेक साल आम इतनी बहुतायत में आते हैं कि पता ही नहीं चलता। सब्जी बेचने या सालोभर और कुछ धंधा करने वाले आम के सौदागर हो जाते हैं। साल भर बगीचेवालों और आढ़तियों को आम के मौसम का इंतजार रहता है। हम यों कहें आम होते हुए भी यह ख़ास हो जाता है।

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