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नीतीश राज में पिटाई के बाद फूट कर रोए सांसद पप्‍पू यादव, ‘लालू काल’ में था भारी खौफ

पप्पू का जलवा जेल से बाहर तक ही सीमित नहीं था। वो जेल के अंदर भी वीआईपी ट्रीटमेंट पाते थे। पप्पू पर जेल के अंदर पार्टी करने का भी आरोप लगा था।

राजद अध्यक्ष लालू यादव के साथ पप्पू यादव। (फोटो- एक्सप्रेस आर्काइव)

बिहार के मधेपुरा से सांसद पप्पू यादव सुर्खियों में हैं। 06 सितंबर को भारत बंद समर्थकों ने उन पर हमला बोलकर उन्हें घायल कर दिया। सांसद ने रो-रोकर आपबीती बताई। हालांकि, पप्पू की छवि खुद एक दबंग नेता के रूप में रही है। वो माकपा नेता और पूर्व विधायक अजित सरकार हत्याकांड में आरोपी रह चुके हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया है लेकिन जब पप्पू यादव इस मामले में ट्रायल फेस कर रहे थे तब बिहार की राजनीति में उनकी छवि एक दबंग और युवा नेता के तौर पर बनी थी। पप्पू उस वक्त राजद के सांसद थे और छात्रों के बीच उनकी अच्छी पैठ थी। आलम यह था कि वो बेऊर जेल के कैदी थे लेकिन बीमारी का बहाना बनाकर पप्पू पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) के कैदी वार्ड में भर्ती थे। पीएमसीएच का आलम यह था कि वहां फरियादी पप्पू यादव से मिलने के लिए लाइन लगाए रहते थे। पीएमसीएच में भी पप्पू यादव का सिक्का चलता था। वहां उन्होंने आईसीयू वार्ड के दो रूम पर कब्जा कर रखा था। पप्पू नियमों और सुरक्षा को ताक पर रखकर तब हॉस्पिटल के दूसरे वार्डों में भी घूमा करते थे। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में बिहार सरकार को फटकार लगाई थी और पप्पू यादव को तुरंत जेल में शिफ्ट करने का आदेश दिया था।

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पप्पू का जलवा जेल से बाहर तक ही सीमित नहीं था। वो जेल के अंदर भी वीआईपी ट्रीटमेंट पाते थे। पप्पू पर जेल के अंदर पार्टी करने का भी आरोप लगा था। साल 2004 में जब उन्हें अजित सरकार हत्याकांड में नियमित जमानत मिल गई तब वो पटना के बेऊर जेल से रिहा कर दिए गए लेकिन 26 सितंबर, 2004 को दोबारा जेल के अंदर घुसकर पार्टी की थी। तत्कालीन जेल आईजी ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही थी कि पप्पू यादव ने जेल नियमों को ताक पर रखकर रिहाई के बाद दोबारा जेल में गेट नंबर वन से एंट्री ली थी। आरोप है कि पप्पू ने वहां अपने करीब 50 समर्थकों समेत जेल कर्मचारियों को भी पार्टी दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट की तल्खी पर दो संतरी और जेल वार्डेन के सस्पेंड कर दिया गया था। जेल के अधिकारियों पर पार्टी के लिए जरूरी सामान उपलब्ध कराने के आरोप लगे थे। बाद में जमानत रद्द होने पर पप्पू को तिहाड़ जेल शिफ्ट कर दिया गया था।

तिहाड़ जेल में रहते हुए पप्पू ने अपनी आत्मकथा ‘द्रोहकाल का पथिक’ लिखा था। इस किताब में पप्पू ने दावा किया था कि साल 2008 यूपीए सरकार के विश्वास मत परीक्षण के दौरान कांग्रेस और भाजपा दोनों ने समर्थन जुटाने के लिए सांसदों को 40-40 करोड़ रूपये देने की पेशकश की थी। पप्पू ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि 2001 में एनडीए के समर्थन के लिए भी पैसे बांटे गए थे। पप्पू के मुताबिक, वर्ष 2001 में एनडीए सरकार के तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इंडियन फेडरल डेमोक्रैटिक पार्टी के तीन सांसदों को एनडीए का हिस्सा बनने के लिए पैसा दिया था। उन्होंने तत्कालीन सांसद अनवारूल हक को एक एसेंट कार के साथ 1 करोड रूपये मिलने का दावा कर राजनीतिक जगत में सनसनी फैला दी थी।

बता दें कि 14 जून 1998 को सीपीएम नेता और पूर्व विधायक अजित सरकार की पूर्णिया में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सीबीआई ने इस मामले में पप्पू यादव को नामित किया था। निचली अदालत ने साल 2008 में दोषी करार देते हुए पप्पू यादव को उम्रकैद की सजा सुनाई थी बाद में पटना हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में मई 2013 में उन्हें इस मामले में बरी कर दिया था। राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव 1991, 1996, 1999 और 2004 में लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। इस हत्याकांड में दोषी ढहराए जाने के बाद 2009 में उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गयी थी लेकिन हाईकोर्ट से बरी होने के बाद 2014 में उन्होंने मधेपुरा से शरद यादव को हराकर राजद के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता। पप्पू सपा, लोजपा और राजद में रह चुके हैं और अब अपनी पार्टी जन अधिकार पार्टी बना चुके हैं।

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