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जदयू नेताओं की गुहार- 2019 में भाजपा और पीएम नरेंद्र मोदी को हराने के लिए नीतीश कुमार रहें तैयार

पांच राज्यों में हुए विधान सभा चुनावों के बाद यह तय हो गया है कि पीएम मोदी को टक्कर देने का माद्दा न तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी में है और न ही आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल में।

जदयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (एक्सप्रेस फोटो)

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को टक्कर देने के लिए जनता दल यूनाइटेड के नेताओं ने बिहार के मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार से पहल करने की अपील की है। देशभर से आए जदयू नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को नीतीश कुमार के समर्थन में आवाज बुलंद की और उनसे अनुरोध किया कि वो इस लड़ाई के अगुवा बनें। दरअसल, पांच राज्यों में हुए विधान सभा चुनावों के बाद यह तय हो गया है कि पीएम मोदी को टक्कर देने का माद्दा न तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी में है और न ही आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल में। उत्तर प्रदेश में करारी हार का सामना करने वाले अखिलेश यादव भी इस काबिल नहीं रहे कि वो मोदी के विजय रथ को रोक सकें। उनके पिता मुलायम सिंह यादव पहले से ही हाशिए पर हैं। लालू प्रसाद यादव अदालती कारणों से चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

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लिहाजा, अब तय हो गया है कि गैर साम्प्रदायिक दलों के पास नीतीश कुमार के अलावा और कोई चेहरा नहीं है जो नरेन्द्र मोदी को रोक सके। साल 2015 के बिहार विधान सभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार ने कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाकर मोदी की आंधी को बिहार में नाकाम कर दिया था। बदली परिस्थितियों में कांग्रेस की ओर से भी इस तरह के गठबंधन के संकेत दिए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने भी सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को महागठबंधन कर 2019 के चुनाव लड़ने की बात कही है।

हालिया पांच राज्यों के चुनाव नतीजों ने नीतीश कुमार को निर्विवाद रूप से ऐसे गैर साम्प्रदायिक दलों का चेहरा बना दिया है जो 2019 में पीएम मोदी को चुनौती दे सकते हैं। नीतीश कुमार की छवि एक ऐसे राजनेता की है जिस पर कभी कोई दाग नहीं लगा। इसके अलावा उनकी छवि विकास पुरुष और सुशासन बाबू की रही है। उनके 10 वर्षों के शासन काल में बिहार का आर्थिक विकास भी देश के आर्थिक विकास दर से ज्यादा रहा है। इसके अलावा उन्हें नरेन्द्र मोदी का धुर विरोधी समझा जाता है। गौरतलब है कि साल 2013 में भाजपा द्वारा नरेन्द्र मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद नीतीश कुमार ने एनडीए गठबंधन से अपना पुराना रिश्ता तोड़ दिया था।

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