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एक ही दिन लालू परिवार पर दोहरी मार- पहले बेल पिटीशन खारिज, अब तीन लोगों पर चार्जशीट

इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और 13 अन्य के खिलाफ 16 अप्रैल को चार्जशीट फाइल की थी।

राजद अध्यक्ष लालू यादव अपनी पत्नी राबड़ी देवी और बेटों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव के साथ। (फाइल फोटो-PTI)

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के परिवार के लिए शुक्रवार (24 अगस्त) का दिन मुश्किलें लेकर आया। पहले तो झारखंड हाईकोर्ट ने बीमार लालू प्रसाद की अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने वाली याचिका खारिज कर दी और 30 अगस्त तक रांची की जेल में लौटने का फरमान सुनाया तो बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आईआरसीटीसी होटल के टेंडर मामले में लालू, उनके बेटे तेजस्वी यादव और पत्नी राबड़ी देवी समेत कुल 13 लोगों के खिलाफ दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पहली चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला साल 2006 का है, जब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे। लालू परिवार के अलावा ईडी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और लालू के खास रहे प्रेमचंद गुप्ता और उनकी पत्नी सरला गुप्ता को भी आरोपी बनाया है। चार्जशीट में लारा प्रोजेक्ट्स नामक फर्म का भी नाम है। इन सभी पर मनी लॉंड्रिंग के आरोप लगाए गए हैं।

लालू प्रसाद एवं आईआरसीटीसी के अधिकारियों पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए चहेते को आईआरसीटीसी का रांची और पुरी स्थित होटल सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर देने का आरोप है। ये कंपनी विजय कोचर और विनय कोचर की है। आरोप है कि टेंडर के बदले में कोचर बंधुओं ने पटना स्थित 358 डिसमिल जमीन डिलाइट मार्केटिंग कंपनी को औने-पौने दाम में बेच दी। यह कंपनी प्रेमचंद गुप्ता और सरला गुप्ता की है। बाद में गुप्ता परिवार ने उस कंपनी के शेयर बाजार भाव से भी बहुत कम दाम पर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को बेच दिए। इससे कंपनी और उस जमीन का मालिकाना हक राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के पास चला गया। एजेंसी ने इस मामले में अबतक करीब 44 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति सील की है। इधर, सभी आरोपियों को कोर्ट ने 31 अगस्त को पेश होने का समन जारी किया है।

बता दें कि इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और 13 अन्य के खिलाफ 16 अप्रैल को चार्जशीट फाइल की थी। विशेष जज अरविंद कुमार ने सीबीआई के आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए इन सभी को 31 अगस्त को अदालत में पेश होने के लिए कहा था। सीबीआई ने मामले में तत्कालीन आईआरसीटीसी प्रबंध निदेशक बी के अग्रवाल, तत्कालीन आईआरसीटीसी निदेशक राकेश सक्सेना और जीजीएम आईआरसीटीसी वी के अस्थाना और आर के गोयल को भी आरोपी बनाया है।

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